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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 130392 (ALL)
PHOOL CHAND v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO.
BAIL/2656/2025 · 2025-04-03
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 130392 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:18527 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2656 of 2025 Applicant :- Phool Chand Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko. Counsel for Applicant :- Santosh Kumar Srivastava Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री ससंततोष शश्रीविप्रास्तवि तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री रप्राजश्रीवि कक मप्रार विमप्रार्मा कतो सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगर्मात पस्तकत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 014 सन 2025 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 108 बश्री०एन०एस० रप्रानप्रा कटकप्रा धजलप्रा असंबकेडकरनगर मम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हिहै।
3. वदनप्रासंक 26.01.2025 कतो 19:35 बजके पप्रारर्थी तरप्रा एक अजप्रात व्यवक कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपतोटर्मा मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक वदनप्रासंक 25.01.2025 कतो सप्रायसं 3 बजके जब वशकप्रायतकतर्थी ककी 14 विषर्थीय पकतश्री घर पर अकके लश्री रश्री तरप्रा वशकप्रायतकतर्थी कक छ दसूरश्री पर खकेत सके सप्राग लकेनके गई रश्री , पप्रारर्थी पहिलके सके वशकप्रायतकतर्थी कके घर पर ममौजसूद रप्रा। वशकप्रायतकतर्थी ककी पकतश्री नके पप्रारर्थी कके फतोन सके वशकप्रायतकतर्थी कतो घबरप्रायश्री हिहई आविप्राज मम जल्दश्री घर आनके कतो कहिप्रा। वशकप्रायतकतर्थी घर पहिहहुँचनके हिश्री विप्रालश्री रश्री वक इसककी भनक लगतके हिश्री पप्रारर्थी वि एक अजप्रात व्यवक दतोननों विहिप्राहुँ सके बप्राहिर कतो भप्रागके। असंदर जप्रानके पर वशकप्रायतकतर्थी नके दकेखप्रा वक उसककी पकतश्री कके गलके मम ढश्रीलप्रा दकपटके कप्रा फसं दप्रा लगप्रा रप्रा और पहैर जमश्रीन सके सटप्रा रप्रा। पप्रारर्थी दतोबप्रारप्रा वशकप्रायतकतर्थी कके घर गयप्रा और उसककी पकतश्री कके गलके सके फसं दप्रा छक डप्रानके कतो कहिप्रा धजसकप्रा वशकप्रायतकतर्थी नके वविरतोधि वकयप्रा। ससूचनप्रा पर पकधलस ममौकके पर आयश्री और शवि कतो उतप्रारप्रा और पप्रारर्थी विहिप्राहुँ सके भप्राग गयप्रा।
4. शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम शवि कके गलके कके चप्रारनों ओर लटकनके कके वचह्न पप्रायप्रा गयप्रा और ममृत्यक कप्रा कप्रारण लटकनके कके कप्रारण दम घकटनप्रा बतप्रायप्रा गयप्रा।
5. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके असंतगर्मात वदयके गयके अपनके बयप्रान मम
वशकप्रायतकतर्थी नके परम ससूचनप्रा ररपतोटर्मा कके करननों कतो हिश्री दतोहिरप्रायप्रा और सप्रार हिश्री यहि कहिप्रा वक पप्रारर्थी नके हिश्री कक छ कहिप्रा हितोगप्रा धजससके उसककी पकतश्री नके यहि कदम उठप्रायप्रा।
6. पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तकत शपर पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हिहै तरप्रा उसकप्रा कतोई पसूविर्मा आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। पप्रारर्मानप्रा -पत कके सप्रार पस्तकत शपर-पत कके पस्तर 26 मम एक अन्य पकरण मम पप्रारर्थी ककी ससंधलप्ततप्रा दशप्रार्मायश्री गयश्री हिहै धजसमम उसकतो जमप्रानत वमल चकककी हिहै।
7.
एक पसूरक शपर-पत कके मप्राध्यम सके एक और मप्रामलके मम पप्रारर्थी ककी ससंधलप्ततप्रा कके बप्रारके मम यहि कहिप्रा गयप्रा हिहै वक वविविकेचनप्रा मम आरतोपनों ककी पकवष्टि न हितोनके कके कप्रारण वविविकेचक नके असंवतम आख्यप्रा पस्तकत कर दश्री।
8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा -पत कप्रा वविरतोधि वकयप्रा और उनकतो पप्राप्त अनकदकेशनों कके आधिप्रार पर यहि बतप्रायप्रा वक घटनप्रा कके वदन पप्रारर्थी तरप्रा पश्रीवडतप्रा ककी मप्राहुँ कके बश्रीच कई बप्रार मतोबप्राइल पर विप्रातप्रार्मालप्राप हिहई।
9. उपरतोक तथ्यनों कतो दृवष्टिगत रखतके हिहए, जबवक वशकप्रायतकतर्थी कके स्वियसं कके करन कके अनकसप्रार जब विहि घर मम गयश्री ततो उसककी पकतश्री कके गलके मम ढश्रीलप्रा दकपटप्रा कप्रा फसं दप्रा लगप्रा रप्रा और पहैर जमश्रीन सके सटप्रा रप्रा तरप्रा पप्रारर्थी नके उस फसं दके कतो हिटप्रानके ककी चकेष्टिप्रा ककी धजसकप्रा वशकप्रायतकतर्थी नके स्वियसं हिश्री वविरतोधि वकयप्रा ; पश्रीवडतप्रा कके शवि पर लटकनके कके वचह्न कके अवतररक कतोई अन्य चतोट कप्रा वचह्न नहिहीं पप्रायप्रा गयप्रा ; वशकप्रायतकतर्थी नके अपनके बयप्रान मम मप्रात यहि ससंदकेहि व्यवक वकयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी नके कक छ कहिप्रा हितोगप्रा धजससके पश्रीवडतप्रा नके यहि कदम उठप्रायप्रा तरप्रा पप्रारर्थी दप्रारप्रा पश्रीवडतप्रा कतो आत्महित्यप्रा कके धलए उकसप्रानके कके बप्रारके मम कतोई वविशकेष करन नहिहीं वकयप्रा तरप्रा पप्रारर्थी कप्रा कतोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै, पप्रारर्थी वदनप्रासंक 28.01.2025 सके कप्रारप्रागप्रार मम वनरुद्ध हिहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै।
10. तद्नकसप्रार, जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै।
11. आविकेदक फसू ल चन्द कतो वनम्नधलधखत शतर्दोसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजस्टटकेट/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दतो जमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरतोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा
जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयतोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेडछप्राड नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयतोजन पक कके गविप्राहिनों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक टटप्रायल कतोटर्मा दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हितोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 3.4.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench