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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 129613 (ALL)

MOHAMMAD VASI @ RANGILE @ WASEEM AHMAD v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO.

BAIL/2481/2025 · 2025-03-25

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:17099 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2481 of 2025 Applicant :- Mohammad Vasi @ Rangile @ Waseem Ahmad Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Sumit Kumar Counsel for Opposite Party :- G.A.,Dinesh Kumar Shukla Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1.शशिककायतकतर्ती ककी तरफ ससे अधधिवकका शश्री शदिनसेशि कक मकार शिकक्लका नसे वकाकलतनकामका प्रस्तकत शकयका, धजिससे अशभिलसेख पर धलयका जिकातका हहै। 2. प्रकारर्ती कसे शवदकान अधधिवकका शश्री सकशमत कक मकार , शवदकान अशतररक शिकासककीय अधधिवकका शश्री अमरश्रीशि वमकार्मा तरका शशिककायतकतर्ती कसे शवदकान अधधिवकका शश्री शदिनसेशि कक मकार शिकक्लका कको सकनका तरका पतकावलश्री कका अवलकोकन शकयका। 3. धिकारका 439 दिदं०प्र०सदं०/483 भिकारतश्रीय नकागररक सकरकका सदंशहतका (B.N.S.S.) मम प्रस्तकत इस प्रकारर्मानका-पत दकारका प्रकारर्ती नसे मककदिमका अपरकाधि सदंख्यका 2052 सन 2017, अन्तगर्मात धिकारका 376(D), 506 भिका०दि०शव०, रकानका जिरवल रकोड, धजिलका बहरकाइच मम जिमकानत ककी प्रकारर्मानका ककी हहै। 4. शदिनकानाँक 25.08.2017 कको प्रकारर्ती तरका मकोहम्मदि शिमश्री कसे शवरुद्ध धिकारका 156(3) दिदं०प्र०सदं० कसे अन्तगर्मात शदिनकादंक 17.07.2017 कको धलखकाई गई एक प्ररम ससूचनका ररपकोरर्मा मम यह कहका गयका हहै शक शदिनकानाँक 20.06.2017 कको शिकाम लगभिग 6:30 बजिसे जिब शशिककायतकतर्ती बकाजिकार ससे सकामकान लसेकर घर वकापस जिका रहश्री रश्री तको उसकसे घर ससे एक शकलकोमश्रीरर पहलसे अशभियककगण नसे शशिककायतकतर्ती कको पकड़ धलयका तरका पकास कसे कसे लसे कसे खसेत मम लसे जिकाकर दिकोननों अशभियकक नसे उसकसे सकार बलकात्ककार शकयका। 5. प्रकारर्ती नसे इस न्यकायकालय कसे समक ररर यकाशचकका सदंख्यका 23858(एम०बश्री०) सनन 2017 प्रस्तकत ककी रश्री , जिको शदिनकानाँक 06.10.2017 कको इस आदिसेशि कसे सकार शनस्तकाररत हको गई शक धिकारका 173(2) कसे अन्तगर्मात पकधलस आख्यका प्रस्तकत हकोनसे अरवका शवश्वसनश्रीय सकाक्ष्य प्रकाप्त हकोनसे तक प्रकारर्ती कको शगरफ्तकार नहहीं शकयका जिकाएगका। 6. धिकारका 161 दिदं०प्र०सदं० कसे अन्तगर्मात अदंशकत अपनसे बयकान मम शशिककायतकतर्ती नसे कहका शक पहलसे प्रकारर्ती उसकको ज़बरदिस्तश्री पकड़ कर कसे लसे कसे खसेत मम लसे गयका और बलकात्ककार शकयका तरका उसकसे बकादि सह -अशभियकक आए और उसनसे बलकात्ककार शकयका। पश्रीशड़तका नसे अपनश्री आयक 24 वरर्मा बतकाई। 7. शचशकत्सककीय परश्रीकण मम पश्रीशड़तका कसे शिरश्रीर पर ककोई चकोर यका बल प्रयकोग कका शचन्ह नहहीं शमलका। 8. पहैरकोललॉधजिकल परश्रीकण मम भिश्री ऐसका ककोई तथ्य प्रककाशि नहहीं आयका हहै जिको बलकात्ककार कसे करन ककी पकशष्टि करसे। 9. धिकारका 164 दिदं०प्र०सदं० कसे अन्तगर्मात अदंशकत अपनसे बयकान मम शशिककायतकतर्ती नसे दिकोननों अशभियकक दकारका एक सकार उसकको पकड़ कर लसे जिकानसे अरवका बकारश्री -बकारश्री ससे बलकात्ककार करनसे कका करन शकयका हहै। 10. प्रकारर्मानका पत कसे सकार प्रस्तकत शिपर पत मम कहका गयका हहै शक प्रकारर्ती शनदिर्दोर हहै। 11. शिपर पत कसे प्रस्तर 16 मम धिकारका 323, 336 दिदं०प्र०सदं० कसे एक अन्य अपरकाधि मम प्रकारर्ती ककी सदंधलप्ततका दिशिकार्माई गई हहै , धजिसमम उससे शवचकारण न्यकायकालय ससे जिमकानत शमल चकककी हहै। 12. शवपकश्रीगण कसे शवदकान अधधिवककाओदं नसे प्रकारर्मानका पत कका शवरकोधि करतसे हहए कहका शक कधरत अपरकाधि गदंभिश्रीर प्रकक शत कका हहै और प्रकारर्ती जिमकानत पर ररहका शकए जिकानसे कका अधधिककारश्री नहहीं हहै। शवदकान अपर शिकासककीय अधधिवकका नसे कहका शक शववसेचनका मम आरकोपनों ककी पकशष्टि हहई हहै और शदिनकानाँक 30.10.2017 कको आरकोप पत प्रस्तकत शकयका जिका चककका हहै। 13. उपरकोक तथ्यनों कसे दृशष्टिगत , जिबशक प्ररम ससूचनका ररपकोरर्मा तरका धिकारका 164 दिदं०प्र०सदं० कसे अन्तगर्मात अदंशकत अपनसे बयकान मम शशिककायतकतर्ती नसे दिकोननों अशभियककगण दकारका एक सकार उससे पकड़ कर लसे जिकानसे एवदं बकारश्री -बकारश्री ससे बलकात्ककार करनसे कका करन शकयका हहै तरका धिकारका 161 दिदं०प्र०सदं० कसे बयकान मम उसनसे कहका हहै शक पहलसे प्रकारर्ती नसे उससे पकड़ कर लसे जिकाकर बलकात्ककार शकयका तरका उसकसे बकादि सह-अशभियकक आयका; पश्रीशड़तका कसे बयकान कसे अशतररक अन्य ककोई ऐसश्री सकामगश्री नहहीं हहै जिको शक आरकोपनों कका समरर्मान करम तरका शववसेचनका पसूणर्मा हकोकर शदिनकानाँक 30.10.2017 कको आरकोप पत प्रस्तकत हको चककका हहै , न्यकायकालय कका मत हहै शक प्रकारर्ती जिमकानत पर ररहका शकए जिकानसे कका अधधिककारश्री हहै। 14. तदिनकसकार, जिमकानत प्रकारर्मानका-पत स्वश्रीककार शकयका जिकातका हहै। 15. आवसेदिक मकोहम्मदि वसश्री @ रदंगश्रीलसे @ वसश्रीम अहमदि कको शनम्नधलधखत शितर्दोदं कसे अधिश्रीन सदंबदंधधित मधजिस्रटसेर/न्यकायकालय ककी सदंतकशष्टि कसे अनकसकार एक व्यशकगत बदंधिपत और समकान रकाशशि ककी दिको जिमकानतम प्रस्तकत करनसे पर उपरकोक मकामलसे मम जिमकानत पर ररहका शकयका जिकाए: - (i) आवसेदिक अशभियकोजिन सकाक्ष्य कसे सकार छसेड़छकाड़ नहहीं करसेगका; (ii) आवसेदिक अशभियकोजिन पक कसे गवकाहनों पर दिबकाव नहहीं डकालसेगका; (iii) आवसेदिक रटकायल ककोरर्मा दकारका तय ककी गई प्रत्यसेक तकारश्रीख पर उपसस्रत हकोगका। Order Date :- 25.3.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench