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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 129255 (ALL)
BRIJESH SHARMA v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO
BAIL/2395/2025 · 2025-03-21
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 129255 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:16539 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2395 of 2025 Applicant :- Brijesh Sharma Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko Counsel for Applicant :- Ashok Kumar Singh,Harish Chandra Bansal Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री अशशोक कक मप्रार धससिंह तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री वदिविप्राकर धससिंह कशो सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलशोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससिंवहतप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तकत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदिमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 123 सन 2024, अन्तगरत धिप्रारप्रा 103(1), 61(2), 238 एविसिं 191 बश्री०एन०एस, रप्रानप्रा हसनगसिंज, धजलप्रा लखनऊ मम जमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै।
3. वदिनप्रासिंक 27.09.2024 कशो तश्रीन नप्रावमत व्यवकयय, धजसमम पप्रारर्थी समममधलत नहहीं हहै, तरप्रा एक अन्य व्यवक कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपशोरर मम यह कहप्रा गयप्रा हहै वक वशकप्रायतकतप्रार कप्रा छशोरप्रा भप्राई शकेरखप्रान वदिनप्रासिंक 14.09.2024 कशो लगभग 10-11 बजके वदिन मम घर सके वनकलप्रा तरप्रा विप्रापस नहहीं आयप्रा। वदिनप्रासिंक 16.09.2024 कशो उसककी गकमशकदिगश्री कके ससिंबसिंधि मम वशकप्रायतकतर्थी नके पप्राररनप्रा पत वदियप्रा रप्रा। वदिनप्रासिंक 23.09.2024 कशो शप्राम 6 बजके हसन गसिंज पकधलस दप्रारप्रा इसिंवदिरप्रा नगर ककेत कके कक करहैल जसिंगल मम नर -कसिं कप्राल ककी ससूचनप्रा वमलनके पर वशकप्रायतकतप्रार कक करहैल जसिंगल मम पहहहुँचप्रा। कसिं कप्राल कके पप्रास वशकप्रायतकतप्रार कके भप्राई कप्रा विशोरर पहचप्रान पत एविसिं कसिं कप्राल कके पहैर मम स्रश्रील ककी प्लकेर पडश्री रश्री जशो वक उसके पसूविर मम आई चशोर कके कप्रारण डडॉक्रर कके दप्रारप्रा डप्रालश्री गई रश्री , धजस आधिप्रार पर वशकप्रायतकतप्रार नके कसिं कप्राल ककी पहचप्रान अपनके भप्राई कके रूप मम वकयप्रा। वशकप्रायतकतप्रार नके कहप्रा वक उसकप्रा भप्राई शरप्राब पश्रीनके कप्रा आदिश्री रप्रा तरप्रा नप्रावमत अवभयककगण उसकके सप्रार नशप्रा करतके रके और उसश्री वविविप्रादि कके कप्रारण नप्रावमत अवभयककय नके उसककी हत्यप्रा ककी।
4. शवि वविच्छकेदिन आख्यप्रा मम कहप्रा गयप्रा हहै वक शवि कसिं कप्राल रूप मम पररविवतरत हशो रहप्रा रप्रा , हवड्डियय सके कडके उत्तक जकडके हहए रके, शवि मम ककीडके पड गए रके तरप्रा बदिबसू आ रहश्री रश्री। ममृत्यक कप्रा कप्रारण नहहीं जप्रानप्रा सकप्रा।
5.
वविविकेचक कशो वदिए गए अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतप्रार नके यह कहप्रा वक पप्रारर्थी ममृतक कप्रा दिशोस्त रप्रा तरप्रा ममृतक तरप्रा पप्रारर्थी अन्य लशोगय सके आधिप्रार -कप्राडर लकेकर अन्य व्यवकयय कके सप्रार वमलकर बबकय सके लशोन वदिलप्रानके वि दिककप्रानय सके फप्राईनमस करप्राकर सप्रामप्रान बकेचनके कप्रा कप्राम करतके रके। पहैसय कके वविविप्रादि कशो लकेकर अवभयककगण नके उसककी हत्यप्रा करकके शवि फम क वदियप्रा।
6. पप्राररनप्रा पत कके सप्रार पस्तकत शपर पत कके पस्तर 24 मम पप्राहुँच अन्य पकरणय मम पप्रारर्थी ककी ससिंधलप्ततप्रा दिशप्रारई गई हहै , धजसमम सके चप्रार मम उसके जमप्रानत वमल चकककी हहै और एक पकरण मम जमप्रानत पप्राररनप्रा पत लसिंवबत हहै।
7. पप्राररनप्रा पत कप्रा वविरशोधि करतके हहए वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके कहप्रा वक पप्रारर्थी कके पप्रास सके उसकप्रा मशोबप्राइल बरप्रामदि हहआ हहै , धजससके विह सह-अवभयकक मशोनसू सके बप्रात करतप्रा रप्रा।
8. उपरशोक तथ्यय कके दृवष्टिगत रखतके हहए जबवक शवि ककी पहचप्रान मप्रात उसकके पप्रास पडके विशोरर पररचय पत कके आधिप्रार पर हहई हहै तरप्रा डश्रीएनए परश्रीकण नहहीं वकयप्रा गयप्रा ; वशकप्रायत परम ससूचनप्रा ररपशोरर मम नप्रावमत नहहीं हहै तरप्रा वविविकेचनप्रा कके दिदौरप्रान वदिए गए बयप्रान मम वशकप्रायतकतप्रार नके मप्रात पकरण मम पप्रारर्थी ककी ससिंधलप्ततप्रा कप्रा शक जप्रावहर वकयप्रा हहै एविसिं इसकके अवतररक पप्रारर्थी कके वविरुद्ध परम-दृष्टियप्रा कशोई सप्राक्ष्य उपलब्धि नहहीं हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पर ररहप्रा वकए जप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै।
9. तदिनकसप्रार, जमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै।
10. आविकेदिक वब्रिजकेश शमप्रार कशो वनमनधलधखत शतरसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दिशो जमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरशोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदिक अवभयशोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेडछप्राड नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदिक अवभयशोजन पक कके गविप्राहय पर दिबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदिक रटप्रायल कशोरर दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपमस्रत हशोगप्रा। Order Date :- 21.3.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench