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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 130956 (ALL)

MANVENDRA PRATAP SINGH v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. DEPTT. HOME LKO. AND 3 OTHERS

BAIL/2665/2025 · 2025-04-03

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:18564 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2665 of 2025 Applicant :- Manvendra Pratap Singh Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Deptt. Home Lko. And 3 Others Counsel for Applicant :- J.B. Singh Counsel for Opposite Party :- G.A.,Dharmendra Kumar Trivedi Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री जके. बश्री. धससिंह, वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री अरवविन्द कक मप्रार पप्राण्डकेय तरप्रा वशकप्रायतकतप्रार्ता कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री धिमरन्द वत्रिविकेदश्री कको सकनप्रा तरप्रा पत्रिप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगर्तात पस्तकत इस पप्रारर्तानप्रा-पत्रि दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 0238 सन 2024 अन्तगर्तात धिप्रारप्रा 87, 137(2), 351(2), 352, 64 बश्री०एन०एस० वि धिप्रारप्रा 5/6 ललवगक अपरप्राधिधों सके बप्रालकधों कप्रा ससिंरकण अधधिवनयम रप्रानप्रा जगतपकर धजलप्रा रप्रायबरकेलश्री मम जमप्रानत ककी पप्रारर्तानप्रा ककी हहै। 3. वदनप्रासिंक 05.10.2024 कको पप्रारर्थी, वशविप्रा तरप्रा उनकके मप्रातप्रा-वपतप्रा एविसिं भप्राई- बहनधों कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर्ता मम कहप्रा गयप्रा हहै वक वदनप्रासिंक 01.10.2024 कको दकोनधों नप्रावमत अवभयककगण वशकप्रायतकतप्रार्ता ककी 17 विरर्थीय पकत्रिश्री कको बहलप्रा फक सलप्राकर अपनके सप्रार भगप्रा लके गयके। 4. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके असिंतगर्तात असिंवकत करप्रायके गयके अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके कहप्रा वक विह पप्रारर्थी कको 5 विरर्ता सके जप्रानतश्री हहै तरप्रा तभश्री सके उससके बप्रात करतश्री रहश्री हहै। इस बप्रात कको लकेकर उसकके पप्रापप्रा नके डप्रासिंरप्रा रप्रा तरप्रा उसककी अपनके पप्रापप्रा सके बहस हहई रश्री। यह बतप्राकर उसनके स्वियसिं हश्री पप्रारर्थी सके अपनके सप्रार लके चलनके कके धलए कहप्रा और उसकके सप्रार उनप्रावि जप्राकर वदनप्रासिंक 01.10.2024 सके वदनप्रासिंक 04.10.2024 तक एक गकेस्र हप्राउस मम रहश्री और इस बश्रीच शप्रारश्रीररक ससिंबसिंधि भश्री बनप्रायके। परम ससूचनप्रा ररपकोरर्ता ककी जप्रानकप्रारश्री हकोनके पर विप्रापस आ गयश्री। 5. धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस० कके असिंतगर्तात वदयके गयके अपनके बयप्रान मम भश्री पश्रीवड़ितप्रा नके अपनके वपछलके करन कको हश्री दकोहरप्रायप्रा हहै। 6. पप्रारर्तानप्रा-पत्रि कके सप्रार पस्तकत शपर मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोर हहै और उसकप्रा ककोई पसूविर्ता आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै। पसूरक शपर-पत्रि कके पस्तर 7 तरप्रा 8 मम दको अन्य आपरप्राधधिक पकरणधों मम पप्रारर्थी ककी ससिंधलप्ततप्रा दशप्रार्तायश्री गयश्री हहै 7. एक पसूरक शपर-पत्रि कके मप्राध्यम सके पश्रीवड़ितप्रा कके वचवकत्सककीय परश्रीकण ररपकोरर्ता ककी पवत अवभलकेख पर लप्राई गई हहै धजसमम असिंवकत हहै वक पश्रीवड़ितप्रा नके स्वियसिं हश्री आपसश्री सहमवत सके शप्रारश्रीररक ससिंबसिंधि बनप्रानके कप्रा करन वकयप्रा और पश्रीवड़ितप्रा कके शरश्रीर पर चकोर अरविप्रा बल पयकोग कप्रा ककोई वचह्न नहहीं पप्रायप्रा गयप्रा। 8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा तरप्रा वशकप्रायतकतप्रार्ता कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके पप्रारर्तानप्रा-पत्रि कप्रा वविरकोधि करतके हहए कहप्रा वक पश्रीवड़ितप्रा नप्राबप्राधलक हहै ,वविविकेचनप्रा मम आरकोपधों ककी पकवष्टि हहई हहै ; वविविकेचनप्रा कके उपरप्रान्त आरकोप -पत्रि वदनप्रासिंक 14.12.2024 कको पस्तकत हको चककप्रा हहै। 9. उपरकोक तथ्यधों कको दृवष्टिगत रखतके हहए , जबवक पश्रीवड़ितप्रा नके अपनके वकसश्री भश्री बयप्रान मम पप्रारर्थी कके वविरुद्ध ककोई करन नहहीं वकयप्रा हहै; वविविकेचनप्रा पसूणर्ता हको चकककी हहै तरप्रा पप्रारर्थी वदनप्रासिंक 19.10.2024 सके कप्रारप्रागप्रार मम वनरुद्ध हहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै। 10. तद्नकसप्रार, जमप्रानत पप्रारर्तानप्रा-पत्रि स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै। 11. आविकेदक मप्रानविकेन्द पतप्राप धससिंह कको वनम्नधलधखत शतर्दोसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत्रि और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके गविप्राहधों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर्ता दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 3.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench