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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 134930 (ALL)

RAM VINAY v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND 3 OTHERS

BAIL/3315/2025 · 2025-04-23

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:23007 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3315 of 2025 Applicant :- Ram Vinay Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And 3 Others Counsel for Applicant :- Ramakar Shukla Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री रमप्राकर शशुक्लप्रा तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री सत्यकेन्द्र शश्रीविप्रास्तवि कको सशुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सशुरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगरत पस्तशुत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मशुकदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 23 सन 2025 अन्तगरत धिप्रारप्रा 137(2), 87, 64, 351(3), 352, 142 बश्री०एन०एस० वि धिप्रारप्रा 3/4 ललवगक अपरप्राधिधों सके बप्रालकधों कप्रा ससंरकण अधधिवनयम रप्रानप्रा ककोतविप्रालश्री दकेहिप्रात धजिलप्रा सशुल्तप्रानपशुर मम जिमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हिहै। 3. वदनप्रासंक 21.01.2025 कको पप्रारर्थी तरप्रा उसककी भप्राभश्री कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहिप्रा वक पप्रारर्थी उसकके घर लगभग 1 विरर पसूविर सके आतप्रा-जिप्रातप्रा रप्रा एविसं उसककी नप्राबप्राधलग पशुतश्री सके ययौन ससंबसंधि बनप्रातप्रा रप्रा। वदनप्रासंक 16.01.2025 कको पप्रारर्थी कके बहिकप्राविके मम आकर उसककी पशुतश्री घर सके चलश्री गयश्री रश्री एविसं वदनप्रासंक 17.01.2025 कको विहि विप्रापस भश्री आ गयश्री रश्री। इसकके बप्राद पप्रारर्थी नके फकोन करकके वशकप्रायतकतर्थी कको गप्राधलयप्रासं दश्री एविसं धिमककी दश्री तरप्रा कहिप्रा वक उसनके वशकप्रायतकतर्थी ककी पशुतश्री सके शप्रादश्री कर लश्री हिहै। वशकप्रायतकतर्थी नके यहि भश्री कहिप्रा वक पप्रारर्थी उसकके दसूर कप्रा ररश्तकेदप्रार हिहै। 4. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके असंतगरत असंवकत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके अपनश्री आयशु 16 विरर हिकोनप्रा बतप्रायप्रा तरप्रा पप्रारर्थी सके लगभग 1 विरर सके बप्रात करनप्रा एविसं 3-4 महिश्रीनके पहिलके शप्रादश्री करनके कप्रा करन वकयप्रा तरप्रा यहि कहिप्रा वक विहि अपनके पवत कके सप्रार हिश्री रहिनप्रा चप्राहितश्री हिहै। 5. वचकत्सककीय परश्रीकण ररपकोरर ककोई वविशकेर तथ्य पकप्राश मम नहिहीं आयप्रा हिहै। दन्त वचवकत्सक ककी आख्यप्रा कके अनशुसप्रार पश्रीवड़ितप्रा ककी आयशु 18 विरर सके कम हिहै। 6. धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस० कके असंतगरत असंवकत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके अपनके पसूविर करन कप्रा हिश्री समररन वकयप्रा एविसं उसनके यहि कहिप्रा वक उसककी मप्रामाँ नके कहिप्रा हिहै वक अभश्री उसके अपनश्री मप्रामाँ कके सप्रार रहिनप्रा चप्रावहिए एविसं 4 विरर बप्राद विहि अपनके पवत कके सप्रार जिप्रा सकतश्री हिहै। 7. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार पस्तशुत शपर-पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोर हिहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। 8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा -पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक आरकोप-पत वदनप्रासंक 02.03.2025 कको पस्तशुत हिको चशुकप्रा हिहै तरप्रा वविविकेचनप्रा मम आरकोपधों ककी पशुवष्टि हिहई हिहै। 9. पसूविर वतधर पर वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके एक अन्य पकरण मम पप्रारर्थी कको ससंधलप्त हिकोनप्रा बतप्रायप्रा रप्रा वकन्तशु एक पसूरक शपर -पत कके मप्राध्यम सके यहि कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी उस पकरण मम समममधलत नहिहीं हिहै तरप्रा अवतररक अनशुदकेशधों कके आधिप्रार पर वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके इस तथ्य कको स्विश्रीकप्रार वकयप्रा। 10. उपरकोक तथ्यधों कको दृवष्टिगत रखतके हिहए , जिबवक यद्यवप पश्रीवड़ितप्रा अवियस्क हिहै वकन्तशु उसनके पप्रारर्थी कके वविरुद्ध वकसश्री भश्री पकप्रार कप्रा ककोई आरकोप नहिहीं लगप्रायप्रा , वविविकेचनप्रा पसूणर हिको चशुककी हिहै; पप्रारर्थी कप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै; पप्रारर्थी वदनप्रासंक 23.01.2025 सके कप्रारप्रागप्रार मम वनरुद्ध हिहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जिमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 11. तद्नशुसप्रार, जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हिहै। 12. आविकेदक रप्राम वविनय कको वनमनधलधखत शतर्दोसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजिस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतशुवष्टि कके अनशुसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जिमप्रानतम पस्तशुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजिन पक कके गविप्राहिधों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपमस्रत हिकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 23.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench