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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 135253 (ALL)

SMT. CHHABILA AND ANOTHER v. STATE OF U.P. THRU. SECY. HOME LKO.

BAIL/3344/2025 · 2025-04-22

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:22860 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3344 of 2025 Applicant :- Smt. Chhabila And Another Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Rama Shanker Pandey,Dinesh Kumar Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थीगण कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री वदिनकेश कक मप्रार तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री अनकरप्राग विमप्रार्मा कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससंवहितप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तकत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थीगण नके मककदिमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 436 सनन् 2024, अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 80, 85, 115(2) बश्री०एन०एस एविसं 3/4 दिहिकेज पवतषकेधि अधधिवनयम, रप्रानप्रा-अन्तत, धजलप्रा-पतप्रापगढ़ मम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हिहै। 3. वदिनप्रासंक 25.07.2024 कको पप्रारर्थीगण, उनकके पकत भइयप्रा रप्राम विमप्रार्मा तरप्रा एक अन्य व्यवक रमकेश विमप्रार्मा कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम सतचनप्रा ररपकोरर्मा मम वशकप्रायतकतप्रार्मा नके कहिप्रा वक उसनके अपनश्री पकतश्री कप्रा वविविप्राहि पप्रारर्थीगण कके पकत कके सप्रार वदिनप्रासंक 30.06.2000 कको वकयप्रा रप्रा ; सभश्री अवभयककगण अवतररक दिहिकेज कके धलए उसके पतप्रावड़ित करतके रके और रु० 2,00,000/- और लप्रानके कको कहितके रके, धजसककी वशकप्रायत वदिनप्रासंक 21.06.2023 कको रप्रानके मम दिश्री गई रश्री , वकन्तक बप्रादि मम पकक्षों मम समझझौतप्रा हिको गयप्रा रप्रा। 4. वदिनप्रासंक 12.07.2024 कको अवभयककगण नके वशकप्रायतकतप्रार्मा ककी पकतश्री कको जहिर दिके वदियप्रा तरप्रा वदिनप्रासंक 13.07.2024 कको मकेवडिकल ककॉलकेज इलप्राहिप्राबप्रादि मम इलप्राज कके दिझौरप्रान उसककी ममृत्यक हिको गयश्री। 5. पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तकत शपर पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी ससंख्यप्रा - 1, एक 60 विषर्थीय मवहिलप्रा हिहै तरप्रा पप्रारर्थी ससंख्यप्रा-2 एक 70 विषर्थीय विमृद्ध व्यवक हिहै, धजनकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै और विहि वनदिर्दोष हिह। पप्रारर्मानप्रा पत मम यहि भश्री कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थीगण लगभग तश्रीन विषर्मा सके अपनके पकत भइयप्रा रप्राम विमप्रार्मा सके अलग रहितके हिह। गप्राम पधिप्रान तरप्रा एक अन्य व्यवक नके शपर पत दिकेकर यहि कहिप्रा हिहै वक पप्रारर्थीगण लगभग तश्रीन विषर्दोसं सके अपनके पकत सके अलग लगभग पप्रापाँच वकलकोमश्रीरर दितर अपनश्री पप्राहिश्री रहितके हिह। 6. शवि वविच्छकेदिन आख्यप्रा मम शवि पर वकसश्री भश्री पकप्रार ककी चकोर कप्रा वचन्हि नहिहीं पप्रायप्रा गयप्रा हिहै। वविसरप्रा परश्रीकण मम एल्यकवमवनयम फकॉस्फप्राइडि वविष पप्रायप्रा गयप्रा हिहै। 7. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक पतविर्मा मम भश्री पश्रीवड़ितप्रा नके दिहिकेज ककी वशकप्रायत ककी रश्री , धजसमम पकक्षों कके बश्रीच समझझौतप्रा हिको गयप्रा रप्रा। 8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम नके कके स डिप्रायरश्री कके ससंगत असंशक्षों ककी पवतयप्रासं न्यप्रायप्रालय कके समक रखश्री, धजससके यहि पतश्रीत हिकोतप्रा हिहै वक पतविर्मा मम ममृतकप्रा कके दिहिकेज उत्पश्रीड़िन कके ससंबसंधि मम एक वशकप्रायत ककी गई रश्री , धजसकके पश्चप्रात वदिनप्रासंक 21.06.2023 कको ममृतकप्रा तरप्रा उसकके पवत (पप्रारर्थीगण कके पकत) कके मध्य एक समझझौतप्रा हिहआ रप्रा, धजसमम यहि धलखप्रा हिहै वक उन दिकोनक्षों कके बश्रीच मप्रामतलश्री घरकेलत मप्रामलके कको लकेकर आपस मम मन-मकरप्रावि हिको गयप्रा रप्रा, वकन्तक आपसश्री सकलहि कके बप्रादि अब एक-दितसरके मम ककोई वशकविप्रा वशकप्रायत नहिहीं बचप्रा रप्रा। 9. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक वविविकेचनप्रा कके दिझौरप्रान गविप्राहिक्षों नके आरकोपक्षों ककी पकवष्टि ककी हिहै और वदिनप्रासंक 01.12.2025 कको आरकोप पत पस्तकत वकयप्रा जप्रा चककप्रा हिहै। 10. उपरकोक तथ्यक्षों कके दृवष्टिगत, जबवक पप्रारर्थीगण ममृतकप्रा कके सप्रास एविसं ससकर हिह एविसं परम सतचनप्रा ररपकोरर्मा मम उनकके वविरुद्ध ककोई वविवशष्टि करन नहिहीं वकए गए हिह; पतविर्मा कप्रा वविविप्रादि एविसं उसमम हिहआ समझझौतप्रा ममृतकप्रा एविसं उसकके पवत कके बश्रीच मम रप्रा तरप्रा उसमम पप्रारर्थीगण कके ससंबसंधि मम ककोई करन नहिहीं रप्रा ;पप्रारर्थीगण कप्रा यहि दिप्राविप्रा हिहै वक विहि अपनके पकत एविसं ममृतकप्रा सके अलग एक मकप्रान मम पप्रापाँच वकलकोमश्रीरर दितर रहितके हिह। पप्रारर्थीगण विमृद्ध व्यवक हिहै, धजनकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै एविसं विहि वदिनप्रासंक 13.11.2024 सके जकेल मम वनरुद्ध हिहै, जब वक वविविकेचनप्रा पतणर्मा हिको चकककी हिहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थीगण जमप्रानत पर ररहिप्रा वकए जप्रानके कके अधधिकप्रारश्री हिह। 11. तदिनकसप्रार, जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै। 12. आविकेदिकगण छबश्रीलप्रा एविसं पसंचतरप्राम कको वनम्नधलधखत शतर्दोसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दिको जमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदिकगण अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहिहीं करमगके; (ii) आविकेदिकगण अवभयकोजन पक कके सप्रावकयक्षों पर दिबप्रावि नहिहीं डिप्रालमगके; (iii) आविकेदिकगण वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयत ककी गई पत्यकेक वतधर पर उपसस्रत हिक्षोंगके। Order Date :- 22.4.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench