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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 135202 (ALL)

BAHORI v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.

BAIL/3318/2025 · 2025-04-21

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:22461 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3318 of 2025 Applicant :- Bahori Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Vivek Chandra Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री वविविकेक चन्दप्रा तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री सत्यकेन्द शश्रीविप्रास्तवि कको ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगरत पस्तसुत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 0446 सन 2024 अन्तगरत धिप्रारप्रा 70(1), 352, 351(2), 127(2), 137(2) बश्री०एन०एस० रप्रानप्रा ककोतविप्रालश्री नगर धजिलप्रा सश्रीतप्रापसुर मम जिमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हिहै। 3. वदनप्रासंक 16.12.2024 कको पप्रारर्थी सवहित 4 व्यवकययों कके वविरुद्ध धिप्रारप्रा 173(4) भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगरत वदयके गयके पप्राररनप्रा-पत कके आधिप्रार पर धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहिप्रा वक उसकप्रा वविविप्राहि विरर 2011 मम पप्रारर्थी बहिकोरश्री कके सप्रार हिहआ रप्रा। आपसश्री मनमसुरप्रावि कके कप्रारण दकोनयों पक 8 विरर सके अलग रहि रहिके हिह तरप्रा वशकप्रायतकतर्थी नके अपनके पवत कके वविरुद्ध एक मसुकदमप्रा भश्री कर रखप्रा हिहै। वशकप्रायतकतर्थी कप्रा पवत मसुकदमप्रा विप्रापसश्री कके धलए दबप्रावि बनप्रातप्रा रहिप्रा हिहै। वदनप्रासंक 12.08.2024 कको जिब वशकप्रायतकतर्थी मसुकदमके ककी पकेशश्री लकेकर जिप्रा रहिश्री रश्री तको सभश्री अवभयसुकगण नके उसकको घकेरकर डरप्रायप्रा धिमकप्रायप्रा तरप्रा ससुनसप्रान जिसंगल मम लके जिप्राकर सभश्री अवभयसुकगण नके उसकके सप्रार बलप्रात्कप्रार वकयप्रा। 4. वविविकेचनप्रा कके ददौरप्रान असंवकत अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतर्थी नके परम ससूचनप्रा ररपकोरर कके करनयों कप्रा समररन वकयप्रा वकन्तसु वविविकेचक दप्रारप्रा पसूछके गयके पश्नयों कके उत्तर मम उसनके कहिप्रा वक उसककी आयसु 30 विरर हिहै, उसकके वविरुद्ध उसकके पवत बहिकोरश्री नके ककोई मसुकदमप्रा नहिह धलखविप्रायप्रा हिहै, अपहिरण वकयके जिप्रानके पर उसनके वचलप्रानके ककी ककोई ककोवशश नहिह ककी और न तको 112 नसंबर पर फकोन वकयप्रा और न हिश्री हिकेल्प डकेस्क पर पप्राररनप्रा-पत वदयप्रा। 5. वचकत्सककीय परश्रीकण ररपकोरर मम वशकप्रायतकतर्थी कके शरश्रीर पर ककोई चकोर अरविप्रा बल पयकोग कप्रा ककोई वचह्न नहिह पप्रायप्रा गयप्रा। 6. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार पस्तसुत शपर-पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोर हिहै तरप्रा उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिह हिहै। 7. इस न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा एक अन्य सहि-अवभयसुक पविन कसु मप्रार गकोवडयप्रा कको जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत ससंख्यप्रा 2774 सन 2025 दप्रारप्रा वदनप्रासंक 05.04.2025 कको जिमप्रानत पदप्रान ककी जिप्रा चसुककी हिहै। 8. उपरकोक तथ्ययों कको दृवष्टिगत रखतके हिहए , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी भश्री जिमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 9. तद्नसुसप्रार, जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हिहै। 10. आविकेदक बहिकोरश्री कको वनम्नधलधखत शतर्दोसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजिस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जिमप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़छप्राड़ नहिह करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजिन पक कके गविप्राहियों पर दबप्रावि नहिह डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हिकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 21.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench