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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 131792 (ALL)
AJAY MAHAWAT v. STATE OF U.P. THRU. SECY. HOME LKO.
BAIL/2868/2025 · 2025-04-05
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 131792 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:19170 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2868 of 2025 Applicant :- Ajay Mahawat Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Priyanka Yadav,Pradeep Kumar Maurya,Rizwanul Haque Ansari Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री ररिजविप्राननुल हक अंसप्रारिश्री तरप्रा वविदप्रान अपरि शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री अशशोक शश्रीविप्रास्तवि कशो सनुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररिशश्रीलन वकयप्रा।
2. धिप्रारिप्रा 483 भप्रारितश्रीय नप्रागररिक सनुरिकप्रा सअंवहतप्रा कके अंतगरत पस्तनुत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारिप्रा पप्रारर्थी नके मनुकदमप्रा अपरिप्राधि सअंख्यप्रा 13 सन 2025 अन्तगरत धिप्रारिप्रा 64, 87 बश्री०एन०एस० रप्रानप्रा हरिगप्राअंवि धजलप्रा सश्रीतप्रापनुरि मम जमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै।
3. वदनप्राअंक 18.01.2025 कशो धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररिपशोरर मम वशकप्रायतकतप्रार नके कहप्रा वक पप्रारर्थी उसककी 16 विरर्थीय बहन कशो वदनप्राअंक 14.01.2025 कशो रिप्रात 10 बजके घरि सके भगप्रा लके गयप्रा।
4. धिप्रारिप्रा 180 बश्री०एन०एस० कके अंतगरत वदयके गयके अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके कहप्रा वक विह पप्रारर्थी कशो एक सप्राल सके जप्रानतश्री हहै औरि पप्रारर्थी कके बनुलप्रानके परि एविअं जबरिदस्तश्री करिनके परि पश्रीवड़ितप्रा उसकके सप्रार चलश्री गयश्री। विके लशोग पहलके हरिगप्राअंवि रिकेलविके स्रकेशन सके लखनऊ गयके औरि वफिरि लखनऊ सके रटकेन सके इलप्राहप्राबप्राद गयके जहप्राहाँ वकरिप्रायके कके कमरिके मम रिहके औरि पप्रारर्थी नके पश्रीवड़ितप्रा कके सप्रार शप्रारिश्रीररिक सअंबअंधि भश्री बनप्रायके। परम ससूचनप्रा ररिपशोरर ककी जप्रानकप्रारिश्री हशोनके परि पप्रारर्थी नके कहप्रा वक पश्रीवड़ितप्रा उससके शप्रादश्री करि लके तशो विह बच जप्रायकेगप्रा वकन्तनु पश्रीवड़ितप्रा नके स्वियअं हश्री मनप्रा करि वदयप्रा।
5. वचकत्सककीय परिश्रीकण ररिपशोरर मम पश्रीवड़ितप्रा कके शरिश्रीरि परि कशोई चशोर अरविप्रा बल पयशोग कप्रा कशोई वचह्न नहहीं पप्रायप्रा गयप्रा। रिशोवडियशोललॉधजकल परिश्रीकण कके अननुसप्रारि पश्रीवड़ितप्रा ककी आयनु 18-19 विरर कके बश्रीच हहै। वचवकत्सक कशो वदयके गयके अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके कहप्रा वक उसकके सप्रार कशोई जबरिदस्तश्री नहहीं ककी गयश्री।
6. धिप्रारिप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस० कके अंतगरत वदयके गयके अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके पसूविर करन कशो दशोहरिप्रातके हहए यह कहप्रा वक पप्रारर्थी नके इलप्राहप्राबप्राद मम उसके वकरिप्रायके कके कमरिके परि
रिखप्रा, गलत कप्राम वकयप्रा औरि कशोरर महैररिज कके धलए दबप्रावि बनप्रायप्रा। हरिगप्राअंवि विप्रापस आतके समय पनुधलस नके पकड़ि धलयप्रा। पश्रीवड़ितप्रा नके यह भश्री कहप्रा वक पप्रारर्थी शप्रादश्रीशनुदप्रा हहै औरि उसकके दशो बच्चके हह तरप्रा यह बप्रात पप्रारर्थी नके उससके छनु पप्रायश्री रश्री।
7. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार पस्तनुत शपर-पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोर हहै औरि उसकप्रा कशोई आपरिप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै।
8.
वविदप्रान अपरि शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा-पत कप्रा वविरिशोधि करितके हहए कहप्रा वक अभश्री तक डिश्री.एन.ए. जप्राअंच आख्यप्रा पप्राप्त नहहीं हहई हहै, वविविकेचनप्रा अभश्री पचधलत हहै। वगरिफ्तप्रारिश्री मकेमशो मम पप्रारर्थी ककी आयनु 25 विरर अंवकत हहै।
9. उपरिशोक तथ्ययों कशो दृवष्टिगत रिखतके हहए, जबवक पश्रीवड़ितप्रा कप्रा करन हहै वक विह पप्रारर्थी कके सप्रार वपछलके एक विरर सके सअंबअंधि मम रश्री तरप्रा वचवकत्सक कके समक पश्रीवड़ितप्रा नके कहप्रा वक पप्रारर्थी नके कशोई बल पयशोग नहहीं वकयप्रा हहै एविअं परम ससूचनप्रा ररिपशोरर ककी जप्रानकप्रारिश्री हशोनके परि दशोनयों स्वियअं हश्री विप्रापस आ गयके; पप्रारर्थी एक नवियनुविक हहै धजसकप्रा कशोई आपरिप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारिश्री हहै।
10. तद्ननुसप्रारि, जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रारि वकयप्रा जप्रातप्रा हहै।
11. आविकेदक अजय महप्रावित कशो वनम्नधलधखत शतर्दोअं कके अधिश्रीन सअंबअंधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी सअंतनुवष्टि कके अननुसप्रारि एक व्यवकगत बअंधिपत औरि समप्रान रिप्रावश ककी दशो जमप्रानतम पस्तनुत करिनके परि उपरिशोक मप्रामलके मम जमप्रानत परि ररिहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयशोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहहीं करिकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयशोजन पक कके गविप्राहयों परि दबप्रावि नहहीं डिप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल कशोरर दप्रारिप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारिश्रीख परि उपसस्रत हशोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 5.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench