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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 137432 (ALL)

MANOJ KUMAR YADAV v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. DEPTT. OF HOME LKO.

BAIL/3670/2025 · 2025-05-05

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:25679 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3670 of 2025 Applicant :- Manoj Kumar Yadav Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Deptt. Of Home Lko. Counsel for Applicant :- Prashant Tiwari Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री वदिलश्रीप कक मप्रार चचौधिरश्री वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री रप्राजश्रीवि कक मप्रार विमप्रार्मा कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 439 दिदं०प०सदं०/483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा सदंवहितप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तकत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदिमप्रा अपरप्राधि सदंख्यप्रा 277 सन 2024, अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 302 भप्रा०दिदं०सदं०, रप्रानप्रा-हिहजजूरपकर, धजलप्रा-बहिरप्राइच मम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हिहै। 3. वदिनप्रादंक 22.06.2024 कको पप्रारर्थी सवहित चप्रार व्यवकययों कके वविरुद्ध धिप्रारप्रा 156(3) दिदं०प०सदं० कके अन्तगर्मात पस्तकत पप्रारर्मानप्रा पत कके आधिप्रार पर धलखप्राई गई परम सजूचनप्रा ररपकोरर्मा मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक वशकप्रायतकतप्रार्मा पप्रापाँच सगके भप्राई रके, धजनमम सके एक सहि-अवभयकक कन्धिई लप्राल भश्री हिहै। वशकप्रायतकतप्रार्मा कके सबसके बडके भप्राई भगकोलके कप्रा वविविप्राहि नहिहीं हिहआ रप्रा। वदिनप्रादंक 22.02.2024 कको कन्धिई लप्राल अपनके पकत कके सप्रार भगकोलके कको मकोररसप्राइवकल पर बहैठप्राकर वदिन मम दिको बजके कहिहीं लके गयप्रा और सप्रादंय 5 बजके ममृत अविस्रप्रा मम विप्रापस लप्राकर दिप्राहि सदंस्कप्रार कर वदियप्रा। ममृतक कके वहिस्सके मम 8 बश्रीघप्रा जमश्रीन एविदं मकप्रान रप्रा, धजसककी विसश्रीयत वदिनप्रादंक 22.02.2024 कको सप्रादंय 4 बजके कन्धिई लप्राल नके अपनके पकत मकलप्रायम धसदंहि यप्रादिवि कके नप्राम करप्रा वदियप्रा एविदं पप्रारर्थी सवहित अन्य दिको नप्रावमत अवभयककगण विसश्रीयत कके वनष्पप्रादिन कके गविप्राहि रके। 4. पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार पस्तकत शपर-पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदिर्दोष हिहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। 5. वविविकेचनप्रा कके दिचौरप्रान वशकप्रायतकतप्रार्मा नके परम सजूचनप्रा ररपकोरर्मा कके करनयों कप्रा समरर्मान वकयप्रा। वविविकेचक नके वशकप्रायतकतप्रार्मा सके पजूछप्रा वक उसनके अपनके भप्राई ककी ममृत्यक हिकोनके पर तत्कप्राल पकधलस कको सजूचनप्रा क्ययों नहिहीं दिश्री, जबवक उसके शक रप्रा वक अवभयककगण नके उसकके भप्राई ककी हित्यप्रा वकयप्रा, धजस पर वविविकेचक नके कहिप्रा वक बहिन तरप्रा गप्रापाँवि कके लकोगयों दप्रारप्रा मनप्रा कर दिकेनके कके कप्रारण पकधलस कको सजूचनप्रा नहिहीं दिश्री एविदं पकोस्रमप्रारर्माम (पश्री.एम.) नहिहीं करप्रायप्रा। वशकप्रायतकतप्रार्मा नके यहि भश्री कहिप्रा वक दिप्राहि -सदंस्कप्रार वि वक्रियप्रा-कमर्मा मम ममृतक कके सभश्री भप्राई मचौजजूदि रके। कधरत विसश्रीयत ककी पवत वशकप्रायतकतप्रार्मा वविविकेचक कको उपलब्धि नहिहीं करप्रा पप्राए। 6. कक छ अन्य व्यवकययों नके वविविकेचक कको शपर पत दिकेकर यहि कहिप्रा वक ममृतक तपकेवदिक (कयरकोग) और लकविप्रा रकोग सके ग्रस्त रप्रा और बश्रीमप्रारश्री कके कप्रारण उसककी ममृत्यक हिहई। सभश्री नके कहिप्रा वक ममृतक ककी ममृत्यक स्विप्राभप्रावविक रूप सके हिहई हिहै तरप्रा वकसश्री कके दप्रारप्रा हित्यप्रा नहिहीं ककी गई हिहै। 7. एक पजूरक शपर-पत कके मप्राध्यम सके दिको अन्य आपरप्राधधिक पकरणयों मम पप्रारर्थी ककी सदंधलप्ततप्रा दिशप्रार्मायश्री गयश्री हिहै धजसमम सके एक पकरण मम वविविकेचक नके अदंवतम आख्यप्रा पस्तकत कर दिश्री हिहै तरप्रा दिजूसरके पकरण मम जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत लदंवबत हिहै। 8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम नके पप्रारर्मानप्रा पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक वविविकेचनप्रा मम पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आरकोपयों ककी पकवष्टि हिहई हिहै और वदिनप्रादंक 17.03.2025 कको आरकोप पत पस्तकत वकयप्रा जप्रा चककप्रा हिहै। वशकप्रायतकतप्रार्मा कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके भश्री पप्रारर्मानप्रा पत कप्रा वविरकोधि वकयप्रा। 9. उपरकोक तथ्ययों कके दृवष्टिगत , जबवक वशकप्रायतकतप्रार्मा कके भप्राई ककी ममृत्यक वदिनप्रादंक 22.02.2024 कको हिहई तरप्रा अदंवतम सदंस्कप्रार मम स्विश्रीकमृ त रूप सके वशकप्रायतकतप्रार्मा समममधलत हिहआ तरप्रा उसनके पकधलस कको ककोई सजूचनप्रा नहिहीं दिश्री , इसकके बप्रादि परम सजूचनप्रा ररपकोरर्मा 156(3) दि०प०सदं० कके अन्तगर्मात वदिए गए पप्रारर्मानप्रा पत कके आधिप्रार पर वदिनप्रादंक 22.06.2024 कको अदंवकत हिहई; स्वितदंत सप्रावकययों नके कहिप्रा वक ममृतक ककी ममृत्यक बश्रीमप्रारश्री सके हिहई हिह; दिको सहि-अवभयककगण कको जमप्रानत वमल चकककी हिहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी भश्री जमप्रानत पर ररहिप्रा वकए जप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 10. तदिनकसप्रार, जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै। 11. आविकेदिक मनकोज कक मप्रार यप्रादिवि कको वनमनधलधखत शतर्दोदं कके अधिश्रीन सदंबदंधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी सदंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बदंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दिको जमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदिक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेडछप्राड नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदिक अवभयकोजन पक कके सप्रावकययों पर दिबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदिक वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयत ककी गई पत्यकेक वतधर पर उपमस्रत हिकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 5.5.2025/Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench