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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 13182 (ALL)
SHAILENDRA @ LALA v. STATE OF U.P.
BAIL/3169/2025 · 2025-08-11
Gautam Chowdhary
body2025
[ 2025 DAILYLAW 13182 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC:136776 Court No. - 70 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 3169 of 2025 Applicant :- Shailendra @ Lala Opposite Party :- State of U.P. Counsel for Applicant :- Ajay Kumar Pandey,Alok Singh,Sunil Singh Counsel for Opposite Party :- G.A.,Uttam Singh Hon'ble Dr. Gautam Chowdhary,J.
1. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा, पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं रिद्वाज्य कक तरिफ सवे ववदद्वान अपरि शद्वासककय अधधिवकद्वा कको ससुनद्वा तथद्वा पतद्वावलदी कद्वा पररिशदीलन वकयद्वा।
2. वतरमद्वान दद्वाणणण्डिक प्रककरर जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वा पत आववेदक शशैललद्र उफर लद्वालद्वा कक ओरि सवे मसु०अ०सवं० 381/2024, अवंतररत धिद्वारिद्वा 191(2), 191(3), 190, 131, 115(2), 109, 352, 324(4) बदी.एन.एस., थद्वानद्वा रूरिद्वा, धजलद्वा कद्वानपसुरि दवेहद्वात मल जमद्वानत परि मसुक करिनवे हवेतसु प्रस्तसुत वकयद्वा रयद्वा हशै।
3.
आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा नवे तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक कको इस प्रकरिर मल रलत एववं फजर्जी ढवंर सवे झझूठद्वा फवं सद्वायद्वा रयद्वा हशै , उसनवे कधथत अपरिद्वाधि कद्वाररित नहहीं वकयद्वा हशै। आववेदक दद्वारिद्वा ऐसद्वा ककोई भदी कक त्य कद्वाररित नहहीं वकयद्वा रयद्वा हशै, जशैसद्वावक प्रद्वाथवमकक मल दवशरत वकयद्वा रयद्वा हशै। आववेदक परि आकवेप हशै वक अन्य सभदी अवभयसुकरर फरिसद्वा, कसु ल्हद्वाडदी, भद्वालद्वा औरि कसु दद्वाल सवे लशैस थवे औरि उन्हहोंनवे सझूचनद्वाकतद्वार कवे भद्वाई कको चकोटल पहहहुँचद्वाईवं। आववेदक कवे कब्जवे सवे एक ण्डिवंण्डिवे कक बरिद्वामदरदी दशद्वारयदी रयदी हशै, लवेवकन उक बरिद्वामदरदी कद्वा ककोई स्वतवंत सद्वाकदी नहहीं हशै। आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा दद्वारिद्वा अवग्रिम यह कथन वकयद्वा रयद्वा वक चसुटशैल नवे पसुधलस कवे समक दजर करिद्वाए रए अपनवे बयद्वान मल आववेदक परि कसु ल्हद्वाडदी सवे चकोट पहहहुँचद्वानवे कद्वा कथन वकयद्वा हशै, वकन्तसु वद्वाददी मसुकदमद्वा नवे अपनवे बयद्वान मल आववेदक परि चसुटशैल कको भद्वालवे सवे चकोट पहहवंचद्वायवे जद्वानवे कद्वा कथन वकयद्वा हशै । चसुटशैल कवे बयद्वान,
वद्वाददी मसुकदमद्वा कवे बयद्वान एववं अवभयकोजन कथद्वानक मल परिस्परि ववरिकोधिद्वाभद्वास हशै , धजससवे अवभयकोजन कथद्वानक सवंवदग्धि पररिलवकत हको रिहद्वा हशै। वतरमद्वान वद्वाद कको कद्वाररित करिनवे मल आववेदक कक ककोई वववशष्ट भझूवमकद्वा दवशरत नहहीं कक रयदी हशै। उक घटनद्वा कद्वा ककोई स्वतवंत सद्वाकदी नहहीं हशै। वतरमद्वान वद्वाद मल एक अन्य सह -अवभयसुक पवंकज कक जमद्वानत, जमद्वानत प्रद्वाथरनद्वापत सवं० 9060/2025 मल आदवेश वदनद्वावंवकत 11.08.2025 कको जमद्वानत प्रद्वाप्त हको चसुकक हशै। पसुननः उनकद्वा यह भदी कथन हशै वक आववेदक कक तरिफ सवे यह आश्वद्वासन वदयद्वा रयद्वा हशै वक वह कद्वानझून कक प्रवक्रियद्वा मल सहयकोर करिनवे कवे धलए तशैयद्वारि हशै औरि जब भदी आवश्यकतद्वा हकोरदी वह ईमद्वानदद्वारिदी सवे अदद्वालत कवे समक खसुद कको उपलब्धि करिद्वाएरद्वा औरि उन सभदी शतरवं कको स्वदीकद्वारि करिनवे कवे धलए भदी तशैयद्वारि हशै जको न्यद्वायद्वालय उस परि अधधिरिकोवपत करिवेरदी। आववेदक वनदरष हशै तथद्वा वह इस प्रकरिर मल वद० 11.11.2024 सवे कद्वारिद्वारद्वारि मल वनरुद्ध हशै। इसधलए आववेदक कको जमद्वानत परि छकोड वदयद्वा जद्वाय।
4.
पररिवद्वाददी कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा एववं ववदद्वान अपरि शद्वासककय अधधिवकद्वा नवे आववेदक कवे जमद्वानत कद्वा प्रबल ववरिकोधि करितवे हहए तकर प्रस्तसुत वकयद्वा वक आववेदक दद्वारिद्वा कद्वाररित अपरिद्वाधि सवंवंजवेय एववं रवंभदीरि प्रकक वत कद्वा हशै , इसधलए आववेदक कको जमद्वानत परि न छकोडद्वा जद्वाय।
5. आववेदक कवे ववदद्वान अधधिवकद्वा कवे तकरवं कवे पररिप्रवेक्ष्य मल पतद्वावलदी परि उपलब्धि सद्वारिवद्वान तथ्यहों एववं पररिणस्थवतयहों कद्वा समग्रि रूप सवे अवलकोकन करिनवे कवे बद्वाद , सबझूतहों कक प्रकक वत औरि वकसदी भदी ठकोस ववरिकोधिद्वात्मक सद्वामग्रिदी कक अनसुपणस्थवत एववं उपलब्धि सद्वामग्रिदी सवे छवेडछद्वाड कक सवंभद्वावनद्वा न हकोनवे कवे तथ्य कको दवेखतवे हहए मवेरिदी रिद्वाय मल आववेदक कको जमद्वानत परि मसुक करिनवे कद्वा उपयसुक आधिद्वारि हशै।
6. अतनः वद्वाद कवे रसुर-दकोष परि वबनद्वा ककोई वटप्परदी वकए हहए आववेदक कको उपरिकोक ववररत अपरिद्वाधि मल सवंबवंधधित न्यद्वायद्वालय कक सवंतसुवष्ट परि व्यवकरत बवंधि -पत एववं अधधिक धिनरिद्वावश कवे ककोई भदी दको प्रवतभझू प्रस्तसुत करिनवे परि वनम्नधलधखत शतरवं कवे सद्वाथ जमद्वानत परि छकोड वदयद्वा जद्वाय।
i. आववेदक ववववेचनद्वा यद्वा परिदीकर कवे ददौरिद्वान अवभयकोजन सद्वाक्ष्यहों कवे सद्वाथ छवेडछद्वाड नहहीं करिवेरद्वा। ii. आववेदक अवभयकोजन सद्वावकयहों व पदीवडतद्वा / वशकद्वायतकतद्वार कको ण्डिरिद्वायवेरद्वा/धिमकद्वायवेरद्वा नहहीं। iii. आववेदक न्यद्वायद्वालय कवे आदवेशहों कद्वा पद्वालन करिवेरद्वा , वह परिदीकर कवे ददौरिद्वान वबनद्वा ककोई अनद्वावश्यक स्थरन धलए वनयत वतधथ परि न्यद्वायद्वालय मल उपणस्थत हकोरद्वा तथद्वा परिदीकर मल ईमद्वानदद्वारिदी सवे सहयकोर करिवेरद्वा। iv. आववेदक जमद्वानत परि ररिहद्वा हकोनवे कवे बद्वाद जमद्वानत कक स्वतवंततद्वा कद्वा दसुरूपयकोर नहदी करिवेरद्वा औरि वकसदी भदी अपरिद्वाधधिक रवतववधधि मल धलप्त नहहीं हकोरद्वा न ककोई अपरिद्वाधधिक कक त्य करिवेरद्वा। v. आववेदक प्रत्यक यद्वा अप्रत्यक रूप सवे मद्वामलवे कवे तथ्यहों सवे पररिवचत वकसदी भदी व्यवक यद्वा पसुधलस अधधिकद्वाररियहों कको ककोई प्रलकोभन यद्वा धिमकक नहहीं दवेरद्वा न हदी उनसवे ककोई वद्वायदद्वा करिवेरद्वा, धजसकवे कद्वारिर उन्हल न्यद्वायद्वालय मल तथ्यहों कको उजद्वाररि करिनवे सवे ववरित रिहनद्वा पण्डिवेडे़।
7. उपरिकोक शतरवं मल सवे वकसदी कवे उलवंघन कवे मद्वामलवे मल , परिदीकर न्यद्वायद्वालय आववेदक कक जमद्वानत वनयमद्वानसुसद्वारि रिद्द करिनवे कको स्वतवंत हशै। Order Date :- 12.8.2025 Pawan Kumar Digitally signed by :- PAWAN KUMAR High Court of Judicature at Allahabad