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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 134544 (ALL)
ASHISH YADAV v. STATE OF U.P. THRU. ADDL. CHIEF SECY. HOME LKO. AND 4 OTHERS
BAIL/3248/2025 · 2025-04-18
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 134544 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:22088 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3248 of 2025 Applicant :- Ashish Yadav Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Addl. Chief Secy. Home Lko. And 4 Others Counsel for Applicant :- Sushil Kumar Singh,Pradeep Kumar Singh Counsel for Opposite Party :- G.A.,Rahul Agnihotri Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री ससुशश्रील कसु मप्रार धससिंह, वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री रप्राजश्रीवि कसु मप्रार विमप्रार्मा तरप्रा वशकप्रायतकतप्रार्मा कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री रप्राहहल अवग्निहहोतश्री कहो ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री रप्राहहल अवग्निहहोतश्री दप्रारप्रा विकप्रालतनप्रामप्रा पस्तसुत वकयप्रा गयप्रा, धजसके अवभिलकेख पर धलयप्रा जप्राय।
2. धिप्रारप्रा 483 भिप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगर्मात पस्तसुत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 34 सन 2025 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 77, 64, 352, 351(2) बश्री०एन०एस० , धिप्रारप्रा 3/4 ललवगक अपरप्राधिधों सके बप्रालकधों कप्रा ससिंरकण अधधिवनयम वि धिप्रारप्रा 67, 67-
A ससूचनप्रा पप्रौधिप्रौवगककी अधधिवनयम रप्रानप्रा वतकहोवनयप्राँँ धजलप्रा लखश्रीमपसुर खश्रीरश्री मम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हहै।
3. वदनप्रासिंक 24.02.2025 कहो पप्रारर्थी तरप्रा उसकके भिप्राई कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपहोरर्मा मम वशकप्रायतकतप्रार्मा नके कहप्रा हहै वक उसककी पसुतश्री कप्रा नहप्रातके समय पप्रारर्थी नके आपधत्तिजनक विश्रीवडियहो बनप्रा धलयप्रा तरप्रा उस विश्रीवडियहो कहो विप्रायरल करनके ककी धिमककी दकेकर उसकप्रा शप्रारश्रीररक शहोषण वकयप्रा। इस बश्रीच पप्रारर्थी नके अपनके वपतप्रा कके सहयहोग सके वशकप्रायतकतप्रार्मा ककी पसुतश्री कप्रा अश्लश्रील फहोरहो खखींच धलयप्रा तरप्रा उसश्री ककी आड़ मम उसके ब्लहैकमकेल करकके शप्रारश्रीररक शहोषण वकयप्रा। जब वशकप्रायतकतप्रार्मा नके अपनश्री पसुतश्री ककी शप्रादश्री वकसश्री अन्य व्यवक सके तय ककी तहो पप्रारर्थी नके अश्लश्रील फहोरहो विहप्राँ भिकेजकर ररश्तप्रा तहोड़विप्रा वदयप्रा।
4. पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार पस्तसुत शपर-पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हहै और उसकप्रा कहोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहखीं हहै।
5. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके तकर्मा वदयप्रा वक कधरत पश्रीवड़तप्रा एविसिं पप्रारर्थी कके मध्य पकेम ससिंबसिंधि रके। पश्रीवड़तप्रा नके पप्रारर्थी कहो स्वियसिं एक पत धलखप्रा धजसककी पवत पप्रारर्मानप्रा -पत कके सप्रार
ससिंलग्नि हहै धजसमम पश्रीवड़तप्रा नके यह कहप्रा वक अगर उसककी शप्रादश्री पप्रारर्थी सके नहखीं हहई तहो विह अपनश्री जप्रान दके दकेगश्री। पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार पप्रारर्थी और कधरत पश्रीवड़तप्रा कप्रा एक वचत भिश्री ससिंलग्नि हहै धजससके यह पतश्रीत हहोतप्रा हहै वक दहोनधों कके मध्य घवनष्ट ससिंबसिंधि रके।
6.
वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा -पत कप्रा वविरहोधि करतके हहए कहप्रा वक वविविकेचनप्रा अभिश्री पचधलत हहै तरप्रा उन्हधोंनके कके स डिप्रायरश्री कके ससिंगत असिंशधों ककी पवतयप्रासिं न्यप्रायप्रालय कके समक पस्तसुत ककी धजसकके अनसुसप्रार पश्रीवड़तप्रा ककी जन्मवतधर 27.11.2006 हहै। वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके कहप्रा वक एक व्यवक दश्रीपक कसु मप्रार कके फहोन सके पश्रीवड़तप्रा कप्रा फहोरहो भिकेजप्रा जप्रानप्रा समप्रानके आयप्रा हहै।
7. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके तकर्मा पस्तसुत वकयप्रा वक पप्रारर्थी नके कभिश्री भिश्री कहोई अश्लश्रील फहोरहो नहखीं खखींचश्री तरप्रा पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार ससिंलग्निक ससिंख्यप्रा 3 भिश्री पप्रारर्थी एविसिं पश्रीवड़तप्रा ककी फहोरहो हहै।
8. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके असिंतगर्मात असिंवकत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़तप्रा नके परम ससूचनप्रा ररपहोरर्मा कके करनधों कप्रा समरर्मान वकयप्रा।
9. धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस० कके असिंतगर्मात असिंवकत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़तप्रा नके अपनश्री आयसु 18 विषर्मा हहोनप्रा बतप्रायप्रा। उसनके पप्रारर्थी कके वपतप्रा कके सहयहोग सके अश्लश्रील फहोरहो खखींचके जप्रानके कप्रा करन नहखीं वकयप्रा।
10. उपरहोक तथ्यधों कहो दृवष्टगत रखतके हहए, जबवक परम दृष्टयप्रा यह पतश्रीत हहोतप्रा हहै वक पश्रीवड़तप्रा स्वियसिं पप्रारर्थी सके पकेम करतश्री रश्री और उसनके यह कहप्रा कहप्रा रप्रा वक अगर पप्रारर्थी सके उसककी शप्रादश्री नहखीं हहई तहो विह अपनश्री जप्रान दके दकेगश्री ; ऐसप्रा पतश्रीत हहोतप्रा हहै वक पश्रीवड़तप्रा कके वपतप्रा उस पकेम ससिंबसिंधि सके सहमत नहखीं रके और उन्हधोंनके उसकप्रा वविविप्राह वकसश्री अन्य जगह तय कर वदयप्रा; पप्रारर्थी तरप्रा पश्रीवड़तप्रा कके वचत सके यह पतश्रीत हहोतप्रा हहै वक पकधों मम स्नकेवहल ससिंबसिंधि रप्रा, परम ससूचनप्रा ररपहोरर्मा मम लगप्रायके गयके आरहोप वक पप्रारर्थी नके अपनश्री वपतप्रा कके सहयहोग सके पश्रीवड़तप्रा ककी अश्लश्रील फहोरहो खखींचश्री, अत्यन्त अपप्राकक वतक पतश्रीत हहोतप्रा हहै तरप्रा पश्रीवड़तप्रा नके धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस० कके असिंतगर्मात वदयके गयके अपनके बयप्रान मम इस तथ्य कप्रा समरर्मान नहखीं वकयप्रा हहै, पप्रारर्थी एक नवियसुविक हहै, धजसकप्रा कहोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहखीं हहै, पप्रारर्थी वदनप्रासिंक 03.03.2025 सके कप्रारप्रागप्रार मम वनरुद्ध हहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै।
11. तद्नसुसप्रार, जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै।
12.
आविकेदक आशश्रीष यप्रादवि कहो वनम्नधलधखत शतर्दोसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित
मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतसुवष्ट कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दहो जमप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरहोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभियहोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़छप्राड़ नहखीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभियहोजन पक कके गविप्राहधों पर दबप्रावि नहखीं डिप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल कहोरर्मा दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हहोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 18.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench