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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 130243 (ALL)
LALIT KUMAR SINGH v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO AND 4 OTHERS
BAIL/2584/2025 · 2025-03-27
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 130243 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:17523 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2584 of 2025 Applicant :- Lalit Kumar Singh Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko And 4 Others Counsel for Applicant :- Girish Kumar Pande,Prashant Pandey Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री पशप्राशांत पप्राशांडकेय तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री अननुरप्राग विमप्रार्मा कको सनुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 439 दशां०प०सशां०/483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सनुरकप्रा सशांवहितप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तनुत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मनुकदमप्रा अपरप्राधि सशांख्यप्रा 342 सन 2024, अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 137(2),87,64 बश्री०एन०एस एविशां 3/4 पपॉक्सको एक्ट , रप्रानप्रा-आसश्रीविन,धजिलप्रा-उनप्रावि मम जिमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हिहै।
3. वदनप्रानाँक 18.11.2024 कको समय 00:52 बजिके धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोटर्मा मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहिप्रा वक वदनप्राशांक 17.11.2024 कको सप्राशांय 6 बजिके उसककी 17 विरर्थीय पनुतश्री कको पप्रारर्थी बहिलप्रा -फनु सलप्राकर भगप्रा लके गयप्रा रप्रा , धजिसके खकोजिकर वशकप्रायतकतर्थी स्वियशां हिश्री अपनके सप्रार रप्रानके लकेकर पहिहनाँच गयश्री रश्री।
4. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके अन्तगर्मात अशांवकत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके कहिप्रा वक विहि पप्रारर्थी सके प्यप्रार करतश्री हिहै उसककी मप्रानाँ और भप्राई उसककी शप्रादश्री पप्रारर्थी सके नहिहीं करप्रानप्रा चप्राहितके हिह तरप्रा विहि स्वियशां हिश्री घर सके वबनप्रा बतप्राए पप्रारर्थी कके क्लश्रीवनक पर सप्रायशां 5 बजिके चलश्री गई रश्री, जिहिप्रानाँ सके उसकके मप्रानाँ और भप्राई उसके लकेकर रप्रानके आ गए। पश्रीवड़ितप्रा नके कहिप्रा वक विहि पप्रारर्थी सके शप्रादश्री करनप्रा चप्राहितश्री हिहै एविशां उसश्री कके सप्रार रहिनप्रा चप्राहितश्री हिहै।
5. वचवकत्सककीय परश्रीकण मम पश्रीड़ितप्रा कके शरश्रीर पर वकसश्री भश्री पकप्रार ककी चकोट अरविप्रा बल पयकोग कप्रा ककोई वचन्हि नहिहीं पप्रायप्रा गयप्रा हिहै। पश्रीवड़ितप्रा ककी आयनु लगभग 17 विरर्मा बतप्राई गई हिहै।
6. धिप्रारप्रा 183 बश्री०एन०एस०एस कके अन्तगर्मात अशांवकत अपनके बयप्रान मम भश्री पश्रीवड़ितप्रा नके कहिप्रा वक विहि पप्रारर्थी कके दविप्राखप्रानके पर दविप्रा लकेनके गई रश्री, जिहिप्रानाँ पप्रारर्थी नके उसके अशांदर विप्रालके कमरके मम लके जिप्राकर गलत कप्राम वकयप्रा। विप्रापस घर आकर उसनके अपनके भप्राई कको सप्रारश्री बप्रातम बतप्राई। अवतररक बयप्राननों मम पश्रीवड़ितप्रा ककी मप्रानाँ एविशां भप्राई नके पश्रीवडड़ितप्रा कको खकोजिकर रप्रानके लप्रानके कप्रा करन वकयप्रा हिहै।
7. पश्रीवडड़ितप्रा कके मप्रानाँ और भप्राई नके दकोबप्रारप्रा सके अपनप्रा अवतररक करन अशांवकत करप्रायप्रा , धजिसमम उन लकोगनों नके कहिप्रा हिहै वक पश्रीवड़ितप्रा कको खकोजितके हिहए उन्हिम जिप्रानकप्रारश्री हिहई वक पप्रारर्थी नके उसकको
अपनके क्लश्रीवनक पर रखप्रा हिहै तरप्रा विके लकोग पश्रीवड़ितप्रा कको पप्रारर्थी कके क्लश्रीवनक सके लकेकर रप्रानके गए।
8.
पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तनुत शपर पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोर हिहै तरप्रा अन्य विप्राद मम पप्रारर्थी ककी सशांधलप्ततप्रा हिहै, जिको वक 05.12.2019 कको अपर मनुख्य न्यप्रावयक मधजिस्टटकेट, न्यप्रायप्रालय सशांख्यप्रा-2, लखनऊ दप्रारप्रा वनस्तप्राररत कर वदयप्रा गयप्रा हिहै , विप्राद कप्रा वविविरण अवभलकेख पर धलयप्रा जिप्रातप्रा हिहै। शपर पत मम यहि भश्री कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी न तको डपॉक्टर हिहै और न हिश्री कम्पप्राउशांडर और न हिश्री उसकप्रा ककोई दविप्राखप्रानप्रा और न हिश्री विहि वकसश्री दविप्राखप्रानके मम कप्राम करतप्रा हिहै।
9. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम नके पप्रारर्मानप्रा पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए कहिप्रा वक वविविकेचनप्रा मम पप्रारर्थी कके वविरुद्ध आरकोपनों ककी पनुवष्टि हिहई हिहै और वदनप्राशांक 08.12.2024 कको आरकोप पत पस्तनुत वकयप्रा जिप्रा चनुकप्रा हिहै तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके यहि भश्री ससूवचत वकयप्रा वक पप्रारर्मानप्रा पत ककी ससूचनप्रा वशकप्रायतकतर्थी कको पनुधलस कके मप्राध्यम सके दश्री जिप्रा चनुककी हिहै।
10.
उपरकोक तथ्यनों कके दृवष्टिगत , जिबवक पश्रीवड़ितप्रा वदनप्राशांक 17.11.2024 कको सप्रायशां 6 बजिके अपनके घर सके गई तरप्रा उसककी मप्रानाँ-वशकप्रायतकतर्थी नके खकोजिकर उसके अपनके सप्रार रप्रानके लकेकर आनप्रा कहिप्रा हिहै और परम ससूचनप्रा ररपकोटर्मा मप्रात 7 घशांटके बप्राद धलखप्राई; वशकप्रायतकतर्थी तरप्रा उसकके पनुत नके अपनके करननों मम परम ससूचनप्रा ररपकोटर्मा कके करननों कको हिश्री दकोहिरप्रायप्रा हिहै तरप्रा वशकप्रायतकतर्थी कके पनुत नके कहिप्रा वक पप्रारर्थी डपॉक्टरश्री कप्रा कप्राम करतप्रा हिहै , धजिसकप्रा क्लश्रीवनक आविप्रागकोझप्रा चचौरप्राहिके पर कक ष्णप्रा क्लश्रीवनक कके नप्राम सके हिहै ; पश्रीवड़ितप्रा नके धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस० कके अशांतगर्मात अशांवकत अपनके बयप्रान मम पप्रारर्थी सके प्यप्रार करनप्रा एविशां शप्रादश्री करनके ककी इच्छप्रा हिकोनप्रा कहिप्रा हिहै ओर यहिप्रा कहिप्रा वक उसककी मप्रानाँ और भप्राई उसककी इस इच्छप्रा कके वविरुद्ध हिह, धजिस कप्रारण विहि स्वियशां हिश्री पप्रारर्थी कके पप्रास गई रश्री , जिहिप्रानाँ सके उसककी मप्रानाँ और भप्राई उसके रप्रानके लके आए; वचवकत्सककीय परश्रीकण ररपकोटर्मा मम वकसश्री बल पयकोग कप्रा ककोई वचन्हि नहिहीं पप्रायप्रा गयप्रा हिहै तरप्रा उसकके उपरप्राशांत धिप्रारप्रा 183 कके अशांतगर्मात अशांवकत अपनके बयप्रान मम परम बप्रार पश्रीवडड़ितप्रा नके पप्रारर्थी दप्रारप्रा गलत कप्राम करनके कप्रा आरकोप लगप्रायप्रा, वकन्तनु उसनके स्वियशां हिश्री घर विप्रापस आनप्रा कहिप्रा, जिबवक उसककी मप्रानाँ एविशां भप्राई नके उसकको खकोजिकर लप्रानप्रा कहिप्रा हिहै। पप्रारर्थी कप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै, विहि वदनप्राशांक 19.11.2024 सके जिकेल मम हिहै और वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हिको चनुककी हिहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकए जिप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै।
11. तदननुसप्रार, जिमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हिहै।
12. आविकेदक लधलत कनु मप्रार धसशांहि कको वनम्नधलधखत शतर्दोशां कके अधिश्रीन सशांबशांधधित मधजिस्टटकेट/न्यप्रायप्रालय ककी सशांतनुवष्टि कके अननुसप्रार एक व्यवकगत बशांधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जिमप्रानतम पस्तनुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जिप्राए: -
(i) आविकेदक अवभयकोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजिन पक कके सप्रावकयनों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक वविचप्रारण न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा वनयत ककी गई पत्यकेक वतधर पर उपसस्रत हिकोगप्रा। Order Date :- 27.3.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench