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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 136082 (ALL)

UPENDRA KUMAR v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME AND ANOTHER

ABAIL/444/2025 · 2025-04-24

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:23601 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 444 of 2025 Applicant :- Upendra Kumar Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home And Another Counsel for Applicant :- Anuj Kumar,Ashish Kumar Yadav Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री अननुज कनु मप्रार तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री अननुरप्राग विमप्रार्मा कको सनुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा। 2. भप्रारतश्रीय नप्रागररक सनुरकप्रा ससंवहितप्रा ककी धिप्रारप्रा 438 दसं०प०ससं० कके असंतगर्मात पस्तनुत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मनुकदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 110 सन 2024 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 376, 323, 504, 506 भप्रा०द०ववि०, रप्रानप्रा-वबिसविप्रासं, धजलप्रा-सश्रीतप्रापनुर मम अवग्रिम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हिहै। 3.वदनप्रासंक 15.03.2024 कको पप्रारर्थी तरप्रा एक अजप्रात व्यवक कके वविरुद उपरकोक परम ससूचनप्रा ररपकोरर्मा धिप्रारप्रा 156(3) दसं०प०ससं० कके अन्तगर्मात वदनप्रासंक 29.01.2024 कको वदए गए पप्रारर्मानप्रा पत कके आधिप्रार पर ससंसस्रत हिहई , धजसमम वशकप्रायतकतर्थी नके कहिप्रा वक वदनप्रासंक 17.12.2023 कको जबि विहि विप्राहिन कके इसंतजप्रार मम रहैक्सश्री स्रटड पर खडश्री रश्री, पप्रारर्थी नके उसकको अपनश्री मप्रारुतश्री रहैक्सश्री मम बिहैठप्रा धलयप्रा, धजसमम पहिलके सके दको अजप्रात व्यवक बिहैठके हिहए रके। उन तश्रीननों नके वशकप्रायतकतर्थी कको बिश्रीच जसंगल मम लके जप्राकर उसकके सप्रार बिलप्रात्कप्रार वकयप्रा। वशकप्रायतकतर्थी नके घरनप्रा कके बिप्राद अपनके फसू फप्रा कके घर पहिहहुँचकर उसके घरनप्रा कके बिप्रारके मम बितप्रायप्रा और इसकके बिप्राद पनुधलस कको वशकप्रायत दश्री गई। ककोई कप्रायर्माविप्राहिश्री न हिकोनके पर वशकप्रायतकतर्थी नके पनुधलस अधिश्रीकक कको पसंजश्रीकक त डप्राक सके वशकप्रायत भकेजश्री, वकन्तनु उसककी रसश्रीद वशकप्रायतकतर्थी कके पप्रास उपलब्धि नहिह हिहै। 4. पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तनुत शपर पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हिहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिह हिहै। 5. वचवकत्सककीय परश्रीकण मम ऐसप्रा ककोई तथ्य पकप्राश मम नहिह आयप्रा जको लगप्राए गए आरकोपनों ककी पनुवष्टि करके। वशकप्रायतकतर्थी नके अपनश्री आयनु 26 विषर्मा बितप्राई हिहै। 6. धिप्रारप्रा 161 एविसं 164 दसं०प०ससं० कके असंतगर्मात असंवकत अपनके बियप्रान मम वशकप्रायतकतर्थी नके अपनके पसूविर्मा करननों कप्रा समरर्मान वकयप्रा। 7. पप्रारर्थी नके परम ससूचनप्रा ररपकोरर्मा ककी विहैधितप्रा कको चनुननौतश्री दकेतके हिहए इस न्यप्रायप्रालय समक आपरप्राधधिक पककीणर्मा ररर यप्रावचकप्रा ससंख्यप्रा 2550 सनन् 2024 पस्तनुत ककी रश्री, धजसमम पप्राररत आदकेश वदनप्रासंक 10.04.2024 सके पप्रारर्थी कके वविरुद समनुवचत सप्राक्ष्य एकवतत हिकोनके तक उसककी वगरफ्तप्रारश्री पर रकोक लगप्रा दश्री गई रश्री। 8. आरकोप पत पस्तनुत हिकोनके कके पश्चप्रात पप्रारर्थी नके धिप्रारप्रा 482 दसं०प०ससं० कके अन्तगर्मात पप्रारर्मानप्रा-पत ससंख्यप्रा 2104 सनन् 2025 पस्तनुत वकयप्रा, जको वदनप्रासंक 07.03.2025 कके आदकेश सके यहि कहितके हिहए वनस्तप्राररत कर दश्री गई, वक पप्रारर्थी आरकोपनों सके उन्मकोवचत वकए जप्रानके हिकेतनु वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय कके समक 15 वदन कके असंदर पप्रारर्मानप्रा पत पस्तनुत करम तको वविधधिननुसप्रार शश्रीघ्रतप्रापसूविर्माक वनणर्थीत वकयप्रा जप्राएगप्रा। 9. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम नके पप्रारर्मानप्रा पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक पप्रारर्थी नके आदकेश वदनप्रासंक 07.03.2025 कके अननुपप्रालन मम ककोई पप्रारर्मानप्रा पत समयप्रासंतगर्मात पस्तनुत नहिह वकयप्रा हिहै तरप्रा उसकके इस आचरण कके दृवष्टिगत विहि अवग्रिम जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री नहिह हिहै। 10. इस पप्रारसंवभक आपधत्ति कके उत्तिर मम पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके कहिप्रा वक पप्रारर्थी नके शपर पत मम यहि कहिप्रा हिहै वक धिनप्राभप्रावि कके कप्रारण पप्रारर्थी उन्मकोचन पप्रारर्मानप्रा पत पस्तनुत नहिह कर सकप्रा। 11. वविविकेचनप्रा मम वकसश्री अन्य सहि-अवभयनुक कके वविरुद लगप्राए गए आरकोप ककी पनुवष्टि नहिह हिहई तरप्रा मप्रात पप्रारर्थी कके वविरुद वदनप्रासंक 17.04.2024 कको असंतगर्मात धिप्रारप्रा 323, 504, 506, 376 भप्रा०दसं०ससं० कके आरकोपनों मम आरकोप पत पस्तनुत हिहआ हिहै। 12. उपरकोक तथ्यनों कको दृवष्टिगत रखतके हिहए , जबिवक घरनप्रा वदनप्रासंक 17.12.2023 ककी कहिश्री गई , वकन्तनु धिप्रारप्रा 156(3) कके अन्तगर्मात पप्रारर्मानप्रा पत वदनप्रासंक 29.01.2024 कको वदयप्रा गयप्रा; धिप्रारप्रा 156(3) कके अन्तगर्मात पप्रारर्मानप्रा पत दकेनके कके पसूविर्मा पनुधलस अधिश्रीकक कको अवनविप्रायर्मा रूप सके वदए जप्रानके विप्रालके पप्रारर्मानप्रा पत कके ससंबिसंधि मम ककोई सप्राक्ष्य उपलब्धि नहिह हिहै ;घरनप्रा तश्रीन लकोगनों दप्रारप्रा कप्राररत करनप्रा कहिप्रा गयप्रा हिहै, वकन्तनु दको लकोगनों कके वविरुद आरकोपनों ककी पनुवष्टि वविविकेचनप्रा मम नहिह हिहई; इस न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा पसूविर्मा मम पप्रारर्थी ककी वगरफ्तप्रारश्री कके वविरुद रकोक लगप्राई गई रश्री; पप्रारर्थी कप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिह हिहै और उसकके वविरुद वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हिको चनुककी हिहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी अवग्रिम जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 13. तदननुसप्रार, अवग्रिम जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै। 14. उपरकोक मनुकदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा मम आविकेदक ककी वगरफ्तप्रारश्री /न्यप्रायप्रालय कके समक उपसस्रवत ककी दशप्रा मम , उसके ससंबिसंधधित रप्रानके कके भप्रारसप्राधिक अधधिकप्रारश्री/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतनुवष्टि कके अननुसप्रार व्यवकगत बिसंधि पत एविसं दको पवतभसू पस्तनुत करनके पर परश्रीकण कके असंवतम रूप सके वनस्तप्रारण तक, वनम्न शतर्दोसं कके अधिश्रीन अवग्रिम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राएगप्राग- क- आविकेदक, यवद आविश्यक हिकोगप्रा तको पनुधलस अधधिकप्रारश्री दप्रारप्रा जजॉच हिकेतनु अपकेवकत समय पर उपसस्रत हिकोगप्रा। ख- आविकेदक मप्रामलके कके तथ्यनों सके पररवचत वकसश्री व्यवक यप्रा पनुधलस अधधिकप्राररयनों कको पत्यक यप्रा परकोक रूप सके ककोई धिमककी , विप्रादप्रा यप्रा पलकोभन नहिह दकेगप्रा धजससके वक विहि ऐसके तथ्य कको न्यप्रायप्रालय कके समक यप्रा वकसश्री पनुधलस अधधिकप्रारश्री कके समक पकर न करनके पर मप्रान जप्राए। ग- आविकेदक अदप्रालत ककी पसूविर्मा अननुमवत कके वबिनप्रा भप्रारत नहिह छकोडकेगप्रा; घ- आविकेदक कको पत्यकेक वनधिप्रार्माररत वतधर पर रटप्रायल ककोरर्मा कके समक उपसस्रत हिकोनप्रा हिकोगप्रा, जबि तक वक व्यवकगत उपसस्रवत सके छसू र न दश्री गयश्री हिको; ङ- आविकेदक अवभयकोजन पक कके गविप्राहि पर दबिप्रावि नहिह डप्रालकेगप्रा / धिमककी नहिह दकेगप्रा। च- आविकेदक वविविकेचनप्रा एविसं वविचप्रारण कके दनौरप्रान सहियकोग करमगके और जमप्रानत ककी स्वितसंततप्रा कप्रा दनुरुपयकोग नहिह करकेगप्रा। Order Date :- 24.4.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench