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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 132544 (ALL)

SHIVPAL PASI v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.

BAIL/2928/2025 · 2025-04-08

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:19756 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2928 of 2025 Applicant :- Shivpal Pasi Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Dheeraj Awasthi,Krishna Kant Yadav Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री धिश्रीरज अविस्रश्री तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री रववि शश्रीविप्रास्तवि कको ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगरत पस्तसुत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 246 सन 2024 अन्तगरत धिप्रारप्रा 115(2), 103(1), 351(3) बश्री०एन०एस० रप्रानप्रा सफकीपसुर धजलप्रा उनप्रावि मम जमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हिहै। 3. वदनप्रासंक 01.10.2024 कको समय 10:40 कको पप्रारर्थी, उसकके वपतप्रा तरप्रा पसुत कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक वदनप्रासंक 01.10.2024 कको समय करश्रीब 9 बजके ससुबहि खसूसंरप्रा गप्राडनके कके वविविप्राद कको लकेकर अवभयसुकगण नके वशकप्रायतकतप्रार कके वपतप्रा कको लप्राठश्री-डण्डके सके बसुरश्री तरहि मप्रारप्रापश्रीरप्रा। जब पप्रारर्थी तरप्रा उसककी मप्रामाँ उनकको बचप्रानके गयके तको उन्हिम भश्री मप्रारप्रा पश्रीरप्रा। मप्रारपश्रीर मम धसर पर आई चकोर ककी विजहि सके वशकप्रायतकतप्रार कके वपतप्रा बकेहिकोश हिको गयके धजन्हिम सरकप्रारश्री एम्बसुलकेन्स सके सप्रामसुदप्रावयक स्विप्रास्थ्य कके न्द्र सफकीपसुर लके जप्रायप्रा गयप्रा जहिप्रामाँ सके उन्हिम धजलप्रा अस्पतप्राल भकेज वदयप्रा गयप्रा। 4. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके असंतगरत वदयके गयके अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतप्रार नके परम ससूचनप्रा ररपकोरर कके करननों कप्रा समररन वकयप्रा तरप्रा उसनके यहि कहिप्रा वक उसके स्वियसं कको ज्यप्रादप्रा चकोर नहिहीं आयश्री रश्री इसधलए पसुधलस कके कहिनके कके बप्राद भश्री उसनके अपनश्री वचवकत्सककीय परश्रीकण नहिहीं करप्रायप्रा। 5. ममृतक ककी मप्रामाँ नके अपनके बयप्रान मम कहिप्रा वक मप्रारपश्रीर मम आयश्री चकोर सके विहि भश्री बकेहिकोश हिकोकर वगर पडश्री रश्री तरप्रा पररविप्रारविप्रालनों एविसं अन्य लकोगनों नके बप्राद मम पप्रानश्री कके छहींरप्रा मप्रारकर उसके उठप्रायप्रा तको कसु छ समय बप्राद उसके हिकोश आयप्रा। उनकप्रा कहिनप्रा रप्रा वक अवभयसुकगण पसूरप्रा तप्रालप्राब कब्जप्रा करनप्रा चप्राहितके हिह जबवक उनकके पवत खसूसंरप्रा अपनश्री जगहि पर गप्राड रहिके रके। 6. वविविकेचक नके पप्रारर्थी तरप्रा उसकके वपतप्रा ककी वनशप्रानदकेहिश्री पर कधरत रूप सके एक खकेत कके वकनप्रारके झप्रावडयनों सके खसुलके स्रप्रान सके 2 लवठयप्रासं बरप्रामद ककी। बरप्रामदगश्री वकसश्री स्वितसंत सप्राकश्री ककी उपसस्रवत मम नहिहीं ककी गयश्री हिहै। 7. घरनप्रा मम पप्रारर्थी कके वपतप्रा एविसं पप्रारर्थी कको भश्री चकोरम आयहीं। पप्रारर्थी कके वपतप्रा कके वचवकत्सककीय परश्रीकण मम धसर कके उपर फरप्रा हिहआ घप्रावि , बप्राई कलप्राई तरप्रा बप्रायके कसु वहिनश्री एविसं हिप्रार मम ददर बतप्रायप्रा गयप्रा। सभश्री चकोरम तप्राजश्री रश्री , सप्रामप्रान्य पकमृ वत ककी एविसं कठकोर एविसं कसु न्द विस्तसु सके कप्राररत ककी गयश्री रश्री। पप्रारर्थी कको दप्रावहिनके कप्रान कके पप्रास एक फरप्रा हिहआ घप्रावि कप्राररत हिहआ तरप्रा यहि चकोर भश्री तप्राजश्री , सप्रामप्रान्य पकमृ वत ककी कठकोर एविसं कसु न्द विस्तसु सके कप्राररत हिहई रश्री। 8. ममृतक कके शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम धसर पर दप्रावहिनश्री तरफ 8 सके.मश्री. 6 x सके.मश्री. ककी ससूजन पप्रायश्री गयश्री तरप्रा ममृत्यसु कप्रा कप्रारण चकोर कके कप्रारण ककोमप्रा बतप्रायप्रा गयप्रा। शवि पर वकसश्री अन्य चकोर कप्रा वचह्न नहिहीं पप्रायप्रा गयप्रा।। ममृतक ककी पत्नश्री अनश्रीतप्रा कके वचवकत्सककीय परश्रीकण मम दप्रावहिनके घसुरनके पर एक वछलप्रा हिहआ घप्रावि तरप्रा बप्रायम हिप्रार मम ददर बतप्रायप्रा गयप्रा। 9. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार पस्तसुत शपर-पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हिहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। 10. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा-पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक वविविकेचनप्रा मम आरकोपनों ककी पसुवष्टि हिहई हिहै और आरकोप-पत वदनप्रासंवकत 17.12.2024 पस्तसुत वकयप्रा जप्रा चसुकप्रा हिहै। 11. उपरकोक तथ्यनों कको दृवष्टिगत रखतके हिहए, जबवक घरनप्रा मम दकोननों पकनों कके एक सके अधधिक व्यवकयनों कको चकोरम आयश्री हिह तरप्रा पप्रारर्थी कको स्वियसं भश्री घरनप्रा मम चकोरम आयहीं हिह ; घरनप्रा 3 अवभयसुकगण दप्रारप्रा कप्राररत करनप्रा कहिप्रा गयप्रा जबवक ममृतक कको मप्रात धसर पर ससूजन ककी चकोर आयश्री; घरनप्रा ससंपधत्ति कको लकेकर हिहए झगडके मम अचप्रानक घवरत हिहई; वविविकेचनप्रा पसूणर हिको चसुककी हिहै; पप्रारर्थी कप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै,पप्रारर्थी वदनप्रासंक 01.10.2024 सके कप्रारप्रागप्रार मम वनरुद्ध हिहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 12. तद्नसुसप्रार, जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै। 13. आविकेदक वशविपप्राल पप्रासश्री कको वनम्नधलधखत शतर्दोसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेडछप्राड नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके गविप्राहिनों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हिकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 8.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench