Research › Search › Judgment

Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 135804 (ALL)

MUMTAJ v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. U.P. AND 3 OTHERS

BAIL/3412/2025 · 2025-04-23

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:23288 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3412 of 2025 Applicant :- Mumtaj Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. U.P. And 3 Others Counsel for Applicant :- Kunwar Sushant Prakash Counsel for Opposite Party :- G.A.,Lalji Prasad Shukla Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री कककुं विर सकशप्राकुंत पकप्राश तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री रववि शश्रीविप्रास्तवि कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा सकुंवहितप्रा कके अकुंतगरत पस्तकत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि सकुंख्यप्रा 21 सन 2025 अन्तगरत धिप्रारप्रा 64, 351(3), 352 बश्री०एन०एस०, धिप्रारप्रा 3/4 ललवगक अपरप्राधिधों सके बप्रालकधों कप्रा सकुंरकण अधधिवनयम वि धिप्रारप्रा 3(2) V अनकससूवचित जप्रावत एविकुं अनकससूवचित जनजप्रावत (ननृशकुंसतप्रा वनविप्रारण) अधधिवनयम रप्रानप्रा रप्रामपकर कलप्राकुं धजलप्रा सश्रीतप्रापकर मम जमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हिहै। 3. वदनप्राकुंक 25.01.2025 कको समय 21:10 बजके धलखप्राई गई परम ससूचिनप्रा ररपकोरर मम वशकप्रायतकतप्रार नके कहिप्रा वक वदनप्राकुंक 23.01.2025 कको सप्रायकुं 4:30 बजके जब उसककी 15 विरर्थीय पकतश्री शशौचि हिकेतक खकेत ककी तरफ गयश्री रश्री तको विहिप्राहाँ पप्रारर्थी नके पकड़कर उसकके सप्रार दकष्कमर वकयप्रा। पश्रीवड़तप्रा नके यहि बप्रात वशकप्रायतकतप्रार कको वदनप्राकुंक 23.01.2025 कको हिश्री बतप्रायश्री रश्री। 4. वचिकत्सककीय परश्रीकण ररपकोरर मम पश्रीवड़तप्रा कके शरश्रीर पर ककोई चिकोर अरविप्रा बल पयकोग कप्रा ककोई वचिह्न नहिहीं पप्रायप्रा गयप्रा तरप्रा बलपसूविरक यशौन पविकेशन कप्रा भश्री ककोई वचिह्न नहिहीं पप्रायप्रा गयप्रा। रकेवडियकोललॉधजकल परश्रीकण मम पश्रीवड़तप्रा ककी आयक 17 विरर बतप्रायश्री गयश्री हिहै। वचिवकत्सककीय परश्रीकण मम पश्रीवड़तप्रा ककी आयक 17-18 विरर बतप्रायश्री गयश्री। 5. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार पस्तकत शपर-पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोर हिहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। 6. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके अकुंतगरत अकुंवकत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़तप्रा नके अपनश्री आयक 13 विरर हिकोनप्रा बतप्रायप्रा तरप्रा दको लड़कको दप्रारप्रा उसके खहींचिकर गनके कके खकेत मम लके जप्रानप्रा एविकुं विहिप्राहाँ पप्रारर्थी दप्रारप्रा बलप्रात्कप्रार करनके कप्रा करन वकयप्रा। 7. धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस० कके अकुंतगरत अकुंवकत अपनके बयप्रान मम भश्री पश्रीवड़तप्रा नके ऐसप्रा हिश्री करन वकयप्रा वकन्तक इसमम पश्रीवड़तप्रा नके यहि भश्री कहिप्रा वक विहि पप्रारर्थी कको पहिलके सके जप्रानतश्री रश्री और उसके पसकुंद करतश्री रश्री। पश्रीवड़तप्रा नके यहि भश्री कहिप्रा वक पप्रारर्थी नके उसकके सप्रार 2-3 बप्रार गलत कप्राम वकयप्रा और डिरप्रायप्रा भश्री। 8. एक पसूरक शपर-पत कके मप्राध्यम सके पप्रारर्थी और पश्रीवड़तप्रा कके कक छ वचितधों कको अवभलकेख पर पस्तकत वकयप्रा गयप्रा हिहै धजससके ऐसप्रा पतश्रीत हिकोतप्रा हिहै वक उनकके मध्य पगप्राढ़ सकुंबकुंधि रप्रा। 9. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा तरप्रा वशकप्रायतकतप्रार कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा-पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक पश्रीवड़तप्रा अवियस्क हिहै , उसनके अपनके बयप्रानधों मम आरकोपधों कप्रा समररन वकयप्रा हिहै और वविविकेचिनप्रा मम आरकोपधों ककी पकवष्टि हिकोनके कके पश्चिप्रात आरकोप - पत वदनप्राकुंक 26.03.2025 कको पस्तकत वकयप्रा जप्रा चिककप्रा हिहै। 10. उपरकोक तथ्यधों कको दृवष्टिगत रखतके हिहए, जबवक पश्रीवड़तप्रा नके अपनके बयप्रान मम बलपसूविरक गनके कके खकेत मम लके जप्राकर बलप्रात्कप्रार करनके कप्रा आरकोप लगयप्रा वकन्तक घरनप्रा कके 2 वदन कके अकुंदर हिहए वचिवकत्सककीय परश्रीकण मम उसकके शरश्रीर कके वकसश्री भश्री भप्राग पर चिकोर अरविप्रा बल पयकोग कप्रा ककोई वचिह्न नहिहीं वमलप्रा एविकुं बलप्रातत् यशौन पविकेशन ककी भश्री पकवष्टि नहिहीं हिहई ; पश्रीवड़तप्रा तरप्रा पप्रारर्थी कके वचितधों सके यहि पतश्रीत हिकोतप्रा हिहै वक उनमम पगप्राढ़ सकुंबकुंधि रप्रा; पप्रारर्थी एक 22 विरर्थीय नवियकविक हिहै धजसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै तरप्रा विहि वदनप्राकुंक 26.01.2025 सके न्यप्रावयक अवभरकप्रा मम हिहै ; वविविकेचिनप्रा पसूणर हिको चिकककी हिहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 11. तद्नकसप्रार, जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै। 12. आविकेदक मकमतप्राज कको वनम्नधलधखत शतर्दोकुं कके अधिश्रीन सकुंबकुंधधित मधजस्रटकेर /न्यप्रायप्रालय ककी सकुंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बकुंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़छप्राड़ नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके गविप्राहिधों पर दबप्रावि नहिहीं डिप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हिकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 23.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench