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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 137483 (ALL)
RAJESH v. STATE OF U.P. THRU. PRINCIPAL SECY. HOME
BAIL/3645/2025 · 2025-04-30
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 137483 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:24658 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3645 of 2025 Applicant :- Rajesh Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Principal Secy. Home Counsel for Applicant :- Suresh Kumar Yadav,Santosh Kumar Yadav Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री ससंततोष कक मप्रार यप्रादवि , वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री रववि शश्रीविप्रास्तवि तरप्रा वशकप्रायतकतर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री अवभिषकेक कक मप्रार पप्रासंडकेय कतो सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलतोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 483 भिप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससंवहितप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तकत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 76 सन 2025, अन्तगरत धिप्रारप्रा 70(1), 126(2), 352 बश्री०एन०एस, रप्रानप्रा-खखैरप्राबप्राद, धजिलप्रा-सश्रीतप्रापकर मम जिमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हिखै।
3. वदनप्रासंक 28.02.2025 कतो पप्रारर्थी तरप्रा ममौजिश्री कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपतोरर मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहिप्रा वक जिब विहि वदनप्रासंक 27.02.2025 ककी शप्राम 8 बजिके शमौच कके धलए खकेत जिप्रा रहिश्री रश्री, तब अवभियककगण नके रप्रास्तके मम रतोक कर हिप्रार पकड़ कर छकेड़-छप्राड़ ककी। वशकप्रायतकतर्थी दप्रारप्रा शतोर मचप्रानके पर अवभियककगण मप्रारनके-पश्रीरनके ककी धिमककी वि गप्राधलयप्रासं दकेतके हिहए भिप्राग गए।
4. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके अन्तगरत असंवकत अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतर्थी नके मप्रात परम ससूचनप्रा ररपतोरर कके करननों कतो हिश्री दतोहिरप्रायप्रा। वशकप्रायतकतर्थी नके वचवकत्सककीय परश्रीकण करप्रानके सके इसंकप्रार कर वदयप्रा तरप्रा वचवकत्सक कतो अपनश्री आयक 32 विषर बतप्राई।
5. धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस कके अन्तगरत असंवकत अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतर्थी नके अवभियककगण दप्रारप्रा गलत कप्राम करनके कप्रा भिश्री करन वकयप्रा हिखै।
6. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा पत कप्रा वविरतोधि करतके हिहए
कहिप्रा वक वविविकेचनप्रा मम पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आरतोपनों ककी पकवष्टि हिहई हिखै और वदनप्रासंक 03.03.2025 कतो आरतोप पत पस्तकत वकयप्रा जिप्रा चककप्रा हिखै।
7. वशकप्रायतकतर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा पत कप्रा घतोर वविरतोधि करतके हिहए कहिप्रा वक पप्रारर्थी पर एक सप्रामसूवहिक बलप्रात्कप्रार कप्रा आरतोप हिखै , अपरप्राधि अत्यन्त जिघन्य पकक वत कप्रा हिखै और इस कप्रारण पप्रारर्थी कतो जिमप्रानत नहिहीं दश्री जिप्रानश्री चप्रावहिए। उन्हिनोंनके यहि भिश्री कहिप्रा वक वशकप्रायतकतर्थी नके धिप्रारप्रा 183 कके अन्तगरत असंवकत अपनके बयप्रान मम सप्रामसूवहिक बलप्रात्कप्रार कप्रा करन वकयप्रा हिखै।
8.
उपरतोक तथ्यनों कके दृवष्टिगत , जिबवक पश्रीवड़तप्रा स्वियसं हिश्री वशकप्रायतकतर्थी हिखै एविसं परम ससूचनप्रा ररपतोरर घरनप्रा कके लगभिग एक वदन बप्राद धलखप्राई गई हिखै , वकन्तक उसमम वशकप्रायतकतर्थी नके मप्रात हिप्रार पकड़ कर छकेड़ -छप्राड़ कर गप्राधलयप्रासं दकेनके एविसं धिमककी दकेनके कप्रा आरतोप लगप्रायप्रा ; धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके असंतगरत असंवकत अपनके बयप्रान मम भिश्री वशकप्रायतकतर्थी नके मप्रात परम ससूचनप्रा ररपतोरर कके करननों कतो दतोहिरप्रायप्रा ; वशकप्रायतकतर्थी नके वचवकत्सककीय परश्रीकण करप्रानके सके इसंकप्रार कर वदयप्रा एविसं वचवकत्सक कतो अपनश्री आयक 32 विषर बतप्राई एविसं इसकके उपरप्रासंत धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस० कके असंतगरत बयप्रान दकेतके समय पहिलश्री बप्रार वशकप्रायतकतर्थी नके सप्रामसूवहिक बलप्रात्कप्रार कप्रा आरतोप लगप्रायप्रा हिखै , जितो परम दृष्टियप्रा बप्राद मम सतोच समझकर लगप्रायप्रा आरतोप पतश्रीत हितोतप्रा हिखै एविसं धजिसकप्रा समररन वचवकतस्ककीय परश्रीकण आख्यप्रा सके नहिहीं हितोतप्रा हिखै तरप्रा पप्रारर्थी कप्रा कतोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिखै एविसं विहि वदनप्रासंक 02.03.2025 सके जिकेल मम वनरुद्ध हिखै तरप्रा वविविकेचनप्रा पसूणर हितो चकककी हिखै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिखै वक पप्रारर्थी जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकए जिप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिखै।
9. तदनकसप्रार, जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हिखै।
10. आविकेदक रप्राजिकेश कतो वनम्नधलधखत शतरसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजिस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दतो जिमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरतोक मप्रामलके मम जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभियतोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़छप्राड़ नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभियतोजिन पक कके सप्रावकयनों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा;
(iii) आविकेदक वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयत ककी गई पत्यकेक वतधर पर उपसस्रत हितोगप्रा। Order Date :- 30.4.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench