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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 131055 (ALL)
Deep Chandra @ Deepu v. State of U.P. through Secretary Home Department
BAIL/2651/2025 · 2025-04-03
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 131055 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:18462 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2651 of 2025 Applicant :- Deep Chandra @ Deepu Opposite Party :- State Of U.P. Through Secretary Home Department Counsel for Applicant :- Devendra Pratap,Shashank Shekhar Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री शशप्राशांक शकेखर धसशांह तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री रप्राजश्रीवि कक मप्रार विमप्रार्मा कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा सशांवहतप्रा कके अशांतगर्मात पस्तकत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि सशांख्यप्रा 59 सन 2025 अशांतगर्मात धिप्रारप्रा 85, 108, 115(2), 351(2) बश्री०एन०एस० रप्रानप्रा ककोतविप्रालश्री जनपद उनप्रावि मम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हहै।
3. वदनप्राशांक 24.01.2025 कको पप्रारर्थी तरप्रा दश्रीपप्रा वतविकेदश्री कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर्मा मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहप्रा वक उसनके अपनश्री पकतश्री सकोनश्री कप्रा वविविप्राह पप्रारर्थी कके सप्रार वकयप्रा रप्रा और उस वविविप्राह सके एक पकत कप्रा जन्म हहआ, धजसककी आयक लगभग 9 विरर्मा हहै। पप्रारर्थी नके सह-अवभयककप्रा दश्रीपप्रा वतविकेदश्री कके सप्रार ककोरर्मा महैररज कर धलयप्रा। वशकप्रायतकतर्थी कको उसककी पकतश्री नके बतप्रायप्रा रप्रा वक पप्रारर्थी कको सह -अवभयककप्रा दश्रीपप्रा वतविकेदश्री सके भश्री एक पकत हहै तरप्रा उसनके अवभयककगण कके कई फकोरको भश्री वशकप्रायतकतर्थी कको वदखप्राई हहै तरप्रा कहप्रा रप्रा वक इस कप्रारण सके पप्रारर्थी वशकप्रायतकतर्थी ककी पकतश्री कके सप्रार कसू रतप्रापसूविर्माक व्यविहप्रार करतप्रा रप्रा। वदनप्राशांक 21.01.2025 कको अवभयककगण नके वशकप्रायतकतर्थी ककी पकतश्री कको पतप्रावड़ित वकयप्रा और इससके ककब्धि हकोकर उसनके आत्महत्यप्रा कर लश्री।
4. शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम शवि कके गलके कके चप्राररों तरफ लरकनके कप्रा वचह्न पप्रायप्रा गयप्रा और ममृत्यक कप्रा कप्रारण लरकनके कके कप्रारण दम घकरनप्रा बतप्रायप्रा गयप्रा।
5. पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तकत शपर पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोर हहै तरप्रा उसकप्रा ककोई पसूविर्मा आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै।
6. एक पसूरक शपर-पत कके मप्राध्यम सके पशांचप्रायतनप्रामप्रा तरप्रा वविविकेचनप्रा कके ददौरप्रान अशांवकत बयप्रानरों ककी पवतयप्रायाँ अवभलकेख पर लप्राई गई हह। वविविकेचनप्रा कके ददौरप्रान दसूसरश्री नप्रावमत अवभयककप्रा दश्रीपप्रा वतविकेदश्री कके असस्तत्वि ककी पकवष्टि नहहीं हको पप्रायश्री हहै तरप्रा वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हकोकर मप्रात पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आरकोप-पत पस्तकत हहआ हहै।
7.
वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा -पत कप्रा वविरकोधि करतके हहए कहप्रा वक वविविकेचनप्रा मम पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आरकोपरों ककी पकवष्टि हहई हहै और उसकके वविरुद्ध आरकोप -पत वदनप्राशांक 23.03.2025 कको पस्तकत हहआ हहै। वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके उनकको पप्राप्त अनकदकेशरों कके आधिप्रार पर कहप्रा वक एक फकोन नशांबर सके पप्रारर्थी ककी बप्रात हकोनप्रा वविविकेचनप्रा मम पप्रायप्रा गयप्रा वकन्तक विह फकोन नशांबर गजब धसशांह पकत सकघर धसशांह कके नप्राम पर हहै।
8. उपरकोक तथ्यरों कको दृवष्टिगत रखतके हहए, जबवक कधरत सह-अवभयककप्रा दश्रीपप्रा कके सप्रार अविहैधि सशांबशांधिरों कके कप्रारण दकोनरों अवभयककगण दप्रारप्रा ममृतकप्रा कको पतप्रावड़ित करनके कके कप्रारण आत्महत्यप्रा हकोनप्रा कहप्रा गयप्रा जबवक सह -अवभयककप्रा कप्रा असस्तत्वि हश्री वविविकेचनप्रा मम धसद्ध नहहीं हको सकप्रा; शवि पर लरकनके कके अवतररक अन्य वकसश्री चकोर कके वनशप्रान नहहीं पप्रायके गयके; पप्रारर्थी कप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै ; वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हको चकककी हहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै।
9. तद्नकसप्रार, जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै।
10. आविकेदक दश्रीप चन्द्र उफर्मा दश्रीपसू कको वनम्नधलधखत शतर्दोशां कके अधिश्रीन सशांबशांधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी सशांतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बशांधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके गविप्राहरों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर्मा दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 3.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench