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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 135840 (ALL)
SONPAL v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.
BAIL/3413/2025 · 2025-04-23
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 135840 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:23289 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3413 of 2025 Applicant :- Sonpal Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Ajeet Kumar Singh Counsel for Opposite Party :- G.A.,Mahi Pal Singh Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री अजश्रीत कक मप्रार धससिंह, वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री रप्राजश्रीवि कक मप्रार विमप्रार्मा एविसिं तरप्रा वशकप्रायतकतप्रार्मा कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री मवहपप्राल धससिंह कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगर्मात पस्तकत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 99 सन 2025 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 80(2), 85 बश्री०एन०एस० वि धिप्रारप्रा 3/4 दहकेज पवतषकेधि अधधिवनयम रप्रानप्रा सप्रासिंडश्री धजलप्रा हरदकोरई मम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हहै।
3. वदनप्रासिंक 21.02.2025 कको पप्रारर्थी सवहत 7 व्यवकययों कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर्मा मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहप्रा वक उसनके अपनश्री पकतश्री कप्रा वविविप्राह लगभग 3 विषर्मा पसूविर्मा पप्रारर्थी कके सप्रार वकयप्रा रप्रा। अवतररक दहकेज ककी मप्रासिंग कको लकेकर सभश्री अवभयककगण उसके पतप्रावड़ित करतके रके। वदनप्रासिंक 17.02.2025 कको वशकप्रायतकतर्थी अपनश्री पकतश्री कके ससकरप्राल गयश्री रश्री और 20,000/- रुपयके दकेकर अवभयककगण ककी खकशप्रामद भश्री ककी रश्री। वदनप्रासिंक 19.02.2025 कको दकोपहर करश्रीब 1 बजके जब वशकप्रायतकतर्थी अनकेक लकोगयों कके सप्रार अपनश्री पकतश्री ककी ससकरप्राल गयश्री तको उसकको ममृत पप्रायप्रा।
4. पसिंचप्रायतनप्रामके ककी कप्रायर्माविप्राहश्री वदनप्रासिंक 19.02.2025 कको वशकप्रायतकतर्थी कके पररविप्रारश्रीजन तरप्रा पप्रारर्थी ककी उपसस्रवत मम हहई धजसमम ममृतकप्रा ककी ममृत्यक फप्रासिंसश्री लगप्रानके कके कप्रारण हकोनप्रा बतप्रायप्रा गयप्रा हहै।
5. शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम शवि कके गलके कके चप्रारयों ओर लरकनके कके वनशप्रान पप्रायके गयके रके धजसमम 3 सके.मश्री. कप्रा ररक स्रप्रान पप्रायप्रा गयप्रा एविसिं ममृत्यक कप्रा कप्रारण लरकनके कके कप्रारण दम घकरनप्रा बतप्रायप्रा गयप्रा।
6. पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार पस्तकत शपर-पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै।
7. कक छ स्वितसिंत सप्रावकययों नके वविविकेचक कको बतप्रायप्रा वक ममृतकप्रा अपनके पवत कके सप्रार अलग रहतश्री रश्री और उसनके अपनके पवत कके घर मम हश्री फप्रासिंसश्री लगप्रायश्री। पप्रारर्थी ममृतकप्रा कके सप्रार नहहीं रहतप्रा रप्रा।
8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा-पत कप्रा वविरकोधि करतके हहए कहप्रा वक वकयप्रा गयप्रा अपरप्राधि जघन्य पकमृ वत कप्रा हहै। वविविकेचनप्रा मम आरकोपयों ककी पकवष्टि हहई हहै और आरकोप-पत वदनप्रासिंक 11.03.2025 कको पस्तकत वकयप्रा जप्रा चककप्रा हहै।
9.
उपरकोक तथ्ययों कको दृवष्टिगत रखतके हहए , जबवक शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम पश्रीवड़ितप्रा कके शरश्रीर पर ककोई चकोर नहहीं पप्रायश्री गयश्री हहै, ममृत्यक लरकनके कके कप्रारण दम घकरनके सके हकोनप्रा बतप्रायश्री गयश्री हहै; स्वितसिंत सप्रावकययों कके अनकसप्रार ममृतकप्रा अपनके पवत कके सप्रार पप्रारर्थी सके अलग रहतश्री रश्री; परम ससूचनप्रा ररपकोरर्मा मम सप्रामप्रान्य पकमृ वत कके आरकोप सभश्री कके वविरुद्ध लगप्रायके गयके हह तरप्रा पप्रारर्थी कके वविरुद्ध ककोई वविशकेष करन नहहीं वकयप्रा गयप्रा हहै ; पप्रारर्थी कप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै; वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हको चकककी हहै; पप्रारर्थी वदनप्रासिंक 22.02.2025 सके न्यप्रावयक अवभरकप्रा मम हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै।
10. तद्नकसप्रार, जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै।
11. आविकेदक सकोनपप्राल कको वनम्नधलधखत शतर्दोसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित मधजस्रटकेर /न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके गविप्राहयों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर्मा दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 23.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench