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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 131615 (ALL)

SHADAB v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.

BAIL/2773/2025 · 2025-04-03

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:18655 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2773 of 2025 Applicant :- Shadab Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Chhaya Tripathi Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्रीमतश्री छप्रायप्रा वत्रिपप्राठश्री तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री अशशोक शश्रीविप्रास्तवि कशो ससुनप्रा तरप्रा पत्रिप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगरत पस्तसुत इस पप्राररनप्रा-पत्रि दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 60 सन 2025 अन्तगरत धिप्रारप्रा 69, 352, 351(3) बश्री०एन०एस० रप्रानप्रा जप्रायस धजलप्रा अमकेठश्री मम जमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हिहै। 3. वदनप्रासंक 05.03.2025 कशो पप्रारर्थी, उसकके वपतप्रा तरप्रा मप्रामप्रा यसुनसुस कके वविरुद धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपशोरर मम वशकप्रायतकत्रिर्थी नके कहिप्रा वक उसककी आयसु 24 विरर हिहै, शप्रादश्री कप्रा झप्राझाँसप्रा दकेकर पप्रारर्थी उसकके सप्रार शप्रारश्रीररक ससंबसंधि बनप्रातप्रा रहिप्रा वकन्तसु अन्तततः उसनके शप्रादश्री करनके सके इसंकप्रार कर वदयप्रा। 4. पप्राररनप्रा पत्रि कके सप्रार पस्तसुत शपर पत्रि मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोर हिहै तरप्रा उसकप्रा कशोई पसूविर आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। शपर-पत्रि मम यहि भश्री कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी नके पश्रीवड़ितप्रा सके वदनप्रासंक 03.12.2024 कशो वविविप्राहि कर धलयप्रा हिहै और पककप्राररों कके मध्य वनष्पप्रावदत विहैविप्रावहिक अनसुबसंधि-पत्रि ककी पवत शपर-पत्रि कके सप्रार ससंलग्नक ससंख्यप्रा 2 कके रूप मम ससंलग्न हिहै। 5. यद्यवप धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके असंतगरत वदयके गयके अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके परम ससूचनप्रा ररपशोरर कके करनरों कप्रा समररन वकयप्रा वकन्तसु धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस० कके असंतगरत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके यहि कहिप्रा वक वदनप्रासंक 03.12.2024 कशो पप्रारर्थी नके उससके एक स्रप्राम्प पकेपर पर हिस्तप्राकर करप्रायप्रा रप्रा धजसकके बप्राद कहिप्रा वक पप्रारर्थी और वशकप्रायतकत्रिर्थी ककी शप्रादश्री हिशो गयश्री तरप्रा उसकके बप्राद पप्रारर्थी नके 2 महिश्रीनके तक उसके अपनके सप्रार पत्नश्री कके रूप मम रखप्रा रप्रा। 6. वचवकत्सककीय परश्रीकण मम पश्रीवड़ितप्रा कके शरश्रीर पर चशोर अरविप्रा बल पयशोग कप्रा कशोई वचह नहिहीं पप्रायप्रा गयप्रा। 7. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा -पत्रि कप्रा वविरशोधि वकयप्रा और कहिप्रा वक लगप्रायके गयके आरशोप गसंभश्रीर पकक वत कके हिह और वविविकेचनप्रा अभश्री पचधलत हिहै। 8. उपरशोक तथ्यरों कशो दृवष्टिगत रखतके हिहए, जबवक परम ससूचनप्रा ररपशोरर मम पश्रीवड़ितप्रा नके पप्रारर्थी दप्रारप्रा वविविप्राहि करनके सके अस्विश्रीकप्रार वकयके जप्रानके कप्रा करन वकयप्रा वकन्तसु पप्राररनप्रा-पत्रि कके सप्रार पकरों कके मध्य वनष्पप्रावदत विहैविप्रावहिक अनसुबसंधि -पत्रि वदनप्रासंक 03.12.2024 ककी पवत ससंलग्न हिहै। इसकप्रा वनष्पप्रादन पश्रीवड़ितप्रा नके भश्री धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस० कके असंतगरत वदयके गयके अपनके बयप्रान मम स्विश्रीकप्रार वकयप्रा हिहै ; उभयपक मसुसलमप्रान हिह और उनमम वविविप्राहि एक अनसुबसंधि हिश्री हिशोतप्रा हिहै तरप्रा पप्रारर्थी कप्रा कशोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै और विहि वदनप्रासंक 07.03.2025 सके कप्रारप्रागप्रार मम वनरुद हिहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 9. तद्नसुसप्रार, जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत्रि स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै। 10. आविकेदक शप्रादप्राब कशो वनम्नधलधखत शतर्दोसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत्रि और समप्रान रप्रावश ककी दशो जमप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरशोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयशोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयशोजन पक कके गविप्राहिरों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल कशोरर दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हिशोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 3.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench