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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 137470 (ALL)

AVIRAL DIXIT @ PANDEY v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO.

BAIL/3628/2025 · 2025-04-30

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:24667 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3628 of 2025 Applicant :- Aviral Dixit @ Pandey Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko. Counsel for Applicant :- Arvind Kumar Verma,Harish Kumar,Suraj Kumar Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री अरवविविंद कक मप्रार विमप्रार्मा तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री अशशोक शश्रीविप्रास्तवि कशो सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलशोकन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा सविंवहितप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तकत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि सविंख्यप्रा 202 सन 2025, अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 70(1), 351(3) बश्री०एन०एस, रप्रानप्रा-मशोहिम्मदश्री, धजिलप्रा-खश्रीरश्री मम जिमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हिहै। 3. वदनप्राविंक 24.03.2025 कशो पप्रारर्थी तरप्रा बब्बबू अविस्रश्री कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम सबूचनप्रा ररपशोरर्मा मम यहि कहिप्रा हिहै वक वशकप्रायतकतर्थी नके पप्रापाँच विरर्मा पबूविर्मा बबृजिकेश गगौतम कके सप्रार शप्रादश्री ककी रश्री। वदनप्राविंक 23.03.2025 कशो समय 5 बजिके, जिब विहि बस्तगौलश्री बप्राजिप्रार सप्रामप्रान लकेनके गई रश्री , रप्रास्तके मम अवभयककगण नके घर छशोड़नके ककी बप्रात कहि -कर उसके गप्राड़श्री मम बहैठप्रा धलयप्रा और झप्रालके पर जिप्राकर जिबरदस्तश्री वगरप्राकर बलप्रात्कप्रार वकयप्रा। पवत कके आनके पर वशकप्रायतकतर्थी नके घरनप्रा ककी सबूचनप्रा 112 नविंबर पर दश्री। 4. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके अन्तगर्मात अविंवकत अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहिप्रा वक उसककी आयक 50 विरर्मा हिहै, उसकप्रा वविविप्राहि लगभग 20 विरर्मा पबूविर्मा वशवि शविंकर कके सप्रार हिहआ रप्रा तरप्रा वशवि शविंकर कके दकेहिप्राविंत कके बप्राद उसनके बबृजिकेश कके सप्रार लगभग 3-4 विरर्मा पबूविर्मा मविंवदर मम शप्रादश्री कर लश्री। घरनप्रा कके वदन बप्राजिप्रार सके लगौरतके समय अवभयककगण नके उसके झप्रालके पर छशोड़नके कशो कहिप्रा, जिहिप्रापाँ उसकप्रा पवत कप्राम करतप्रा हिहै। उन दशोननों नके उसके अपनश्री मशोररसप्राइवकल पर बहैठप्रा धलयप्रा, वकन्तक जिब वशकप्रायतकतर्थी नके उनसके जिप्रानके कशो कहिप्रा , तब विके दशोननों नहिहीं गए और उन लशोगनों नके उसकके सप्रार गलत कप्राम वकयप्रा। 5. वचवकत्सककीय परश्रीकण ररपशोरर्मा मम पश्रीवड़तप्रा कके शरश्रीर पर चशोर अरविप्रा बल पयशोग कप्रा कशोई वचन्हि नहिहीं पप्रायप्रा गयप्रा हिहै। 6. धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस कके अन्तगर्मात अविंवकत अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतर्थी नके अवभयककगण दप्रारप्रा शरप्राब कके नशके मम जिबरदस्तश्री घर कके अविंदर आकर बलप्रात्कप्रार करनके कप्रा करन वकयप्रा हिहै। 7. पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तकत शपर पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी एक 28 विरर्थीय वनदर्दोर नवि-यकविक हिहै तरप्रा उसकप्रा कशोई पबूविर्मा आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। 8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा पत कप्रा वविरशोधि करतके हिहए कहिप्रा वक वविविकेचनप्रा मम पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आरशोपनों ककी पकवष्टि हिहई हिहै और वदनप्राविंक 15.04.2025 कशो आरशोप पत पस्तकत वकयप्रा जिप्रा चककप्रा हिहै। 9. उपरशोक तथ्यनों कके दृवष्टिगत , जिबवक पश्रीवड़तप्रा स्वियविं हिश्री वशकप्रायतकतर्थी हिहै और परम सबूचनप्रा ररपशोरर्मा तरप्रा धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके अन्तगर्मात अविंवकत अपनके बयप्रान मम उसनके घरनप्रास्रल एक झप्रालप्रा बतप्रायप्रा हिहै, जिबवक धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस० कके बयप्रान मम घरनप्रा अपनके घर मम हिशोनप्रा कहिप्रा हिहै ; वचवकत्सककीय परश्रीकण ररपशोरर्मा सके बलप्रात्कप्रार कके आरशोप ककी पकवष्टि नहिहीं हिशोतश्री हिहै , पप्रारर्थी एक नवि-यकविक हिहै और उसकप्रा कशोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै एविविं विहि वदनप्राविंक 26.03.2025 सके जिकेल मम वनरुद्ध हिहै तरप्रा वविविकेचनप्रा पबूणर्मा हिशो चकककी हिहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकए जिप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 10. तदनकसप्रार, जिमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हिहै। 11. आविकेदक अवविरल दश्रीवकत @ पप्राविंडकेय कशो वनम्नधलधखत शतर्दोविं कके अधिश्रीन सविंबविंधधित मधजिस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी सविंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बविंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दशो जिमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरशोक मप्रामलके मम जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभयशोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़छप्राड़ नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयशोजिन पक कके सप्रावकयनों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयत ककी गई पत्यकेक वतधर पर उपसस्रत हिशोगप्रा। Order Date :- 30.4.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench