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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 137677 (ALL)
SRAVAN KUMAR v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. DEPTT. HOME U.P. LKO.
BAIL/3716/2025 · 2025-05-02
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 137677 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:25302 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3716 of 2025 Applicant :- Sravan Kumar Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Deptt. Home U.P. Lko. Counsel for Applicant :- Divyanshu Tripathi,Aman Kumar Shrivastav Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री अमन कक मप्रार शश्रीविप्रास्तवि तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री आललोक कक मप्रार वतविप्रारश्री कलो सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविललोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससंवहितप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तकत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 601 सन 2024, अन्तगरत धिप्रारप्रा 87, 64(1), 115(3), 351(3), 127(4)बश्री०एन०एस, रप्रानप्रा- मलोहिम्मदश्री, धजिलप्रा-खश्रीरश्री मम जिमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हिहै।
3. वदनप्रानाँक 14.09.2024 कलो धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपलोरर मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक वशकप्रायतकतर्थी ककी 18 विरर्थीय पकतश्री कलो पप्रारर्थी वदनप्रासंक 12.09.2024 ककी रप्रात बहिलप्रा-फक सलप्रा कर भगप्रा लके गयप्रा।
4. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके अन्तगरत असंवकत बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके अपनश्री आयक लगभग 17 विरर हिलोनप्रा कहिप्रा हिहै तरप्रा यहि कहिप्रा वक घरनप्रा ककी वदनप्रासंक विहि पप्रारर्थी कके सप्रार पहिलके शप्राहिजिहिप्रानाँपकर गई तरप्रा विहिप्रानाँ सके बरकेलश्री चलश्री गई एविसं विहिप्रानाँ वकरप्राए कप्रा कमरप्रा लकेकर रहिश्री। पश्रीवड़ितप्रा नके पप्रारर्थी दप्रारप्रा जिबरदस्तश्री गलत कप्राम करनके कप्रा करन वकयप्रा तरप्रा उसकके दप्रारप्रा अपनके घर सके लके जिप्रायप्रा गयप्रा जिकेविर वि पहैसप्रा छश्रीन लकेनके कप्रा भश्री करन वकयप्रा हिहै। वशकप्रायतकतर्थी नके कहिप्रा वक विहि जिहैसके-तहैसके वनकल पप्राई और अपनश्री मप्रानाँ कलो फलोन वकयप्रा तरप्रा उसककी मप्रानाँ विहिप्रानाँ पहिहसंच कर उसके विप्रापस रप्रानके लके गई। पश्रीवड़ितप्रा कके वचवकवतस्ककीय परश्रीकण मम चलोर अरविप्रा बल पयलोग कप्रा कलोई वचन्हि नहिहीं पप्रायप्रा गयप्रा हिहै।
5. धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस कके अन्तगरत असंवकत अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतर्थी नके पप्रारर्थी कके कहिनके पर अपनप्रा घर छलोड़िकर उसकके सप्रार बरकेलश्री जिप्रानप्रा, दलोननों नके वमलकर एक वकरप्राए कप्रा मकप्रान लकेनप्रा और 20 वदननों तक सप्रार रहिनके कप्रा करन वकयप्रा हिहै। यद्यवप पश्रीवड़ितप्रा नके कहिप्रा वक पप्रारर्थी नके उसके 20 वदन तक जिबरन कमरके मम बसंद रखप्रा और दलो बप्रार गलत कप्राम वकयप्रा एविसं पश्रीवड़ितप्रा कलो धिमककी दकेनके कप्रा भश्री करन वकयप्रा हिहै।
6.
पप्राररनप्रा पत कके सप्रार पस्तकत शपर पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी एक 19 विरर्थीय वनदर्दोर नवि-यकविक हिहै तरप्रा उसकप्रा कलोई पसूविर आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। पप्राररनप्रा पत कके सप्रार पश्रीवड़ितप्रा और पप्रारर्थी कके कक छ वचत ससंलग्न वकए गए हिह, धजिसमम पश्रीवड़ितप्रा पप्रारर्थी कके सप्रार पसन्नवचत मकदप्रा मम उसककी पत्नश्री कके रूप मम वदखप्राई दके रहिश्री हिहै तरप्रा उसकके चकेहिरके पर भय अरविप्रा पश्रीड़िप्रा कके कलोई भप्रावि नहिहीं हिहै।
7. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा पत कप्रा वविरलोधि करतके हिहए कहिप्रा वक वविविकेचनप्रा मम पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आरलोपनों ककी पकवष्टि हिहई हिहै और वदनप्रासंक 05.12.2024 कलो आरलोप पत पस्तकत वकयप्रा जिप्रा चककप्रा हिहै।
8. उपरलोक तथ्यनों कके दृवष्टिगत , जिबवक पश्रीवड़ितप्रा नके पप्रारर्थी कके सप्रार जिप्रा कर वकरप्राए कप्रा कमरप्रा लकेकर 20 वदन उसकके सप्रार रहिनके कप्रा करन वकयप्रा हिहै ; यद्यवप पश्रीवड़ितप्रा नके बल पयलोग कप्रा आरलोप लगप्रायप्रा हिहै , यहि आरलोप वचवकत्सककीय परश्रीकण आख्यप्रा सके समधररत नहिहीं हिहै ; पप्राररनप्रा पत कके सप्रार ससंलग्न वचतनों सके यहि पतश्रीत हिलोतप्रा हिहै वक पश्रीवड़ितप्रा पप्रारर्थी कके सप्रार पगप्राढ़ ससंबसंधि मम रश्री; पप्रारर्थी एक 19 विरर्थीय नवि-यकविक हिहै, धजिसकप्रा कलोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै, विहि वदनप्रासंक 23.10.2024 सके जिकेल मम वनरुद्ध हिहै तरप्रा वविविकेचनप्रा पसूणर हिलो चकककी हिहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकए जिप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै।
9. तदनकसप्रार, जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हिहै।
10. आविकेदक शविण कक मप्रार कलो वनम्नधलधखत शतर्दोसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजिस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दलो जिमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरलोक मप्रामलके मम जिमप्रानत
पर ररहिप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभयलोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयलोजिन पक कके सप्रावकयनों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयत ककी गई पत्यकेक वतधर पर उपसस्रत हिलोगप्रा। Order Date :- 2.5.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench