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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 135252 (ALL)

DEEPAK @ VINAY KUMAR v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.

BAIL/3322/2025 · 2025-04-23

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:23030 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3322 of 2025 Applicant :- Deepak @ Vinay Kumar Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Wasim Ahmad Counsel for Opposite Party :- G.A.,Nisha Srivastava,Shivanand Rawat Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री विसश्रीम अहमद , वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री अननुरप्राग विमप्रार्मा एविवं वशकप्रायतकतप्रार्मा कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्रीमतश्री वनशप्रा शश्रीविप्रास्तवि कको सनुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सनुरकप्रा सवंवहतप्रा कके अवंतगर्मात पस्तनुत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मनुकदमप्रा अपरप्राधि सवंख्यप्रा 344 सन 2024 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 80(2), 85 बश्री०एन०एस० वि धिप्रारप्रा 3/4 दहकेज पवतषकेधि अधधिवनयम रप्रानप्रा सदरपनुर धजलप्रा सश्रीतप्रापनुर मम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हहै। 3. वदनप्रावंक 28.10.2024 कको पप्रारर्थी, उसकके मप्रातप्रा-वपतप्रा एविवं भप्राई कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर्मा मम यह कहप्रा गयप्रा हहै वक वशकप्रायकतप्रार्मा नके अपनश्री पनुतश्री कप्रा वविविप्राह पप्रारर्थी कके सप्रार लगभग 1 विषर्मा पसूविर्मा वकयप्रा रप्रा ; सभश्री अवभयनुकगण उसके दहकेज कके धलए पतप्रावड़ित करतके रके। वदनप्रावंक 27.10.2024 कको रप्रात 9 बजके वशकप्रायतकतप्रार्मा कको ससूचनप्रा वमलश्री वक अवभयनुकगण दप्रारप्रा उसककी पनुतश्री कको मप्रारप्रा -पश्रीरप्रा जप्रा रहप्रा रप्रा और जब विह लगभग 10 बजके अपनश्री पनुतश्री कको दकेखनके आयके तको उसककी पनुतश्री ममृत अविस्रप्रा मम वमलश्री। 4. पवंचप्रायतनप्रामके ककी कप्रायर्माविप्राहश्री पप्रारर्थी ककी उपसस्रवत मम सवंपप्रावदत ककी गयश्री रश्री तरप्रा पवंचचों नके ममृत्यनु कप्रा कप्रारण बतप्रानके मम असमरर्मातप्रा व्यक ककी। 5. शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम शवि पर वकसश्री भश्री चकोर कप्रा ककोई वचह्न नहहीं पप्रायप्रा गयप्रा। ममृत्यनु कप्रा कप्रारण आत्मघप्रात बतप्रायप्रा गयप्रा। वविसरप्रा परश्रीकण मम भश्री ककोई असप्रामप्रान्य तथ्य पकप्राश मम नहहीं आयप्रा। 6. पप्रारर्थी कके वपतप्रा पमकोद कनु मप्रार कको न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत सवंख्यप्रा 3 सन 2025 दप्रारप्रा पप्राररत आदकेश वदनप्रावंक 07.01.2025 दप्रारप्रा अवग्रिम जमप्रानत वमल चनुककी हहै। पप्रारर्थी ककी मप्रातप्रा तरप्रा भप्राई कको वनयवमत जमप्रानत वमल चनुककी हहै। 7. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम नके वपछलश्री वतधर पर 2 अन्य पकरणचों मम पप्रारर्थी ककी सवंधलप्ततप्रा दशप्रार्मायश्री गयश्री रश्री। एक पसूरक शपर -पत कके मप्राध्यम सके यह कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी उक पकरणचों मम सवंधलप्त नहहीं हहै। वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम तरप्रा वशकप्रायतकतप्रार्मा ककी वविदप्रान अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा -पत कप्रा वविरकोधि करतके हहए कहप्रा वक वविविकेचनप्रा मम आरकोपचों ककी पनुवष्टि हहई और आरकोप -पत वदनप्रावंक 23.01.2025 कको पस्तनुत वकयप्रा जप्रा चनुकप्रा हहै। 8. उपरकोक तथ्यचों कको दृवष्टिगत रखतके हहए , जबवक परम ससूचनप्रा ररपकोरर्मा मम अवभयनुकगण दप्रारप्रा पश्रीवड़ितप्रा कको मप्रारप्रा-पश्रीरप्रा जप्रानप्रा कहप्रा गयप्रा हहै वकन्तनु शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम शरश्रीर पर ककोई चकोर नहहीं पप्रायश्री गयश्री तरप्रा स्वितवंत गविप्राहचों कके बयप्रान मम भश्री ऐसप्रा ककोई करन नहहीं हहै; सभश्री अवभयनुकगण कके वविरुद्ध समप्रान पकमृ वत कके आरकोप लगप्रायके गयके हह तरप्रा एक सह - अवभयनुक कको अवग्रिम जमप्रानत एविवं दको सह-अवभयनुकचों कको वनयवमत जमप्रानत वमल चनुककी हहै, वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हको चनुककी हहै ; पप्रारर्थी कप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै। 9. तद्ननुसप्रार, जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै। 10. आविकेदक कको वनम्नधलधखत शतरवं कके अधिश्रीन सवंबवंधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी सवंतनुवष्टि कके अननुसप्रार एक व्यवकगत बवंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतम पस्तनुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके गविप्राहचों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर्मा दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 23.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench