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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 130273 (ALL)

ISLAM KHAN v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. GOVT. OF U.P. LKO. AND 5 OTHERS

BAIL/2562/2025 · 2025-03-26

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:17217 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2562 of 2025 Applicant :- Islam Khan Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Govt. Of U.P. Lko. And 5 Others Counsel for Applicant :- Mahendra Kumar Sharma Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री महकेन्द्र कक मप्रार शमप्रार्मा तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्रीमतश्री वशखप्रा धसन्हप्रा कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. पस्तकत पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 174 सन 2024 अन्तरर्मात धिप्रारप्रा 137(2), 87, 64, 351(3) भप्रारतश्रीय न्यप्राय ससंवहतप्रा तरप्रा ¾ पपॉक्सको एक्ट, रप्रानप्रा मल्हश्रीपकर, धजिलप्रा शप्राविस्तश्री मम जिमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हहै। 3. वदनप्रासंक 30.08.2024 कको धलखप्राई रई परम ससूचनप्रा ररपकोटर्मा मम वशकप्रायतकतप्रार्मा नके कहप्रा वक पप्रारर्थी उसककी 17 विरर्थीय बहन कको वदनप्रासंक 29.08.2024 कको समय 11 बजिके रप्रात मम बहलप्रा -फक सलप्राकर भरप्रा लके रयप्रा। 4. धिप्रारप्रा 180 बश्री.एन.एस.एस. कके असंतरर्मात असंवकत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके अपनश्री आयक 17 विरर्मा बतप्राई तरप्रा उसनके कहप्रा वक विह पप्रारर्थी सके लरभर दको महश्रीनके सके बप्रात करतश्री हहै, विह पप्रारर्थी कके बकलप्रानके पर उसकके सप्रार रई रश्री। पप्रारर्थी नके उसके लडसू धखलप्रायप्रा तरप्रा उसके बस सके लकेकर लखनऊ रयप्रा। विहप्रासं सके एक व्यवक सके फकोन मप्रासंरकर पश्रीवड़ितप्रा नके अपनके जिश्रीजिप्रा सके बप्रात ककी तको पप्रारर्थी स्वियसं हश्री लखनऊ सके विप्रापस लके आयप्रा। 5. वचवकत्सककीय परश्रीक्षण मम पश्रीवड़ितप्रा कके शरश्रीर पर वकसश्री पकप्रार ककी चकोट अरविप्रा बल पयकोर कप्रा वचन्ह्न नहहीं पप्रायप्रा रयप्रा। पहैरप्रालपॉधजिकल जिप्रासंच मम विश्रीयर्मा ककी पकवष्टि नहहीं हहई। 6. धिप्रारप्रा 183 बश्री.एन.एस.एस. कके असंतरर्मात असंवकत वकए रए अपनके बयप्रान मम भश्री पश्रीवड़ितप्रा नके यह कहप्रा वक लडसू खप्रानके कके बप्राद उसके हकोश नहहीं रप्रा, वकसं तक उसके इतनप्रा हकोश रप्रा वक पप्रारर्थी उसके बस सके लखनऊ लके रयप्रा रप्रा। पश्रीवड़ितप्रा नके पप्रारर्थी दप्रारप्रा खकेत मम बलप्रात्कप्रार करनके कप्रा करन भश्री वकयप्रा। 7. पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तकत शपर पत मम कहप्रा रयप्रा हहै वक पप्रारर्थी एक 20 विरर्थीय वनदर्दोर नवियकविक हहै तरप्रा उसकप्रा ककोई पसूविर्मा आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै। 8. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राप्त अनकदकेशशों कके आधिप्रार पर बतप्रायप्रा वक इस पप्रारर्मानप्रा-पत ककी ससूचनप्रा वशकप्रायतकतप्रार्मा कको पकधलस दप्रारप्रा वदनप्रासंक 22.03.2025 कको दश्री जिप्रा चकककी हहै , वकसं तक वशकप्रायतकतप्रार्मा ककी तरफ सके पप्रारर्मानप्रा-पत कप्रा वविरकोधि करनके कके धलए ककोई उपसस्रत नहहीं हहै। वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके जिमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत कप्रा वविरकोधि करतके हहए कहप्रा वक वविविकेचनप्रा कके ददौरप्रान आरकोपशों ककी पकवष्टि हहई हहै और आरकोप -पत वदनप्रासंक 19.09.2024 कको पस्तकत वकयप्रा जिप्रा चककप्रा हहै। 9. उपरकोक तथ्यशों कको दृवष्टिरत रखतके हहए जिबवक पश्रीवड़ितप्रा नके दको मप्राह सके पप्रारर्थी कके सप्रार ससंबसंधि हकोनप्रा तरप्रा स्वियसं पप्रारर्थी कके सप्रार जिप्रानप्रा कहप्रा हहै ;पश्रीवड़ितप्रा नके पप्रारसंभ मकेमसं बलप्रात्कप्रार कप्रा आरकोप नहहीं लरप्रायप्रा हहै तरप्रा वचवकत्सककीय परश्रीक्षण मम भश्री बलप्रात्कप्रार ककी पकवष्टि नहहीं हहै; बलप्रात्कप्रार कप्रा आरकोप बप्राद मम वदए रए अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके लरप्राएसं , पप्रारर्थी 20 विरर्थीय नवियकविक हहै तरप्रा पप्रारर्थी 01.09.2024 सके जिकेल मम हहै तरप्रा पप्रारर्थी कप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै एविसं वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हको चकककी हहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जिमप्रानत पर ररहप्रा वकए जिप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै। 10. तद्नकसप्रार, जिमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हहै। 11. आविकेदक इसलप्राम खप्रान कको वनम्नधलधखत शतर्दोसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजिस्टटकेट/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकरत बसंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जिमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जिमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जिप्राए: - ( ) i आविकेदक अवभयकोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहहीं करकेरप्रा; ( ) ii आविकेदक अवभयकोजिन पक्ष कके रविप्राहशों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेरप्रा; ( iii) आविकेदक टटप्रायल ककोटर्मा दप्रारप्रा तय ककी रई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हकोरप्रा। Order Date :- 26.3.2025/Sumit Digitally signed by :- SUMIT KAPOOR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench