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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 135352 (ALL)

NIRANJAN v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.

BAIL/3342/2025 · 2025-05-12

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:28019 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3342 of 2025 Applicant :- Niranjan Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Dhananjai Kumar Tripathi,Devendra Verma Counsel for Opposite Party :- G.A.,Sheikh Mohammad Ali Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री दकेविकेन्द्र विरप्रार्मा तरप्रा रप्राज्य सरकप्रार कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री अजश्रीत धससिंह कको ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससिंवहतप्रा (B.N.S.S.) रम पस्तसुत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके रसुकदरप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 22 सन 2025, अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 103(1), 3(5) बश्री०एन०एस एविसिं 4/25 आयसुधि अधधिवनयर, रप्रानप्रा-रूपईडश्रीहप्रा, धजलप्रा-बहरप्राइच रम जरप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हहै। 3. वदनप्रासिंक 26.01.2025 कको पप्रारर्थी तरप्रा एक अन्य व्यवक वनरसिंजन कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परर ससूचनप्रा ररपकोरर्मा रम वशिकप्रायतकतप्रार्मा नके कहप्रा वक उसकप्रा 42 विरर्थीय पसुत रकोहम्रद अरश्रीन वदनप्रासिंक 25.01.2025 ककी शिप्रार कको अपनश्री रज़दसूरश्री कके धसलधसलके रम ईसिंर भटके पर गयप्रा रप्रा और वदनप्रासिंक 26.01.2025 कको सरय लगभग 12:30 बजके उसकप्रा शिवि गप्रार कके विलपसुर रम वभखसूरप्रार सकोनकर कके खकेत वरलप्रा। उसकको वकसश्री धिप्रारदप्रार हधरयप्रार सके गकोद कर रप्रारप्रा गयप्रा। वशिकप्रायतकतप्रार्मा नके कहप्रा वक उसकके पसुत ककी हत्यप्रा पसुरप्रानश्री रसिंधजशि कके कप्रारण गप्रागाँवि कके हश्री वनरसिंजन (पप्रारर्थी) तरप्रा रप्राजमद्र कके दप्रारप्रा ककी गई। 4. पसिंचप्रायतनप्रारप्रा रम शिवि पर पकेर वि सश्रीनके पर कसु ल 16 जगह पर नसुककीलके धिप्रारदप्रार हधरयप्रार सके तरप्रा पश्रीठ पर एक जगह घप्रावि हकोनप्रा बतप्रायप्रा गयप्रा हहै। 5. शिवि वविच्छकेदन आख्यप्रा रम बतप्रायप्रा गयप्रा हहै वक धसर ककी दप्रावहनश्री तरफ सप्रारनके ककी ओर एक 18 X 5 सके.रश्री. ककी ससूजन पप्राई गई तरप्रा धसर ककी हडश्री रसूरश्री हहई रश्री एविसिं रसस्तष्क बप्राहर आ गयप्रा रप्रा। दप्रावहनश्री भभौंह कके ऊपर फरप्रा हहआ घप्रावि धजससके रसस्तष्क बप्राहर आ रहप्रा रप्रा। दप्रावहनश्री हहोंठ कके ऊपर फरप्रा हहआ घप्रावि, सश्रीनके कके रध्य रम 9 भहोंकके हहए घप्रावि, पकेर कके वनचलके भप्राग कके वविवभन्न स्रप्रानहों पर 9 भहोंकके हहए घप्रावि तरप्रा दप्रावहनश्री जप्रागाँघ पर एक भहोंकप्रा हहआ घप्रावि पप्रायप्रा गयप्रा। रमृत्यसु कप्रा कप्रारण रमृत्यसु पसूविर्मा आई चकोरहों कके कप्रारण अपघप्रात एविसिं रकसप्रावि बतप्रायप्रा गयप्रा। 6. वशिकप्रायतकतप्रार्मा नके अपनके बयप्रान रम कहप्रा वक उसकप्रा पसुत वदनप्रासिंक 25.01.2025 ककी शिप्रार कको रकेहनत रजदसूरश्री करनके हकेतसु घर सके बतप्रा कर गयप्रा रप्रा, धजसके गप्रागाँवि सके बप्राहर वशिकप्रायतकतप्रार्मा नके अवभयसुकगण कके सप्रार दकेखप्रा रप्रा, वकन्तसु विह जप्रान नहहीं पप्राए वक अवभयसुकगण उसकके पसुत ककी हत्यप्रा कर दमगके। पसुत कप्रा शिवि वरलनके पर उसके वविश्विप्रास हको गयप्रा वक अवभयसुकगण नके उसककी हत्यप्रा ककी हहै। अपनके अवतररक बयप्रान रम वशिकप्रायतकतप्रार्मा नके कहप्रा वक उसकके सप्रार - सप्रार गप्रागाँवि कके लच्छश्रीरप्रार तरप्रा उसकके पसुत रप्राजसू उफर्मा असगर अलश्री नके भश्री उसकके पसुत कको अवभयसुकगण कके सप्रार जप्रातके हहए दकेखप्रा रप्रा तरप्रा उसके जप्रातके दकेखकर वशिकप्रायतकतप्रार्मा नके लच्छश्रीरप्रार वि अपनके पसुत रप्राजसू उफर्मा असगर अलश्री सके चचप्रार्मा भश्री वकयप्रा रप्रा वक "बबलसू कको रनप्रा वकयप्रा जप्रा जप्रातप्रा हहै, परन्तसु विह उन्हहीं लकोगहों कके सप्रार पसुरप्रानश्री दसुश्रनश्री ककी परविप्राह वकए वबनप्रा आतप्रा-जप्रातप्रा रहतप्रा हहै, वकसश्री वदन उसकके सप्रार कसु छ गड़बड़ न हको जप्राए।" ऐसप्रा हश्री बयप्रान लच्छश्रीरप्रार तरप्रा रप्राजसू उफर्मा असगर अलश्री नके वदयप्रा। 7. पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तसुत शिपर पत रम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी एक 19 विरर्थीय वनदर्दोर नवि-यसुविक हहै तरप्रा उसकप्रा ककोई पसूविर्मा आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै। 8. इस न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा सह-अवभयसुक रप्राजकेन्द्र उफर्मा जप्रानश्री कको जरप्रानत पप्रारर्मानप्रा -पत ससिंख्यप्रा 3526 सन 2025 दप्रारप्रा वदनप्रासिंक 28.04.2025 कको वनयवरत जरप्रानत पदप्रान ककी जप्रा चसुककी हहै। 9. वविदप्रान अपर शिप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा पत कप्रा वविरकोधि करतके हहए कहप्रा वक वविविकेचनप्रा रम दकोनहों अवभयसुक कके वविरुद्ध आरकोपहों ककी पसुवष्टि हहई हहै और वदनप्रासिंक 31.10.2022 कको आरकोप पत पस्तसुत वकयप्रा जप्रा चसुकप्रा हहै तरप्रा वदनप्रासिंक 26.11.2022 कको वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय नके अपरप्राधि कप्रा पससिंजप्रान लके धलयप्रा हहै। 10. उपरकोक तथ्यहों कके दृवष्टिगत, जबवक वशिकप्रायतकतप्रार्मा कप्रा पसुत वदनप्रासिंक 25.01.2025 ककी शिप्रार कको अपनके कप्रार सके गप्रार पचपकरश्री सस्रवत भटके ककी ओर चलप्रा गयप्रा ; वदनप्रासिंक 26.01.2025 कको शिवि वरलनके कके बप्राद धलखप्राई गई परर ससूचनप्रा ररपकोरर्मा रम वशिकप्रायतकतप्रार्मा नके रप्रात यह कहप्रा वक उसकके पसुत ककी हत्यप्रा पसुरप्रानश्री रसिंधजशि कके कप्रारण अवभयसुकगण नके ककी हहै, वकन्तसु गप्रागाँवि कके बप्राहर अपनके पसुत कको अवभयसुकगण कके सप्रार दकेखके जप्रानके कप्रा करन नहहीं वकयप्रा हहै; यद्यवप वशिकप्रायतकतप्रार्मा नके अपनके बयप्रान रम अपनके पसुत कको गप्रागाँवि कके बप्राहर अवभयसुकगण कके सप्रार दकेखनके कप्रा करन वकयप्रा हहै, उसनके न तको अवभयसुकगण कके सप्रार अपनके पसुत कको दकेखनके कप्रा सरय बतप्रायप्रा और न हश्री उस सरय वकसश्री अन्य व्यवक ककी उपसस्रवत कहश्री ; अपनके अवतररक करन रम वशिकप्रायतकतप्रार्मा नके अवभयसुकगण कके सप्रार अपनके पसुत कको दकेखनके कके सरय अपनके दसूसरके पसुत रप्राजसू उफर्मा असगर अलश्री तरप्रा एक अन्य व्यवक लच्छश्रीरप्रार ककी उपसस्रवत भश्री जकोड़श्री दश्री ; धजससके यह पतश्रीत हको रहप्रा हहै वक वशिकप्रायतकतप्रार्मा नके अवभयसुकगण ककी ससिंधलप्ततप्रा कके ससिंबसिंधि रम हर स्तर पर अपनप्रा बयप्रान बदलप्रा हहै; पप्रारर्थी एक 19 विरर्थीय यसुविक हहै, धजसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै; विह वदनप्रासिंक 27.01.2025 सके जकेल रम वनरुद्ध हहै तरप्रा वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हको चसुककी हहै ; सह-अवभयसुक कको वनयवरत जरप्रानत पदप्रान ककी जप्रा चसुककी हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा रत हहै वक पप्रारर्थी भश्री जरप्रानत पर ररहप्रा वकए जप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै। 11. तदनसुसप्रार, जरप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै। 12. आविकेदक वनरसिंजन कको वनम्नधलधखत शितर्दोसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित रधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत और सरप्रान रप्रावशि ककी दको जरप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरकोक रप्रारलके रम जरप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़छप्राड़ नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके सप्रावकयहों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयत ककी गई पत्यकेक वतधर पर उपसस्रत हकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 12.5.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench