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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 130817 (ALL)

MANGU LAL v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO

BAIL/2657/2025 · 2025-04-01

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:17970 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2657 of 2025 Applicant :- Mangu Lal Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko Counsel for Applicant :- Sudhir Kumar Rai Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री ससुधिश्रीर कसु मप्रार रप्राय तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री रविश्री शश्रीविप्रास्तवि कको ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 439 ददं०प०सदं०/483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा सदंवहितप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तसुत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि सदंख्यप्रा 18 सन 2025, अन्तगरत धिप्रारप्रा 80(2), 85 बश्री०एन०एस एविदं 3/4 दहिकेज पवतषकेधि अधधिवनयम, रप्रानप्रा-भश्रीरप्रा, धजलप्रा- लखश्रीमपसुर खश्रीरश्री मम जमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हिहै। 3. वदनप्रादंक 13.01.2025 कको पप्रारर्थी सवहित सप्रात व्यवकययों कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर मम कहिप्रा गयप्रा हिहै ककी वशकप्रायतकतप्रार नके अपनश्री पसुतश्री कप्रा वविविप्राहि वदनप्रादंक 15.07.2024 कको पप्रारर्थी कके पसुत सहि -अवभयसुक मवहिपप्राल कके सप्रार वकयप्रा रप्रा। सभश्री अवभयसुकगण वशकप्रायतकतप्रार ककी पसुतश्री कको दहिकेज कके धलए पतप्रावड़ित करतके रके। वशकप्रायतकतप्रार ककी पसुतश्री 2 मप्राहि ककी गभरवितश्री रश्री ओर विहि मप्रायकके सके वदनप्रादंक 12.12.2024 कको सससुरप्राल गई रश्री तरप्रा वदनप्रादंक 13.12.2024 कको अवभयसुकगण नके हिश्री वशकप्रायतकतप्रार कको बतप्रायप्रा वक उसककी पसुतश्री ककी ममृत्यसु हिको गई हिहै। वशकप्रायतकतप्रार नके कहिप्रा ककी ममृत्यसु सदंवदग्धि हिहै। 4. शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम शवि कके गलके कके चप्रारयों ओर लरकनके कके वचन्हि पप्रायके गप्रायके धजसमम 2 सके.मश्री कप्रा ररक स्रप्रान रप्रा और ममृत्यसु कप्रा कप्रारण लरकनके कप्रा कप्रारण दम घसुरनप्रा बतप्रायप्रा गयप्रा हिहै। 5. वशकप्रायतकतप्रार नके अपनके बयप्रान मम परम ससूचनप्रा ररपकोरर कके करनयों कप्रा समररन वकयप्रा। वशकप्रायतकतप्रार ककी पत्नश्री (ममृतकप्रा ककी मप्रादं) नके अपनके बयप्रान मम कहिप्रा वक उसककी पसुतश्री चप्रार वदन मप्रायकके मम रुकनके कके बप्राद वदनप्रादंक 13.12.2024 कको विप्रापस ससुसरप्राल गई रश्री तरप्रा वदनप्रादंक 14.12.2024 कको पप्रारर्थी कके पसुत मवहिपप्राल नके फकोन सके उसककी पसुतश्री ककी ममृत्यसु ककी ससूचनप्रा दश्री। ममृतकप्रा ककी मप्रादं नके यहि नहिहीं कहिप्रा वक उन चप्रार वदनयों मम उसककी पसुतश्री नके वविपकश्रीगण दप्रारप्रा पतप्रावड़ित करनके कके बप्रारके मम बतप्रायप्रा। 6. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक वविविकेचनप्रा मम आरकोपयों ककी पसुवष्टि हिहई हिहै और पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आरकोप पत पस्तसुत वकयप्रा जप्रा चसुकप्रा हिहै। 7. पप्राररनप्रा पत कके सप्रार पस्तसुत शपर पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी एक 72 विषर्थीय वनदर्दोष व्यवक हिहै, धजसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। 8. उपरकोक तथ्ययों कके दृवष्टिगत, जब ककी घरनप्रा वदनप्रादंक 13.12.2024 कको हिहई तरप्रा परम ससूचनप्रा ररपकोरर वदनप्रादंक 13.1.2025 कको धलखप्राई गई; ममृतकप्रा ककी मप्रादं नके ममृत्यसु सके ठश्रीक पहिलके चप्रार वदन मप्रायकके मम रहिनके कके ददौरप्रान ममृतकप्रा दप्रारप्रा वकसश्री अवभयसुक दप्रारप्रा पतप्रावड़ित वकए जप्रानके ककी वशकप्रायत करनके कप्रा करन नहिहीं वकयप्रा हिहै ; पप्रारर्थी कके वविरुद्ध ककोई वविशकेष करन नहिहीं वकयप्रा गयप्रा हिहै तरप्रा पप्रारर्थी एक 72 विषर्थीय विमृद्ध व्यवक हिहै धजसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै एविदं विहि वदनप्रादंक 20.1.2025 सके कप्रारप्रागप्रार मम वनरुद्ध हिहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पर ररहिप्रा वकए जप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 9. तदनसुसप्रार, जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै। 10. आविकेदक मदंगसू लप्राल कको वनम्नधलधखत शतर्दोदं कके अधिश्रीन सदंबदंधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी सदंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बदंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके सप्रावकययों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयत ककी गई पत्यकेक वतधर पर उपसस्रत हिकोगप्रा। Order Date :- 1.4.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench