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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 134531 (ALL)
BHANU PRATAP SHUKLA v. STATE OF U.P. THRU. ADDL.CHIEF SECY. PRIN. SECY. HOME LKO
BAIL/3196/2025 · 2025-04-17
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 134531 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:21657 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3196 of 2025 Applicant :- Bhanu Pratap Shukla Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Addl.Chief Secy. Prin. Secy. Home Lko Counsel for Applicant :- Nadeem Murtaza,Pallav Shukla,Shashank Tilhari Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री शशप्राशांक वतिलहप्रारश्री तिरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री अननुरप्राग विमप्रार्मा कको सनुनप्रा तिरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 439 दशां०प०सशां०/483 भप्रारतिश्रीय नप्रागररक सनुरकप्रा सशांवहतिप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तिनुति इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मनुकदमप्रा अपरप्राधि सशांख्यप्रा 352 सन 2024, अन्तिगर्माति धिप्रारप्रा 80(2), 85 बश्री०एन०एस एविशां 3/4 दहकेज पवतिषकेधि अधधिवनयम, रप्रानप्रा-वभनगप्रा, धजलप्रा-शप्राविस्तिश्री मम जमप्रानति ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हहै।
3. वदनप्राशांक 05.09.2024 कको 16:02 बजके पप्रारर्थी तिरप्रा उसकके तिश्रीन पनुतत्रों कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर्मा मम कहप्रा गयप्रा हहै वक वशकप्रायतिकतिप्रार्मा नके अपनश्री बहन कप्रा वविविप्राह वदनप्राशांक 02.03.2024 कको पप्रारर्थी कके पनुत सह -अवभयनुक अवनल कनु मप्रार शनुक्लप्रा कके सप्रार वकयप्रा रप्रा। सभश्री अवभयनुकगण वशकप्रायतिकतिप्रार्मा ककी बहन कको दहकेज कके धलए पतिप्रावडड़ि़ति करतिके रके। वदनप्राशांक 05.09.2024 कको सनुबह 8 बजके वशकप्रायतिकतिप्रार्मा कको फकोन सके अपनश्री बहन ककी बश्रीमप्रारश्री ककी ससूचनप्रा वमलश्री तिरप्रा पहहहुँचनके पर घर कके आहुँगन मम अपनश्री बहन कप्रा शवि दकेखप्रा , धजसकप्रा चकेहरप्रा एविशां शरश्रीर कप्रालप्रा पड़ि़प्रा हहआ रप्रा। वशकप्रायतिकतिप्रार्मा नके यह वविश्विप्रास व्यवक वकयप्रा वक अवभयनुकगण नके दहकेज ककी मप्राशांग पसूरश्री न हकोनके कके कप्रारण उसकको मप्रार वदयप्रा।
4. शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम शवि पर चकोर कप्रा ककोई वचन्ह नहहीं वमलप्रा तिरप्रा वविसरप्रा परश्रीकण मम क्लकोरकोपप्राइरश्रीफकोस वविश पप्रायप्रा गयप्रा हहै।
5. पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तिनुति शपर पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी एक 65 विषर्थीय वनदर्दोष विवृद्ध व्यवक हहै।
6. पप्रारर्थी सत परश्रीकण सशांख्यप्रा 221 सनन् 1998, अशांतिगर्माति धिप्रारप्रा 147/148/149, सपवठिति धिप्रारप्रा 323, 307, 302 भप्रा०दशां०ववि०, रप्रानप्रा-वभनगप्रा, धजलप्रा-शप्राविस्तिश्री मम दकोषधसद्ध हको चनुकप्रा हहै तिरप्रा इस
न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा आपरप्राधधिक अपश्रील सशांख्यप्रा 280 सनन् 2022 मम पप्राररति आदकेश वदनप्राशांक 18.10.2022 सके जमप्रानति वमल चनुककी हहै।
7. वविविकेचनप्रा कके ददौरप्रान मवृतिकप्रा कके भप्राई (वशकप्रायतिकतिप्रार्मा) तिरप्रा उसककी मप्राहुँ नके परम ससूचनप्रा ररपकोरर्मा कके करनत्रों कप्रा समरर्मान वकयप्रा हहै। पप्रारर्थी कके पनुत सह -अवभयनुक अवनल कनु मप्रार शनुक्लप्रा नके कहप्रा वक उसककी पत्नश्री कको मप्रानधसक बश्रीमप्रारश्री रश्री। पत्नश्री कके इलप्राज हकेतिनु विषर्मा जनुलप्राई, 2024 मम वशकप्रायतिकतिप्रार्मा कके खप्रातिके मम पहैसप्रा भकेजप्रा रप्रा और इस सशांबशांधि मम व्हप्राट्सएप पर सशांविप्राद भश्री हहआ रप्रा।
8.
पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तिनुति शपर पत मम यह भश्री कहप्रा गयप्रा हहै वक वशकप्रायतिकतिप्रार्मा एविशां पप्रारर्थी कके पनुत कके बश्रीच हहए व्हप्राट्सएप सशांविप्राद ककी पवति सशांलग्न हहै , धजससके यह पतिश्रीति हकोतिप्रा हहै वक वशकप्रायतिकतिप्रार्मा नके पप्रारर्थी कके पनुत सके इलप्राज कके धलए रु० 3000/- मप्राशांगके रके, धजसके ऑनलप्राइन मप्राध्यम सके अशांतिररति वकयप्रा गयप्रा रप्रा।
9. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा पत कप्रा वविरकोधि करतिके हहए कहप्रा वक पप्रारर्थी कके वविरुद्ध लगप्राए गए आरकोपत्रों ककी वविविकेचनप्रा मम पनुवष्टि हहई हहै और आरकोप पत वदनप्राशांक 21.02.2025 कको पस्तिनुति हको चनुकप्रा हहै। उन्हत्रोंनके यह भश्री कहप्रा वक पप्रारर्थी हत्यप्रा कके मनुकदमके मम दकोषधसद्ध व्यवक हहै तिरप्रा धिप्रारप्रा 480(1)(ii) बश्री०एन०एस०एस०, 2023 कके पररविप्राद कके दृवष्टिगति, ऐसके दकोषधसद्ध व्यवक कको जमप्रानति पर ररहप्रा नहहीं वकयप्रा जप्रा सकतिप्रा हहै।
10. धिप्रारप्रा 480(1)(ii) बश्री०एन०एस०एस०, कके पप्राविधिप्रान वनम्न पकप्रार हहह-
"धिप्रारप्रा 480 कके पप्राविधिप्रान उच्च न्यप्रायप्रालय तिरप्रा सत न्यप्रायप्रालय कके अवतिररक वकसश्री न्यप्रायप्रालय पर लप्रागसू हकोतिके हह तिरप्रा यह पप्राविधिप्रान उच्च न्यप्रायप्रालय पर लप्रागसू नहहीं हकोतिके हह। इसकके अवतिररक जब पप्रारर्थी कको हत्यप्रा कके पकरण , धजसमम विह दकोषधसद्ध हकोकर कके दशांवडिति वकयप्रा जप्रा चनुकप्रा हहै, मम भश्री इस न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा जमप्रानति दश्री जप्रा चनुककी हहै तिको मप्रात इस आधिप्रार पर वक विह एक अन्य पकरण मम दकोषधसद्ध हहै, पस्तिनुति पकरण मम उसककी जमप्रानति पप्रारर्मानप्रा पत मप्रात इस आधिप्रार पर वनरस्ति नहहीं ककी जप्रा सकतिश्री वक , जबवक दकोषधसवद्ध विप्रालके पकरण मम उसके जमप्रानति दश्री जप्रा चनुककी हहै।"
11. उच्च न्यप्रायप्रालय कको जमप्रानति पप्रारर्मानप्रा पत तिय करनके ककी वविवशष्टि शवकयप्राशां धिप्रारप्रा 483 बश्री०एन०एस०एस०,2023 सके पदप्रान ककी गई हह तिरप्रा इस आधिप्रार मम ऐसप्रा ककोई पवतिबशांधि नहहीं हहै वक उच्च न्यप्रायप्रालय वकसश्री अन्य पकरण मम दकोषधसद्ध व्यवक कको जमप्रानति नहहीं दके सकतिप्रा हहै।
12. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम नके यह भश्री तिकर्मा वदयप्रा वक पश्रीवड़ि़तिप्रा ककी मवृत्यनु उसकके वविविप्राह कके मप्रात छह महश्रीनके कके अशांदर अपनश्री ससनुरप्राल मम असमप्रान्य पररसस्रवतियत्रों मम हहई हहै तिरप्रा ऐसश्री पररसस्रवति मम पप्रारर्थी जमप्रानति पर ररहप्रा वकए जप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री नहहीं हहै।
13.
उपरकोक तिथ्यत्रों कको दृवष्टिगति रखतिके हहए , जबवक वशकप्रायतिकतिप्रार्मा नके दहकेज कके रूप मम लगप्रातिप्रार रुपयके ककी मप्राशांग करनप्रा एविशां इस कप्रारण सके अपनश्री बहन कको पतिप्रावडड़ि़ति करनके कप्रा करन वकयप्रा हहै , वकन्तिनु इस स्तिर पर उपलब्धि अवभलकेखश्रीय सप्राक्ष्य सके यह पतिश्रीति हकोतिप्रा हहै वक वशकप्रायतिकतिप्रार्मा ककी मप्राशांग पर पप्रारर्थी नके स्वियशां हश्री उसकको रुपयके अदप्रा वकए हह तिरप्रा पप्रारर्थी दप्रारप्रा वकसश्री पकप्रार ककी मप्राशांग वकए जप्रानके कप्रा ककोई परम दृष्टियप्रा सप्राक्ष्य भश्री उपलब्धि नहहीं हहै। पप्रारर्थी एक 65 विषर्थीय विवृद्ध व्यवक हहै एविशां वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हको चनुककी हहै तिरप्रा विह वदनप्राशांक 05.02.2025 सके जकेल मम वनरुद्ध हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मति हहै वक पप्रारर्थी जमप्रानति पर ररहप्रा वकए जप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै।
14. तिदननुसप्रार, जमप्रानति पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातिप्रा हहै।
15. आविकेदक भप्राननु पतिप्राप शनुक्लप्रा कको वनम्नधलधखति शतिर्दोशां कके अधिश्रीन सशांबशांधधिति मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी सशांतिनुवष्टि कके अननुसप्रार एक व्यवकगति बशांधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतिम पस्तिनुति करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानति पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़ि़छप्राड़ि़ नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके सप्रावकयत्रों पर दबप्रावि नहहीं डिप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयति ककी गई पत्यकेक वतिधर पर उपसस्रति हकोगप्रा। Order Date :- 17.4.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench