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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 135120 (ALL)
SUNNY @ RANJEET SINGH v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.
BAIL/3300/2025 · 2025-04-23
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 135120 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:22996 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3300 of 2025 Applicant :- Sunny @ Ranjeet Singh Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Dr. Ajai Pratap Singh Chauhan,Kunwar Samitinjay Singh,Nirbhai Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा डडॉ अजय पतप्राप धससिंह चचौहप्रान तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री सत्यकेन्द्र शश्रीविप्रास्तवि कको ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगरत पस्तसुत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 90 सन 2025 अन्तगरत धिप्रारप्रा 64(1), 123, 351(2) बश्री०एन०एस० रप्रानप्रा मसिंवडयप्रासिंवि धजलप्रा लखनऊ मम जमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै।
3. वदनप्रासिंक 05.02.2025 कको धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहप्रा वक उसककी पप्रारर्थी कके सप्रार अच्छश्री दकोस्तश्री रश्री तरप्रा उसनके पप्रारर्थी सके नचौकरश्री लगविप्रानके कको कहप्रा रप्रा। पप्रारर्थी नके लगभग 3 महश्रीनके पहलके उसके लखनऊ सस्रत अपनके घर पर बसुलप्रायप्रा और चप्राय पश्रीनके कको वदयप्रा। चप्राय पश्रीतके हश्री वशकप्रायतकतर्थी बकेहकोश हको गयश्री और पप्रारर्थी नके उसकके सप्रार बलप्रात्कप्रार वकयप्रा तरप्रा आपधत्तिजनक फकोरको एविसिं विश्रीवडयको बनप्रा धलयके। उक फकोरटों और विश्रीवडयको कके आधिप्रार पर पप्रारर्थी वशकप्रायतकतर्थी कको ब्लहैकमकेल करतके हहए अपनके घर बसुलप्रा धलयप्रा एविसिं उसकके सप्रार बलप्रात्कप्रार वकयप्रा।
4. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके असिंतगरत वदयके गयके अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके अपनके पसूविर करन कप्रा समररन वकयप्रा।
5. वचवकत्सककीय परश्रीकण ररपकोरर मम ऐसप्रा ककोई तथ्य पकप्राश मम नहहीं आयप्रा धजससके बलप्रात्कप्रार कके आरकोपटों ककी पसुवष्टि हको।
6. धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस० कके असिंतगरत वदयके गयके अपनके बयप्रान मम भश्री पश्रीवड़ितप्रा नके अपनके पसूविर करन कप्रा समररन वकयप्रा।
7. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार पस्तसुत शपर-पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै।
8. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार वशकप्रायतकतर्थी तरप्रा पप्रारर्थी कके कसु छ वचत लगके हह धजससके यह पतश्रीत हकोतप्रा हहै वक उन दकोनटों मम पगप्राण ससिंबसिंधि रप्रा वकन्तसु पप्रारर्थी कप्रा वविविप्राह अन्यत तय हको जप्रानके कके उपरप्रान्त परम ससूचनप्रा ररपकोरर दजर करप्रायश्री गयश्री।
9.
वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके वपछलश्री वतधर पर एक अन्य पकरण मम पप्रारर्थी ककी ससिंधलप्ततप्रा कप्रा करन वकयप्रा रप्रा। एक पसूरक शपर-पत कके मप्राध्यम सके उपरकोक पकरण ककी परम ससूचनप्रा ररपकोरर अवभलकेख पर पस्तसुत ककी गयश्री हहै धजसमम पप्रारर्थी नप्रावमत नहहीं हहै वकन्तसु उसकके वपतप्रा एविसिं भप्राई आरकोपश्री हह। वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा -पत कप्रा वविरकोधि करतके हहए कहप्रा वक वविविकेचनप्रा मम आरकोपटों ककी पसुवष्टि हहई हहै और आरकोप -पत पस्तसुत वकयप्रा जप्रा चसुकप्रा हहै।
10. उपरकोक तथ्यटों कको दृवष्टिगत रखतके हहए , जबवक पश्रीवड़ितप्रा नके स्वियसिं हश्री परम ससूचनप्रा ररपकोरर दजर करप्रायश्री हहै और आपधत्तिजनक फकोरटों एविसिं विश्रीवडयको बनप्राकर पप्रारर्थी दप्रारप्रा उसके ब्लहैकमकेल वकयके जप्रानके कप्रा करन वकयप्रा गयप्रा हहै, जको तथ्य वविविकेचनप्रा कके दचौरप्रान वकसश्री सप्रामगश्री सके समधररत नहहीं वकयप्रा गयप्रा हहै; बलप्रात्कप्रार कके आरकोपटों ककी पसुवष्टि कके धलए ककोई अन्य सप्रामगश्री नहहीं वमलश्री हहै; पप्रारर्थी एक 24 विषर्थीय नवियसुविक हहै धजसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै; पप्रारर्थी वदनप्रासिंक 08.02.2025 सके कप्रारप्रागप्रार मम वनरुद्ध हहै ; वविविकेचनप्रा पसूणर हको चसुककी हहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै।
11. तद्नसुसप्रार, जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै।
12. आविकेदक सनश्री उफर रसिंजश्रीत धससिंह कको वनम्नधलधखत शतर्दोसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके गविप्राहटों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 23.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench