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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 130404 (ALL)
PRASHANT KUMAR SINGH v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.
BAIL/2590/2025 · 2025-04-01
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 130404 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:17966 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2590 of 2025 Applicant :- Prashant Kumar Singh Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Sudhir Kumar Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री ससुधिश्रीर कसु मप्रार तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री अंशसुमप्रान विमप्रार्मा कको ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 439 दअं०प०सअं०/483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा सअंवहितप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तसुत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि सअंख्यप्रा 540 सनन् 2024, अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 69, 351(3) बश्री०एन०एस, रप्रानप्रा-मअंवडियप्राअंवि, धजिलप्रा-लखनऊ मम जिमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हिहै।
3. वदनप्रानाँक 06.09.2024 कको धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर्मा मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहिप्रा वक कसु छ समय सके उसककी पप्रारर्थी सके दकोस्तश्री हिको गई रश्री तरप्रा शप्रादश्री करनके कप्रा विप्रादप्रा करकके पप्रारर्थी नके वशकप्रायतकतर्थी कके हिश्री घर मम उसकके सप्रार कई बप्रार शप्रारश्रीररक सअंबअंधि बनप्राए और इस ददौरप्रान अश्लश्रील विश्रीवडियको तरप्रा फकोरको बनप्रा धलयके। इसकके बप्राद जिब वशकप्रायतकतर्थी नके पप्रारर्थी कके ऊपर शप्रादश्री कप्रा दबप्रावि बनप्रायप्रा तको उसनके विश्रीवडियको और फकोरको विप्रायरल करनके ककी धिमककी दश्री तरप्रा ब्लहैकमकेल करतके हिहए बलप्रात्कप्रार वकयप्रा। वशकप्रायतकतर्थी नके यहि भश्री कहिप्रा वक वदनप्रानाँक 05.09.2024 कको पप्रारर्थी नके उसके बप्रादशप्राहि नगर मकेरटको स्रकेशन लखनऊ कके नश्रीचके बसुलप्रायप्रा, जिहिप्रानाँ मदौकप्रा पप्राकर वशकप्रायतकतर्थी नके स्वियअं हिश्री पप्रारर्थी कके फकोन सके आपधत्तिजिनक फकोरको और विश्रीवडियको वडिलश्रीर कर वदयके।
4. पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तसुत शपर पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हिहै।
5. वशकप्रायतकतर्थी नके अपनप्रा वचवकत्सककीय परश्रीकण करप्रानके सके अस्विश्रीकप्रार कर वदयप्रा एविअं वशकप्रायतकतर्थी नके स्वियअं हिश्री अपनश्री आयसु 25 विषर्मा हिकोनप्रा कहिप्रा हिहै।
6. पप्रारर्थी एक अन्य आपरप्राधधिक पकरण मम समममधलत हिहै, धजिसमम उसके जिमप्रानत पप्रारर्मानप्रा पत सअंख्यप्रा 4665 सनन् 2023 मम पप्राररत आदकेश वदनप्राअंक 10.07.2024 दप्रारप्रा जिमप्रानत वमल चसुककी हिहै।
7. एक पसूरक शपर पत कके मप्राध्यम सके एक अन्य आपरप्राधधिक पकरण मम पप्रारर्थी ककी सअंधलप्ततप्रा दशप्रार्माई गई हिहै, धजिसमम उसकको न्यप्रावयक मधजिस्रटकेर वदतश्रीय, लखनऊ दप्रारप्रा पप्राररत आदकेश वदनप्रानाँक 06.01.2020 दप्रारप्रा जिमप्रानत वमल चसुककी हिहै।
8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक वविविकेचनप्रा मम आरकोपपों ककी पसुवष्टि हिहई हिहै और वदनप्राअंक 23.10.2024 कको पप्रारर्थी कके वविरुद आरकोप पत पस्तसुत वकयप्रा जिप्रा चसुकप्रा हिहै।
9.
उपरकोक तथ्यपों कके दृवष्टिगत , जिबवक वशकप्रायतकतर्थी नके स्वियअं हिश्री अपनश्री आयसु 25 विषर्मा कहिश्री हिहै और उसनके कहिप्रा वक वबनप्रा शप्रादश्री कके उसनके पप्रारर्थी कके सप्रार शप्रारश्रीररक सअंबअंधि बनप्राए ; यद्यवप वशकप्रायतकतर्थी नके पप्रारर्थी दप्रारप्रा आपधत्तिजिनक फकोरको एविअं विश्रीवडियको बनप्रायप्रा जिप्रानप्रा कहिप्रा , वकन्तसु उसनके यहि भश्री कहिप्रा वक विहि फकोरको और विश्रीवडियको विहि स्वियअं हिश्री वडिलश्रीर कर चसुककी हिहै और अब इस सअंबअंधि मम ककोई सप्राक्ष्य उपलब्धि नहिहीं हिहै ; वशकप्रायतकतर्थी नके वचवकत्सककीय परश्रीकण सके इअंकप्रार कर वदयप्रा हिहै; वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हिको चसुककी हिहै और पप्रारर्थी वदनप्राअंक 07.09.2024 सके जिकेल मम वनरुद हिहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकए जिप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै।
10. तदनसुसप्रार, जिमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हिहै।
11. आविकेदक पशप्राअंत कसु मप्रार धसअंहि कको वनमनधलधखत शतर्दोअं कके अधिश्रीन सअंबअंधधित मधजिस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी सअंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बअंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जिमप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़छप्राड़ नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजिन पक कके सप्रावकयपों पर दबप्रावि नहिहीं डिप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयत ककी गई पत्यकेक वतधर पर उपमस्रत हिकोगप्रा। Order Date :- 1.4.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench