Research › Search › Judgment
Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 133604 (ALL)
AJAY NAT @ HASEEB v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.
BAIL/3071/2025 · 2025-04-16
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 133604 (ALL) · dailylaw.ai ]
[ 2025 DAILYLAW 133604 (ALL) · dailylaw.ai ]
Judgment text
Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.
Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:21366 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3071 of 2025 Applicant :- Ajay Nat @ Haseeb Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Ramakar Shukla Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री रमप्राकर शशुक्लप्रा ककी तरफ सके उपससरत वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री अवभिनवि धससिंह तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री असिंशशुमप्रान विमप्रार्मा कक सशुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 483 भिप्रारतश्रीय नप्रागररक सशुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगर्मात पसतशुत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मशुकदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 278 सन 2024 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 69, 352, 351(3) बश्री०एन०एस० रप्रानप्रा जयधससिंहपशुर धजलप्रा सशुल्तप्रानपशुर मम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हहै।
3. वदनप्रासिंक 15.10.2024 कक धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकरर्मा मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहप्रा वक विह एक 22 विरर्थीय यशुवितश्री हहै तरप्रा शप्रादश्री कप्रा झप्रासिंसप्रा दकेकर पप्रारर्थी नके उसकके सप्रार लगभिग 1 विरर्मा सके शप्रारश्रीररक ससिंबसिंधि बनप्रायके और असिंतततः शप्रादश्री करनके सके मनप्रा कर वदयप्रा।
4. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके असिंतगर्मात वदयके गयके अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहप्रा वक विह पप्रारर्थी कक लगभिग 3-4 सप्राल सके जप्रानतश्री हहै तरप्रा पप्रारर्थी उसकके सप्रार करश्रीब एक-डकेढ़ सप्राल सके शप्रादश्री कप्रा झप्रासिंसप्रा दकेकर दकेकर शप्रारश्रीररक ससिंबसिंधि बनप्रातप्रा रहप्रा हहै।
5. वचकत्सककीय परश्रीकण ररपकरर्मा मम वशकप्रायतकतर्थी कके शरश्रीर पर ककई चकर अरविप्रा बल पयकग कप्रा ककई वचह्न नहहीं पप्रायप्रा गयप्रा।
6. धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस० कके असिंतगर्मात वदयके गयके अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतर्थी नके ऐसप्रा ककी करन वकयप्रा तरप्रा एक -दक बप्रार दविप्रा धखलप्राकर गभिर्मापप्रात करनके कप्रा भिश्री आरकप लगप्रायप्रा।
7. पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार पसतशुत शपर-पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी एक 19 विरर्थीय वनदर्दोर नवियशुविक हहै और उसकप्रा ककई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै।
8. एक पसूरक शपर-पत कके मप्राध्यम सके पप्रारर्थी कके आधिप्रार कप्राडर्मा ककी पवत अवभिलकेख पर लप्राई
गई धजसमम उसककी जन्मवतधर वदनप्रासिंक 01.01.2007 असिंवकत हहै, धजससके यह पतश्रीत हकतप्रा हहै वक पप्रारर्थी ककी आयशु मप्रात 18 विरर्मा हहै।
9. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा -पत कप्रा वविरकधि करतके हहए कहप्रा वक वविविकेचनप्रा मम आरकपपों ककी पशुवष्टि हहई हहै और आरकप-पत वदनप्रासिंक 14.02.2025 कक पसतशुत वकयप्रा जप्रा चशुकप्रा हहै।
10.
उपरकक तथ्यपों कक दृवष्टिगत रखतके हहए , जबवक वशकप्रायतकतर्थी ककी आयशु 22 विरर्मा हहै तरप्रा पप्रारर्थी कप्रा आयशु मप्रात 18 विरर्मा हहै। वशकप्रायतकतर्थी नके पप्रारर्थी दप्रारप्रा वपछलके एक -डकेढ़ सप्राल सके शप्रादश्री कप्रा झप्रासिंसप्रा दकेकर शप्रारश्रीररक ससिंबसिंधि बनप्रानके कप्रा करन वकयप्रा वकन्तशु घरनप्रा कके पप्रारसिंभि हकनके कके समय वशकप्रायतकतर्थी सवियसिं वियसक रश्री तरप्रा पप्रारर्थी अवियसक रप्रा ; अभिश्री भिश्री वविधधि मम वनधिप्रार्माररत वविविप्राह ककी न्यसूनतम आयशु पप्रारर्थी पसूणर्मा नहहीं करतप्रा हहै तरप्रा इस कप्रारण सके पप्रारर्थी दप्रारप्रा वशकप्रायतकतर्थी सके वविविप्राह वकयप्रा जप्रानप्रा वविधधिक रूप सके ससिंभिवि हश्री नहहीं हहै ; पप्रारर्थी कप्रा ककई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै तरप्रा वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हक चशुककी हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै।
11. तद्नशुसप्रार, जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत सविश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै।
12. आविकेदक अजय नर कक वनम्नधलधखत शतर्दोसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित मधजसरटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतशुवष्टि कके अनशुसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दक जमप्रानतम पसतशुत करनके पर उपरकक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभियकजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़छप्राड़ नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभियकजन पक कके गविप्राहपों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककरर्मा दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपससरत हकगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 16.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench