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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 129150 (ALL)

SONU JAISAWAL v. STATE OF U.P. THRU. ADDL. CHIEF SECY. HOME LKO AND 3 OTHERS

BAIL/2382/2025 · 2025-03-24

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:16772 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2382 of 2025 Applicant :- Sonu Jaisawal Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Addl. Chief Secy. Home Lko And 3 Others Counsel for Applicant :- Ram Singh Verma,Sharvan Kumar Bharti Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री रप्राम धससिंह विमप्रार्मा तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री रप्राजश्रीवि कक मप्रार विमप्रार्मा कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 439 दसिं०प०ससिं०/483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससिंवहतप्रा (B.N.S.S.) मम पस्तकत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 137 सन 2024, अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 137(2), 87, 65(1) बश्री०एन०एस० एविसिं 3/4 पपॉक्सको एक्ट, रप्रानप्रा- शश्रीदत्तगसिंज, धजलप्रा-बलरप्रामपकर मम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हहै। 3. वदनप्रासिंक 10.11.2024 कको समय 20:15 बजके धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोटर्मा मम कहप्रा गयप्रा हहै वक वशकप्रायतकतप्रार्मा ककी 16 विरर्थीय भतश्रीजश्री वदनप्रासिंक 10.11.2024 कको वदन मम 2 बजके घर सके कहहीं चलश्री गई। 4. धिप्रारप्रा 180 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगर्मात असिंवकत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके कहप्रा वक विह पप्रारर्थी कको एक महश्रीनके सके जप्रानतश्री रश्री और विह उससके फकोन सके बप्रात करतश्री रश्री। विह पप्रारर्थी कके सप्रार पहलके बस सके लखनऊ और वफर टटकेन सके हररदप्रार गई और इसकके पश्चप्रात दकेहरप्रादसून कके एक मसिंवदर मम उसनके शप्रादश्री कर लश्री और पप्रारर्थी कके सप्रार उसककी पत्नश्री कके तरह रहनके लगश्री। वदनप्रासिंक 23.11.2024 कको उसकके भप्राई कके सप्रार पकधलस उसकके घर आकर उसके लके आई। पश्रीवड़ितप्रा नके कहप्रा वक विह पप्रारर्थी कके सप्रार अपनश्री मजर्थी सके गई। वचवकत्सककीय परश्रीकण मम पश्रीवड़ितप्रा कके शरश्रीर पर चकोट अरविप्रा बल पयकोग कप्रा ककोई वचन्ह नहहीं वमलप्रा। पहैरकोलपॉजश्री जप्राजाँच मम भश्री ककोई ऐसप्रा तथ्य पकप्राश मम नहहीं आए जको आरकोपपों ककी पकवष्टि करके। धिप्रारप्रा 183 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगर्मात असिंवकत अपनके बयप्रान मम भश्री पश्रीवड़ितप्रा नके अपनके पसूविर्मा करन कको दकोहरप्रायप्रा। 5. पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तकत शपर पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोश हहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै। 6. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्रारर्मानप्रा पत कप्रा वविरकोधि वकयप्रा एविसिं उनकको पप्राप्त अनकदकेशपों कके आधिप्रार पर उन्हपोंनके न्यप्रायप्रालय कको बतप्रायप्रा वक पप्रारर्मानप्रा पत ककी ससूचनप्रा वशकप्रायतकतप्रार्मा/पश्रीवड़ितप्रा कको पकधलस दप्रारप्रा दश्री जप्रा चकककी हहै। आयक वनधिप्रार्मारण कके धलए पश्रीवड़ितप्रा ककी एक्स-रके जप्राजाँच हकोनके कप्रा तथ्य उनकको पदप्रान वकए गए अवभलकेखपों मम नहहीं हहै। 7. उपरकोक तथ्यपों कके दृवष्टिगत , जबवक पश्रीवड़ितप्रा नके लगप्रातप्रार यह कहप्रा हहै वक विह पप्रारर्थी कके सप्रार अपनश्री मजर्थी सके गई रश्री तरप्रा उसनके पप्रारर्थी कके वविरुद्ध ककोई भश्री आरकोप नहहीं लगप्रायप्रा हहै; यद्यवप पश्रीवड़ितप्रा नप्राबप्राधलक हहै, वकन्तक पप्रारर्थी भश्री एक नवि -यकविक हहै तरप्रा जब यकविप्राविय कके व्यवक पकेम ससिंबसिंधि मम हकोतके हहै तको यह नहहीं कहप्रा जप्रा सकतप्रा हहै वक वनशश्चत रूप सके उन्हम दसूसरके व्यवक कके बप्राधलग हकोनके अरविप्रा न हकोनके कप्रा जप्रान रहप्रा हको तरप्रा पप्रारर्थी कप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै एविसिं वविविकेचनप्रा पसूणर्मा हकोकर आरकोप पत वदनप्रासिंक 20.12.2024 कको पस्तकत वकयप्रा जप्रा चककप्रा हहै , जबवक पप्रारर्थी वदनप्राजाँक 28.11.2024 सके जकेल मम वनरुद्ध हहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पर ररहप्रा वकए जप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै। 8. तदनकसप्रार, जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै। 9. आविकेदक सकोनसू जप्रायसविप्राल कको वनम्नधलधखत शतर्दोसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित मधजस्टटकेट/न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके गविप्राहपों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक टटप्रायल ककोटर्मा दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपशस्रत हकोगप्रा। Order Date :- 24.3.2025 Himanshu Digitally signed by :- HIMANSHU SHUKLA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench