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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 131514 (ALL)

JOT PRAKASH @ JOT PRAKASH SINGH v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. DEPTT. OF HOME U.P. LKO. AND 4 OTHERS

BAIL/2771/2025 · 2025-04-03

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:18585 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2771 of 2025 Applicant :- Jot Prakash @ Jot Prakash Singh Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Deptt. Of Home U.P. Lko. And 4 Others Counsel for Applicant :- Jyotinjay Verma Counsel for Opposite Party :- G.A.,Vijyant Nigam Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री ज्ययोवततिंजय विरप्रार , वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री अनतिंत पतप्राप धसतिंह तरप्रा वशकप्रायतकतप्रार कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री वविजयतिंत वनगर कयो ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा सतिंवहतप्रा कके अतिंतगरत पस्तसुत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके रसुकदरप्रा अपरप्राधि सतिंख्यप्रा 0555 सन 2024 अन्तगरत धिप्रारप्रा 137/ (2), 87, 64(1) बश्री०एन०एस० एवितिं धिप्रारप्रा 5( )( ) & 6 j ii ललवगक अपरप्राधिधों सके बप्रालकधों कप्रा सतिंरकण अधधिवनयर रप्रानप्रा रप्रारगप्रातिंवि धजलप्रा बहरप्राइच रम जरप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै। 3. वदनप्रातिंक 15.11.2024 कयो तश्रीन नप्रावरत व्यवकयधों, धजसरम पप्रारर्थी सममरधलत नहहीं हहै तरप्रा एक अजप्रात व्यवक कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परर ससूचनप्रा ररपयोरर रम कहप्रा गयप्रा हहै वक अवभयसुकगण वशकप्रायतकतप्रार ककी 17 विरर्थीय पसुतश्री कयो वदनप्रातिंक 14.11.2024 कयो रप्रावत रम बहलप्रा -फसु सलप्राकर वकसश्री अजप्रात आदरश्री कके सप्रार भगविप्रा वदयके। 4. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके अतिंतगरत वदयके गयके अपनके बयप्रान रम पश्रीवड़ितप्रा नके कहप्रा वक विह पप्रारर्थी सके प्यप्रार करतश्री हहै , वदनप्रातिंक 13.11.2024 कयो पप्रारर्थी उसके अपनके सप्रार अपनश्री ररश्तकेदप्रारश्री रम लके गयप्रा रप्रा। परर ससूचनप्रा ररपयोरर ककी जप्रानकप्रारश्री हयोनके पर पश्रीवड़ितप्रा विप्रापस आ गयश्री। 5. वचवकत्सककीय परश्रीकण रम पश्रीवड़ितप्रा कके शरश्रीर पर बल पययोग कप्रा कयोई वचह्न नहहीं पप्रायप्रा गयप्रा। 6. धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस० कके अतिंतगरत वदयके गयके अपनके बयप्रान रम पश्रीवड़ितप्रा नके कहप्रा वक लगभग 1 विरर पसूविर उसकके घरविप्रालधों नके उसककी शप्रादश्री पप्रारर्थी कके सप्रार तय कर दश्री रश्री तरप्रा तब सके उन दयोनधों कके बश्रीच बप्रातचश्रीत हयोनके लगश्री वकन्तसु रप्राह अक्रसूबर 2024 रम उसकके घरविप्रालधों नके पप्रारर्थी सके शप्रादश्री करनके कके धलए रनप्रा कर वदयप्रा और कहप्रा वक अब वकसश्री और सके शप्रादश्री हयोगश्री। पश्रीवड़ितप्रा नके कहप्रा वक विह वकसश्री और सके शप्रादश्री नहहीं करकेगश्री और उसनके स्वियतिं हश्री पप्रारर्थी कयो बसुलप्रायप्रा तरप्रा उसकके सप्रार पतिंजप्राब जप्राकर विहप्राहाँ शप्रादश्री कर लश्री। पश्रीवड़ितप्रा नके कहप्रा वक विह 4 रप्राह ककी गभरवितश्री हहै और विह अपनके पवत (पप्रारर्थी) कके सप्रार रहनप्रा चप्राहतश्री हहै। 7. शहैवकक अवभलकेखधों कके अनसुसप्रार पश्रीवड़ितप्रा ककी जन्रवतधर 10.07.2007 हहै। 8. पप्राररनप्रा पत कके सप्रार पस्तसुत शपर पत रम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी 22 विरर्थीय वनदर्दोर नवियसुविक हहै तरप्रा उसकप्रा कयोई पसूविर आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै। 9. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा-पत कप्रा वविरयोधि करतके हहए कहप्रा वक वविविकेचनप्रा रम आरयोपधों ककी पसुवष्टि हहई हहै और आरयोप-पत वदनप्रातिंक 23.02.2025 कयो पस्तसुत वकयप्रा गयप्रा तरप्रा वदनप्रातिंक 04.03.2025 कयो वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय नके अपरप्राधि सतिंजप्रान लके धलयप्रा हहै। 10. वशकप्रायतकतप्रार / पश्रीवड़ितप्रा कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके शश्री वविजयतिंत वनगर नके कहप्रा वक उनकयो पप्राररनप्रा-पत कप्रा वविरयोधि करनके कके धलए अनसुदकेश पप्राप्त नहहीं हहआ हहै तरप्रा उन्हधोंनके कहप्रा वक चसूतिंवक पश्रीवड़ितप्रा नके पप्रारर्थी सके वविविप्राह कर धलयप्रा हहै इसधलए अब पश्रीवड़ितप्रा तरप्रा वशकप्रायतकतप्रार दयोनधों हश्री जरप्रानत कप्रा वविरयोधि नहहीं करनप्रा चप्राहतके हल। 11. उपरयोक तथ्यधों कयो दृवष्टिगत रखतके हहए, न्यप्रायप्रालय कप्रा रत हहै वक पप्रारर्थी जरप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै। 12. तद्नसुसप्रार, जरप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै। 13. आविकेदक जयोत पकप्राश कयो वनमनधलधखत शतर्दोतिं कके अधिश्रीन सतिंबतिंधधित रधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी सतिंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बतिंधिपत और सरप्रान रप्रावश ककी दयो जरप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरयोक रप्रारलके रम जरप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभययोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभययोजन पक कके गविप्राहधों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल कयोरर दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपमस्रत हयोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 3.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench