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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 134794 (ALL)

VIVEK @ VIVEK YADAV v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO. AND 3 OTHERS

BAIL/3271/2025 · 2025-04-21

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:22283 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3271 of 2025 Applicant :- Vivek @ Vivek Yadav Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. And 3 Others Counsel for Applicant :- Shitla Prasad Tripathi,Shivani Soni Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्रीमतश्री वशिविप्रानश्री ससोनश्री तरप्रा वविदप्रान अपर शिप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री रप्राजश्रीवि कक मप्रार विमप्रार्मा कसो सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशिश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगर्मात पस्तकत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 351 सन 2024 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 137(2), 87, 64 बश्री०एन०एस० एविसं धिप्रारप्रा 5/6 ललवगक अपरप्राधिधों सके बप्रालकधों कप्रा ससंरकण अधधिवनयम रप्रानप्रा महिरप्राजगसंज धजलप्रा रप्रायबरकेलश्री मम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हिहै। 3. वदनप्रासंक 27.07.2024 कसो धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपसोरर्मा मम वशिकप्रायतकतप्रार्मा नके कहिप्रा वक उसककी पकतश्री वदनप्रासंक 12.07.2024 कसो घर सके चलश्री गयश्री रश्री तरप्रा उसकके बप्राद उसकप्रा कसोई पतप्रा नहिहीं चलप्रा। 4. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके असंतगर्मात असंवकत करप्रायके गयके अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके अपनश्री आयक 17 विरर्मा हिसोनप्रा बतप्रायप्रा हिहै तरप्रा उसनके कहिप्रा वक विहि पप्रारर्थी सके प्यप्रार करतश्री हिहै। विहि वदनप्रासंक 12.07.2024 कसो घर सके वबनप्रा बतप्रायके लखनऊ गई रश्री, विहिप्राहाँ सके पप्रारर्थी उसके वभविप्राड़िश्री लके गयप्रा जहिप्राहाँ उन दसोनधों नके शिप्रादश्री कर लश्री एविसं पवत -पत्नश्री ककी तरहि रहिनके लगके। 5. पश्रीवड़ितप्रा ककी मप्राहाँ नके पश्रीवड़ितप्रा कप्रा बप्राह्य एविसं आसंतररक वचवकत्सककीय परश्रीकण करप्रानके सके इसंकप्रार कर वदयप्रा। आयक वनधिप्रार्मारण हिकेतक पश्रीवड़ितप्रा कप्रा रकेवडियसोललॉधजकल परश्रीकण भश्री नहिहीं हिहआ। 6. धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस० कके असंतगर्मात असंवकत करप्रायके गयके अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके अपनके पसूविर्मा करन कप्रा हिश्री समरर्मान वकयप्रा। 7. पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार पस्तकत शिपर-पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी एक 24 विरर्थीय वनदर्दोर नवियकविक हिहै और उसकप्रा कसोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। 8. वविदप्रान अपर शिप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा-पत कप्रा वविरसोधि करतके हिहए कहिप्रा वक पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आरसोप -पत वदनप्रासंक 24.08.2024 पस्तकत वकयप्रा जप्रा चककप्रा हिहै , पश्रीवड़ितप्रा अवियस्क हिहै। पस्तकत पप्रारर्मानप्रा-पत ककी नसोवरस वशिकप्रायतकतप्रार्मा कसो दश्री जप्रा चकककी हिहै। पप्रारर्थी जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयके जप्रानके यसोग्य नहिहीं हिहै। 9. उपरसोक तथ्यधों कसो दृवष्टिगत रखतके हिहए , जबवक पश्रीवड़ितप्रा नके अपनके बयप्रानधों मम लगप्रातप्रार पप्रारर्थी कके वविरुद्ध वकसश्री भश्री अपकक त्य कप्रा कसोई करन नहिहीं वकयप्रा हिहै एविसं वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हिसो चकककी हिहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयके जप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 10. तद्नकसप्रार, जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै। 11. आविकेदक वविविकेक उरर्मा वविविकेक यप्रादवि कसो वनम्नधलधखत शितर्दोसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत और समप्रान रप्रावशि ककी दसो जमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरसोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयसोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयसोजन पक कके गविप्राहिधों पर दबप्रावि नहिहीं डिप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल कसोरर्मा दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हिसोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 21.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench