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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 135963 (ALL)
SIYARAM v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND ANOTHER
ABAIL/449/2025 · 2025-04-25
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 135963 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:23765 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 438 CR.P.C. No. - 449 of 2025 Applicant :- Siyaram Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And Another Counsel for Applicant :- Akhilendra Kumar Goswami,Rohit Kumar Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री अखकेलकेन्द्र कक मप्रार गगोस्विप्रामश्री तरप्रा वविदप्रान अवतररक शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री रप्राजश्रीवि कक मप्रार विमप्रार्मा कगो सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलगोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 482 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससंवहितप्रा दप्रारप्रा पस्तकत पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 46 सन 2017 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 306 भप्रा०द०ववि० रप्रानप्रा परसपकर धजलप्रा गगोण्डप्रा मम अवग्रिम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हिहै।
3. वदनप्रासंक 03.03.2017 कगो पप्रारर्थी, उसककी पत्नश्री तरप्रा पकत कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपगोरर्मा मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक वशकप्रायतकतप्रार्मा नके अपनश्री पकतश्री कप्रा वविविप्राहि पप्रारर्थी कके पकत सहि -अवभयकक रप्राकके श कके सप्रार लगभग 10 विरर्मा पसूविर्मा वकयप्रा रप्रा। वविपकश्रीगण वशकप्रायतकतप्रार्मा ककी पकतश्री कगो दहिकेज कके धलए पतप्रावड़ित करतके रके तरप्रा वदनप्रासंक 03.03.2017 कगो उसनके फप्रासंसश्री लगप्राकर आत्महित्यप्रा कर लश्री। परम ससूचनप्रा ररपगोरर्मा मम यहि भश्री कहिप्रा गयप्रा हिहै वक अवभयककगण वशकप्रायतकतप्रार्मा ककी पकतश्री कगो घर मम नहिहीं रहिनके दकेतके रके और विहि मडहिके मम रहिकर जश्रीविन गकजप्रार रहिश्री रश्री। वदनप्रासंक 02.03.2017 पप्रारर्थी तरप्रा उसकके पकत दगोननों नके पश्रीवड़ितप्रा सके कहिप्रा रप्रा वक तकम जहिर खप्राकर यप्रा फप्रासंसश्री लगप्राकर मर जप्राओ।
4. वदनप्रासंक 09.06.2015 कगो पप्रारर्थी कके पकत रप्राकके श नके पकधलस कगो यहि ससूचनप्रा दश्री रश्री वक वदनप्रासंक 06.06.2015 कगो उसककी पत्नश्री (ममृतकप्रा) वतलकरप्राज, सहिजसू तरप्रा रमन कके
सप्रार बद वनयत कहिहीं चलश्री गयश्री रश्री।
5. शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम गलके कके चप्रारनों ओर लरकनके कप्रा वनशप्रान पप्रायप्रा गयप्रा धजसमम 4 सके.मश्री. कके ररक स्रप्रान रप्रा तरप्रा इसकके अवतररक 3 अन्य चगोरम भश्री शरश्रीर पर पप्रायश्री गयश्री। ममृत्यक कप्रा कप्रारण लरकनके ककी विजहि सके दम घकरनप्रा बतप्रायप्रा गयप्रा।
6. पप्रारर्थी तरप्रा उसकके पकत नके इस न्यप्रायप्रालय कके समक ररर यप्रावचकप्रा ससंख्यप्रा 12719 सन 2017 पस्तकत ककी रश्री धजसमम वदनप्रासंक 02.08.201 कगो यहि कहितके हिहए वनस्तप्राररत हिगो गयश्री वक आरगोप-पत पस्तकत हिगोनके तक पप्रारर्थी कगो वगरफ्तप्रार नहिहीं वकयप्रा जप्रायकेगप्रा।
7. आरगोप-पत वदनप्रासंक 03.09.2017 कगो पस्तकत हिगो गयप्रा वकन्तक अभश्री तक पप्रारर्थी कगो वगरफ्तप्रार नहिहीं वकयप्रा गयप्रा हिहै।
8.
पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार पस्तकत शपर-पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी एक 65 विरर्थीय वनदर्दोर विमृद्ध व्यवक हिहै धजसकप्रा कगोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै वकन्त पकधलस उसके वगरफ्तप्रार करनके ककी चकेषप्रा कर रहिश्री हिहै।
9. उपरगोक तथ्यनों कगो दृवषगत रखतके हिहए जबवक ममृतकप्रा ककी ममृत्यक उसकके वविविप्राहि कके 10 विरर्मा कके पश्चप्रात हिहई; उसककी ममृत्यक कके लगभग 2 विरर्मा पसूविर्मा ममृतकप्रा कके पवत नके उसकगो 3 अन्य व्यवकयनों कके सप्रार चलके जप्रानके कप्रा आरगोप लगप्रातके हिहए पकधलस कगो ससूचनप्रा दश्री रश्री ; वविविकेचनप्रा विरर्मा 2017 मम हिश्री पसूणर्मा हिगो चकककी हिहै तरप्रा वविविकेचनप्रा कके ददौरप्रान पप्रारर्थी ककी वगरफ्तप्रारश्री पर इस न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा रगोक लगप्रायश्री गयश्री रश्री एविसं पप्रारर्थी एक 65 विरर्थीय विमृद्ध व्यवक हिहै, धजसकप्रा कगोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी अवग्रिम जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै।
10. तद्नकसप्रार अवग्रिम जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै।
11.
उपरगोक मककदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा मम आविकेदक ककी वगरफ्तप्रारश्री /न्यप्रायप्रालय कके समक उपसस्रवत ककी दशप्रा मम , उसके ससंबसंधधित रप्रानके कके भप्रारसप्राधिक अधधिकप्रारश्री /न्यप्रायप्रालय ककी ससंतकवष कके अनकसप्रार व्यवकगत बसंधि पत एविसं दगो पवतभसू पस्तकत करनके पर परश्रीकण कके असंवतम रूप सके वनस्तप्रारण तक, वनम्न शतर्दोसं कके अधिश्रीन अवग्रिम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राएगप्राग- क- आविकेदक, यवद आविश्यक हिगोगप्रा तगो पकधलस अधधिकप्रारश्री दप्रारप्रा जजॉच हिकेतक अपकेवकत समय
पर उपसस्रत हिगोगप्रा। ख- आविकेदक मप्रामलके कके तथ्यनों सके पररवचत वकसश्री व्यवक यप्रा पकधलस अधधिकप्राररयनों कगो पत्यक यप्रा परगोक रूप सके कगोई धिमककी , विप्रादप्रा यप्रा पलगोभन नहिहीं दकेगप्रा धजससके वक विहि ऐसके तथ्य कगो न्यप्रायप्रालय कके समक यप्रा वकसश्री पकधलस अधधिकप्रारश्री कके समक पकर न करनके पर मप्रान जप्राए। ग- आविकेदक अदप्रालत ककी पसूविर्मा अनकमवत कके वबनप्रा भप्रारत नहिहीं छगोड़िकेगप्रा; घ- आविकेदक कगो पत्यकेक वनधिप्रार्माररत वतधर पर रटप्रायल कगोरर्मा कके समक उपसस्रत हिगोनप्रा हिगोगप्रा, जब तक वक व्यवकगत उपसस्रवत सके छसू र न दश्री गयश्री हिगो; ङ- आविकेदक अवभयगोजन पक कके गविप्राहि पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा / धिमककी नहिहीं दकेगप्रा। च- आविकेदक वविविकेचनप्रा एविसं वविचप्रारण कके ददौरप्रान सहियगोग करमगके और जमप्रानत ककी स्वितसंततप्रा कप्रा दकरुपयगोग नहिहीं करकेगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 25.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench