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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 136352 (ALL)

ABHISHEK PRAJAPATI @ ABHISHEK SINGH v. STATE OF U.P. THRU. ADDL. CHIEF SECY. DEPTT. OF HOME LKO.

BAIL/3717/2025 · 2025-05-02

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:25307 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3717 of 2025 Applicant :- Abhishek Prajapati @ Abhishek Singh Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Addl. Chief Secy. Deptt. Of Home Lko. Counsel for Applicant :- Lakshmana Singh,Digvijay Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री लक्ष्मण धससिंह तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री अननुरप्राग विमप्रार्मा कको सनुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सनुरकप्रा ससिंवहतप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तनुत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मनुकदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 27 सन 2025, अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 69, 352 बश्री०एन०एस, रप्रानप्रा-गनुडनुम्बप्रा, धजिलप्रा-लखनऊ मम जिमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हहै। 3. वदनप्रासिंक 27.01.2025 कको पप्रारर्थी, उसकके वपतप्रा, भप्राई एविसिं चप्राचप्रा कके वविरुद धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर्मा मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहप्रा वक पप्रारर्थी शप्रादश्री कप्रा झप्रासिंसप्रा दकेकर लगभग तश्रीन सप्राल सके उसकप्रा शप्रारश्रीररक शकोषण कर रहप्रा हहै एविसिं सप्रात महश्रीनके सके उसके शप्रादश्री ककी तप्रारश्रीखम दके रहप्रा हहै। 4. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके अन्तगर्मात असिंवकत अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतर्थी नके परम ससूचनप्रा ररपकोरर्मा कके करननों कप्रा समरर्मान वकयप्रा हहै। वशकयप्रातकतर्थी नके अपनप्रा वचवकत्सककीय परश्रीकण करप्रानके सके इसिंकप्रार कर वदयप्रा हहै तरप्रा वचवकत्सक कको अपनश्री आयनु 23 विषर्मा बतप्राई हहै। 5. धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस कके अन्तगर्मात असिंवकत अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहप्रा वक विह पप्रारर्थी सके मप्राह जिनविरश्री 2021 मम वमलश्री रश्री तरप्रा विह पप्रारर्थी कके पपॉलश्रीक्लश्रीवनक मम कप्राम करतश्री रश्री और उन दकोननों मम ससिंबसिंधि स्रप्रावपत हको गयप्रा। वशकप्रायतकतर्थी एक सप्राल तक विहहीं कप्राम करतश्री रश्री और विहहीं रुकतश्री रश्री तरप्रा पप्रारर्थी भश्री विहहीं रुकतप्रा रप्रा और धिश्रीरके-धिश्रीरके उनकके पररविप्रार कको भश्री इस बप्रारके मम पतप्रा चल गयप्रा। पप्रारर्थी कके पररविप्रार विप्रालनों नके कहप्रा वक पप्रारर्थी और वशकप्रायतकतर्थी ककी जिप्रावत अलग हहै इसधलए उनकप्रा वविविप्राह नहहीं हको सकतप्रा हहै। इसकके पश्चप्रात पप्रारर्थी कके वपतप्रा नके दहकेजि ककी मप्रामाँग ककी एविसिं शप्रादश्री वकसश्री न वकसश्री बहप्रानके रप्राल दश्री। 6. पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तनुत शपर पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी एक 26 विषर्थीय वनदर्दोष व्यवक हहै तरप्रा उसकप्रा ककोई पसूविर्मा आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै और उसकके वविरुद लगप्राए गए आरकोप सहश्री नहहीं हहै। 7. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा पत कप्रा वविरकोधि करतके हहए कहप्रा वक वविविकेचनप्रा मम पप्रारर्थी कके वविरुद आरकोपनों ककी पनुवष्टि हहई हहै और वदनप्रासिंक 05.03.2025 कको आरकोप पत पस्तनुत वकयप्रा जिप्रा चनुकप्रा हहै तरप्रा अन्य तश्रीननों अवभयनुकगण कके वविरुद लगप्राए गए आरकोपनों ककी पनुवष्टि वविविकेचनप्रा मम नहहीं हको पप्राई हहै। 8. उपरकोक तथ्यनों कके दृवष्टिगत , जिबवक पश्रीवडतप्रा एक वियस्क मवहलप्रा हहै तरप्रा अपनके बयप्राननों मम उसनके यह नहहीं कहप्रा हहै वक ससिंबसिंधिनों ककी शनुरुआत कके पसूविर्मा सके हश्री पप्रारर्थी नके उससके शप्रादश्री करनके कप्रा झप्रासिंसप्रा वदयप्रा रप्रा एविसिं उसनके अपनश्री मजिर्थी सके पप्रारर्थी सके ससिंबसिंधि बनप्राए हह ; वशकप्रायतकतर्थी नके अपनप्रा वचवकत्सककीय परश्रीकण करप्रानके सके अस्विश्रीकप्रार कर वदयप्रा हहै; पप्रारर्थी कप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै एविसिं विह वदनप्रासिंक 11.02.2025 सके जिकेल मम वनरुद हहै तरप्रा वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हको चनुककी हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जिमप्रानत पर ररहप्रा वकए जिप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै। 9. तदननुसप्रार, जिमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हहै। 10. आविकेदक अवभषकेक पजिप्रापवत @अवभषकेक धससिंह कको वनम्नधलधखत शतर्दोसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित मधजिस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतनुवष्टि कके अननुसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जिमप्रानतम पस्तनुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जिमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेडछप्राड नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजिन पक कके सप्रावकयनों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयत ककी गई पत्यकेक वतधर पर उपसस्रत हकोगप्रा। Order Date :- 2.5.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench