Research › Search › Judgment
Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 134648 (ALL)
ISLAMUDDIN v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO AND ANOTHER
BAIL/3244/2025 · 2025-04-18
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 134648 (ALL) · dailylaw.ai ]
[ 2025 DAILYLAW 134648 (ALL) · dailylaw.ai ]
Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:21875 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3244 of 2025 Applicant :- Islamuddin Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko And Another Counsel for Applicant :- Vaibhav Sharma,Aakash Rai,Anand Kumar Sharma Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री विवैभवि शरप्रार्मा तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री अननंत पतप्राप धसनंह कको ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा सनंवहतप्रा कके अनंतगर्मात पस्तसुत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके रसुकदरप्रा अपरप्राधि सनंख्यप्रा 197 सन 2024 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 69, 61(2), 316(2), 351(2) बश्री०एन०एस० रप्रानप्रा रहश्रीरप्राबप्राद धजिलप्रा लखनऊ रम जिरप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हवै।
3. वदनप्रानंक 06.10.2024 कको पप्रारर्थी तरप्रा उसककी बहन कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परर ससूचनप्रा ररपकोरर्मा रम वशकप्रायतकतर्थी नके कहप्रा वक उसककी आयसु 22 विरर्मा हवै। वशकप्रायतकतर्थी ककी बहन पप्रारर्थी कके भप्राई कको ब्यप्राहश्री हवै धजिस कप्रारण दकोननों पकनों रम पहलके सके रकेलजिकोल रप्रा। अवभयसुकगण नके वशकप्रायतकतर्थी कके घर आकर वशकप्रायतकतर्थी सके पप्रारर्थी कके वविविप्राह कप्रा पस्तप्रावि रखप्रा तरप्रा इस पस्तप्रावि कके कप्रारण हश्री वशकप्रायतकतर्थी वि पप्रारर्थी कके अनंतरनंग सनंबनंधि हको गयके और पप्रारर्थी वशकप्रायतकतर्थी कके सप्रार लगभग 2 विररनं सके सनंभकोग करतप्रा चलप्रा आ रहप्रा हवै। इस बश्रीच पप्रारर्थी नके रकोजिगप्रार करनके कके धलए वशकप्रायतकतर्थी सके 10 लप्राख रुपयके वविवभन तप्रारश्रीखनों पर लके धलयप्रा। इसकके बप्राद उसनके रुपयके विप्रापस दकेनके तरप्रा वविविप्राह करनके सके इनंकप्रार कर वदयप्रा।
4. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके अनंतगर्मात वदयके गयके अपनके बयप्रान रम वशकप्रायतकतर्थी नके कहप्रा वक प्लप्रार लकेनके कके नप्रार पर पप्रारर्थी नके लगभग 10 लप्राख कके गहनके वशकप्रायतकतर्थी ककी रप्रामाँ एविनं बहन कके लके धलए हह।
5. वचकत्सककीय परश्रीकण ररपकोरर्मा रम ककोई वविशकेर तथ्य पकप्राश रम नहहीं आयके हह।
6. धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस० कके अनंतगर्मात वदयके गयके अपनके बयप्रान रम वशकप्रायतकतर्थी अपनके पसूविर्मा वकयके गयके करन कको हश्री दकोहरप्रायप्रा।
7. पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार पस्तसुत शपर-पत रम कहप्रा गयप्रा हवै वक पप्रारर्थी एक 25 विरर्थीय
वनदरर नवियसुविक हवै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हवै।
8.
पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके तकर्मा वदयप्रा वक वविविकेचनप्रा कके ददौरप्रान वविविकेचक नके कके स डप्रायरश्री रम यह अनंवकत वकयप्रा वक पप्राधरर्मानश्री कप्रा करन हवै वक उसनके 29,500/- रुपयके नगद पप्रारर्थी कको वदयके हह। पप्रारर्थी नके 30,000/- रुपयके ऑनलप्राइन रप्राध्यर सके वशकप्रायतकतर्थी कको अनंतररत वकयके हह, धजिसकके सप्राक्ष्य पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार सनंलग्न हह। पप्रारर्थी नके वशकप्रायतकतर्थी तरप्रा उसकके पररविप्रारश्रीजिन कके वविरुद्ध धिप्रारप्रा 210 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा सनंवहतप्रा कके अनंतगर्मात एक पररविप्राद वदनप्रानंक 07.10.2024 कको पस्तसुत वकयप्रा हवै।
9. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा -पत कप्रा वविरकोधि करतके हहए कहप्रा वक वविविकेचनप्रा रम आरकोपनों ककी पसुवष्टि हहई हवै और आरकोप-पत पस्तसुत हको चसुकप्रा हवै।
10. उपरकोक तथ्यनों कको दृवष्टिगत रखतके हहए,जिबवक वशकप्रायतकतर्थी नके अपनश्री आयसु 22 विरर्मा हकोनप्रा कहप्रा हवै ; पकनों कके रध्य पहलके सके ररश्तकेदप्रारश्री हवै तरप्रा वियस्कविय कके हकोतके हहए वशकप्रायतकतर्थी नके वबनप्रा वविविप्राह कके दको विररनं कके अनंतरप्राल रम लगप्रातप्रार कई बप्रार पप्रारर्थी सके शप्रारश्रीररक सनंबनंधि बनप्रायके हह; पकनों कके रध्य रुपयके कके लकेनदकेन कप्रा वविविप्राद भश्री पतश्रीत हकोतप्रा हवै; वशकप्रायतकतर्थी दप्रारप्रा बल पयकोग वकयके जिप्रानके कप्रा ककोई आरकोप नहहीं लगप्रायप्रा गयप्रा हवै; वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हको चसुककी हवै ; पप्रारर्थी कप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हवै ; पप्रारर्थी वदनप्रानंक 08.03.2025 सके कप्रारप्रागप्रार रम वनरुद्ध हवै, न्यप्रायप्रालय कप्रा रत हवै वक पप्रारर्थी जिरप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हवै।
11. तद्नसुसप्रार, जिरप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हवै।
12. आविकेदक इस्लप्रारसुदश्रीन कको वनम्नधलधखत शतरनं कके अधिश्रीन सनंबनंधधित रधजिस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी सनंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बनंधिपत और सरप्रान रप्रावश ककी दको जिरप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरकोक रप्रारलके रम जिरप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़छप्राड़ नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजिन पक कके गविप्राहनों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर्मा दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 18.4.2025/Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench