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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 136468 (ALL)
MITHLESH SINGH v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. DEPTT. OF HOME LKO.
BAIL/3497/2025 · 2025-04-29
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 136468 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:24238 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3497 of 2025 Applicant :- Mithlesh Singh Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Deptt. Of Home Lko. Counsel for Applicant :- Amit Tewari,Srees Kumar Srivastava Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारररननी कके वविदप्रान अरधिविकप्रा शनी वशिरनीष कक मप्रार शनीविप्रास्तवि , वविदप्रान अपर शिप्रासककीय अरधिविकप्रा परम शनी रप्राजनीवि कक मप्रार विमप्रार तरप्रा वशिकप्रायतकतप्रार कके वविदप्रान अरधिविकप्रा शनी अवभिननीत जप्रायसविप्राल कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलनी कप्रा पररशिनीलन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 483 भिप्रारतनीय नप्रागररक सकरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगरत पस्तकत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 252 सन 2024 अन्तगरत धिप्रारप्रा 498- , 304 A B भिप्रा०दसं०ससं० वि धिप्रारप्रा 3/4 दहिकेज पवतषकेधि अरधिवनयम रप्रानप्रा गसंगप्राघप्राट रजलप्रा उनप्रावि मम जमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हिहै।
3. वदनप्रासंक 20.05.2024 कको पप्रारररननी, उसकके पवत तरप्रा दको पकतत्रों कके वविरुद्ध रलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोटर मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक वशिकप्रायतकतप्रार नके अपननी बहिन कप्रा वविविप्राहि पप्रारररननी कके पकत सहि-अवभियकक- अवमत रससंहि कके सप्रार वदनप्रासंक 05.12.2023 कको वकयप्रा रप्रा। सभिनी अवभियककगण दहिकेज कके रलए उसके पतप्रावड़ित करतके रके तरप्रा वदनप्रासंक 19.05.2024 कको वशिकप्रायतकतप्रार ककी बहिन ककी ममृत्यक हिको गयनी।
4. शिवि वविच्छकेदन आख्यप्रा पर शिवि पर चकोट कप्रा ककोई वचह्न नहिहीं पप्रायप्रा गयप्रा। वविसरप्रा परनीकण मम एल्यकवमवनयम फफॉस्फप्राइड नप्रामक वविष ककी उपसस्रवत पप्रायनी गयनी।
5. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार पस्तकत शिपर -पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारररननी एक वनदर्दोष मवहिलप्रा हिहै और उसकप्रा ककोई आपरप्रारधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै।
6. पप्रारररननी कके छकोटके पकत रकोवहित रससंहि कको जमप्रानत पप्राररनप्रा -पत ससंख्यप्रा 2182 सन 2025 मम पप्राररत आदकेशि वदनप्रासंक 12.03.2025 दप्रारप्रा जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्रा चककप्रा हिहै।
7. वविदप्रान अपर शिप्रासककीय अरधिविकप्रा परम नके पप्राररनप्रा-पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक वविविकेचनप्रा मम आरकोपत्रों ककी पकवष्टि हिहई हिहै तरप्रा आरकोप-पत वदनप्रासंक 21.08.2024 कको पस्तकत हिको चककप्रा हिहै।
8.
वशिकप्रायतकतप्रार कके वविदप्रान अरधिविकप्रा शनी अवभिननीत जप्रायसविप्राल नके पप्राररनप्रा -पत कप्रा
वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक पप्रारररननी ममृतकप्रा ककी सप्रास हिहै, ममृतकप्रा ककी ममृत्यक वविविप्राहि कके मप्रात 5 महिनीनके कके असंदर ससकरप्राल मम वविष खप्रानके कके कप्रारण हिहई हिहै। अततः पप्रारररननी कको जमप्रानत नहिहीं वमलननी चप्रावहिए। उन्हित्रोंनके यहि भिनी कहिप्रा वक सहि-अवभियकक रकोवहित रससंहि कके जमप्रानत आदकेशि वदनप्रासंक 12.03.2025 मम असंवकत तथ्य वक पनीवड़ितप्रा ककी ममृत्यक अस्पतप्राल लके जप्रानके पर हिहई, गलत हिहै जबवक पनीवड़ितप्रा ककी ममृत्यक घर मम हिनी हिको गयनी रनी। वशिकप्रायतकतप्रार कके वविदप्रान अरधिविकप्रा नके शिबनीन अहिमद बनप्राम उत्तर पदकेशि रप्राज्य तरप्रा एक अन्य 2025 SCC
OnLine SC 479 कके वनणरय कप्रा आशय रलयप्रा रजसमम मप्रानननीय उच्चतम न्यप्रायप्रालय नके उच्च न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा अवभियकक कको दनी गयनी जमप्रानत कको इस आधिप्रार पर वनरस्त कर वदयप्रा रप्रा वक ममृतकप्रा ककी ममृत्यक गलप्रा घत्रोंटनके कके कप्रारण हिहई रनी तरप्रा यहि आत्महित्यप्रा नहिहीं रनी।
9. उपरकोक तथ्यत्रों कको दृवष्टिगत रखतके हिहए, जबवक पत्यकेक पकरण अपनके वविवशिष्टि तथ्यत्रों कके आधिप्रार पर वनणर्थीत वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै तरप्रा दम घत्रोंटकर हित्यप्रा वकयके जप्रानके कके पकरण मम जमप्रानत आदकेशि वनरस्त वकयके जप्रानके कके कप्रारण आत्महित्यप्रा कके पकरण मम जमप्रानत कप्रा पप्राररनप्रा-पत वनरस्तनीकरण कप्रा आधिप्रार नहिहीं बनतप्रा हिहै। यहि भिनी दृवष्टिगत रखतके हिहए वक पप्रारररननी तरप्रा सहि-अवभियकक रकोवहित रससंहि कके वविरुद्ध समप्रान पकमृ वत कके आरकोप लगप्रायके गयके हिह; पप्रारररननी एक मवहिलप्रा हिहै रजसकप्रा ककोई आपरप्रारधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै ; पप्रारररननी वदनप्रासंक 12.02.2025 सके न्यप्रावयक अवभिरकप्रा मम हिह, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारररननी जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्रानके ककी अरधिकप्राररणनी हिहै।
10. तद्नकसप्रार, जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विनीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै।
11. आविकेवदकप्रा वमरलकेशि रससंहि कको वनम्नरलरखत शितर्दोसं कके अधिनीन ससंबसंरधित मरजस्टटकेट/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत और समप्रान रप्रावशि ककी दको जमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेवदकप्रा अवभियकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहिहीं करकेगनी; (ii) आविकेवदकप्रा अवभियकोजन पक कके गविप्राहित्रों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगनी; (iii) आविकेवदकप्रा टटप्रायल ककोटर दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारनीख पर उपसस्रत हिकोगनी। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 29.4.2025/Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench