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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 133138 (ALL)
MULAYAM SINGH YADAV v. STATE OF U.P THRU. PRIN. SECY. DEPTT. HOME CIVIL SECTT. LKO
BAIL/3013/2025 · 2025-04-10
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 133138 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:20429 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3013 of 2025 Applicant :- Mulayam Singh Yadav Opposite Party :- State Of U.P Thru. Prin. Secy. Deptt. Home Civil Sectt. Lko Counsel for Applicant :- Arvind Kumar Tiwari,Prashant Tiwari Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री पशप्राशांत वतविप्रारश्री , वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री रववि शश्रीविप्रास्तवि कको ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 439 दशां०प०सशां०/483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा सशांवहितप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तसुत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि सशांख्यप्रा 277 सनन् 2024, अन्तगरत धिप्रारप्रा 302 बश्री०एन०एस०, रप्रानप्रा-हिहजजूरपसुर, धजलप्रा-बहिरप्राइच मम जमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हिहै।
3. वदनप्राशांक 22.06.2024 कको पप्रारर्थी, उसकके वपतप्रा कन्धिई लप्राल तरप्रा दको अन्य व्यवकयय मनकोज कसु मप्रार वि अवनल कसु मप्रार कके वविरुद्ध धिप्रारप्रा 156(3) दशां०प०सशां० कके अन्तगरत पस्तसुत पप्राररनप्रा पत कके आधिप्रार पर धलखप्राई गई परम सजूचनप्रा ररपकोरर मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक वशकप्रायतकतप्रार पप्रापाँच सगके भप्राई रके, धजनमम सके एक पप्रारर्थी भश्री हिहै। वशकप्रायतकतप्रार कके सबसके बडके भप्राई भगकोलके कप्रा वविविप्राहि नहिहीं हिहआ रप्रा। वदनप्राशांक 22.02.2024 कको पप्रारर्थी अपनके पसुत कके सप्रार भगकोलके कको मकोररसप्राइवकल पर बहैठप्राकर वदन मम दको बजके कहिहीं लके गयप्रा और सप्राशांय 5 बजके ममृत अविस्रप्रा मम विप्रापस लप्राकर दप्राहि सशांस्कप्रार कर वदयप्रा। ममृतक कके वहिस्सके मम 8 बश्रीघप्रा जमश्रीन एविशां मकप्रान रप्रा, धजसककी विसश्रीयत वदनप्राशांक 22.02.2024 कको सप्राशांय 4 बजके पप्रारर्थी नके अपनके पसुत मसुलप्रायम धसशांहि यप्रादवि कके नप्राम करप्रा वदयप्रा एविशां अन्य दको नप्रावमत अवभयसुकगण विसश्रीयत कके वनष्पप्रादन कके गविप्राहि रके।
4.
पप्राररनप्रा पत कके सप्रार पस्तसुत शपर पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी ककी तश्रीन अन्य पकरणय मम सशांधलप्ततप्रा दशप्रारई गई हिहै, धजसमम सके एक मम वविविकेचक नके उसकके वविरुद्ध आरकोपय
ककी पसुवष्टि हिकोनप्रा नहिहीं पप्रायप्रा तरप्रा दको पकरणय मम उसके जमप्रानत वमल चसुककी हिहै। वविविकेचनप्रा कके ददौरप्रान वशकप्रायतकतप्रार नके परम सजूचनप्रा ररपकोरर कके करनय कप्रा समररन वकयप्रा। वविविकेचक नके वशकप्रायतकतप्रार सके पजूछप्रा वक उसनके अपनके भप्राई ककी ममृत्यसु हिकोनके पर तत्कप्राल पसुधलस कको सजूचनप्रा क्यय नहिहीं दश्री , जबवक उसके शक रप्रा वक अवभयसुकगण नके उसकके भप्राई ककी हित्यप्रा वकयप्रा, धजस पर वविविकेचक नके कहिप्रा वक बहिन तरप्रा गप्रापाँवि कके लकोगय दप्रारप्रा मनप्रा कर दकेनके कके कप्रारण पसुधलस कको सजूचनप्रा नहिहीं दश्री एविशां पकोस्रमप्राररम (पश्री.एम.) नहिहीं करप्रायप्रा। पप्रारर्थी नके यहि भश्री कहिप्रा वक दप्राहि-सशांस्कप्रार वि वक्रियप्रा-कमर मम ममृतक कके सभश्री भप्राई मदौजजूद रके। कधरत विसश्रीयत ककी पवत वशकप्रायतकतप्रार वविविकेचक कको उपलब्धि नहिहीं करप्रा पप्राए। कसु छ अन्य व्यवकयय नके वविविकेचक कको शपर पत दकेकर यहि कहिप्रा वक ममृतक तपकेवदक (कयरकोग) और लकविप्रा रकोग सके ग्रस्त रप्रा और बश्रीमप्रारश्री कके कप्रारण उसककी ममृत्यसु हिहई। सभश्री नके कहिप्रा वक ममृतक ककी ममृत्यसु स्विप्राभप्रावविक रूप सके हिहई हिहै तरप्रा वकसश्री कके दप्रारप्रा हित्यप्रा नहिहीं ककी गई हिहै।
5. पप्रारर्थी कके वपतप्रा सहि-अवभयसुक कशां धिई लप्राल कको पस्तसुत पकरण मम जमप्रानत पप्राररनप्रा पत सशांख्यप्रा 2717 सनन् 2025 मम पप्राररत आदकेश वदनप्राशांक 04.04.2025 दप्रारप्रा जमप्रानत वमल चसुककी हिहै।
6. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक वविविकेचनप्रा मम पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आरकोपय ककी पसुवष्टि हिहई हिहै और वदनप्राशांक 17.03.2025 कको आरकोप पत पस्तसुत वकयप्रा जप्रा चसुकप्रा हिहै। वशकप्रायतकतप्रार कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके भश्री पप्राररनप्रा पत कप्रा वविरकोधि वकयप्रा।
7. उपरकोक तथ्यय कके दृवष्टिगत , जबवक वशकप्रायतकतप्रार पप्रारर्थी कप्रा सगप्रा भप्राई हिहै ; वशकप्रायतकतप्रार कके एक अन्य भप्राई ककी ममृत्यसु वदनप्राशांक 22.02.2024 कको हिहई तरप्रा अशांवतम सशांस्कप्रार मम स्विश्रीकमृ त रूप सके वशकप्रायतकतप्रार नहिहीं समममधलत हिहआ तरप्रा उसनके पसुधलस कको ककोई सजूचनप्रा नहिहीं दश्री। इसकके बप्राद भश्री परम सजूचनप्रा ररपकोरर 156(3) द०प०सशां० कके अन्तगरत वदए गए पप्राररनप्रा पत कके आधिप्रार पर वदनप्राशांक 22.06.2024 कको अशांवकत हिहई; स्वितशांत सप्रावकयय नके कहिप्रा वक ममृतक ककी ममृत्यसु बश्रीमप्रारश्री सके हिहई हिह ; पप्रारर्थी कके वपतप्रा सहि -अवभयसुक कशां धिई लप्राल कको जमप्रानत वमल चसुककी हिहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी भश्री जमप्रानत पर
ररहिप्रा वकए जप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै।
8. तदनसुसप्रार, जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै।
9.
आविकेदक मसुलप्रायम धसशांहि यप्रादवि कको वनमनधलधखत शतरशां कके अधिश्रीन सशांबशांधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी सशांतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बशांधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेडछप्राड नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके सप्रावकयय पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयत ककी गई पत्यकेक वतधर पर उपमस्रत हिकोगप्रा। Order Date :- 10.4.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench