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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 129127 (ALL)
DEVENDRA KUMAR @ DEVANAND v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO.
BAIL/2327/2025 · 2025-03-19
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 129127 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:15956 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2327 of 2025 Applicant :- Devendra Kumar @ Devanand Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko. Counsel for Applicant :- Neeraj Singh Counsel for Opposite Party :- G.A.,Gulam Mustafa Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री नश्रीरज धससिंह , वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री अरवविन्द शश्रीविप्रास्तवि तरप्रा वशकप्रायतकतप्रार्ता कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री गगुलप्राम मगुस्तफप्रा कक सगुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सगुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगर्तात पस्तगुत इस पप्रारर्तानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मगुकदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 0268 सन 2024 अन्तगर्तात धिप्रारप्रा 191(2), 103(1), 115(2), 352, 351(3) भप्रारतश्रीय न्यप्राय ससिंवहतप्रा रप्रानप्रा आसश्रीविन धजलप्रा उनप्रावि मम जमप्रानत ककी पप्रारर्तानप्रा ककी हहै।
3. वदनप्रासिंक 22.09.2024 कक पप्रारर्थी, एक अन्य तरप्रा अजप्रात व्यवक कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकरर्ता मम कहप्रा गयप्रा वक पसूविर्ता मम दजर्ता करप्रायके गयके अवभयकग मम जबरन सगुलह - समझझौतप्रा करनके कप्रा दबप्रावि बनप्रानके तरप्रा समझझौतप्रा करनके सके मनप्रा करनके पर नप्रारप्राज हककर अवभयगुकगण नके वदनप्रासिंक 21.09.2024 कक रप्रात 10 बजके वशकप्रायतकतप्रार्ता कके वपतप्रा कक गप्राधलयप्रायाँ दश्री, लप्राठश्री-डण्डके एविसिं लप्रात -घसूससों सके मप्रारप्रा धजससके उनकके शरश्रीर मम कप्राफकी चकरम आयश्री और उनकप्रा इलप्राज सप्रामगुदप्रावयक स्विप्रास्थ्य कके न्द्र मम चल रहप्रा रप्रा।
4. वशकप्रायतकतप्रार्ता नके धिप्रारप्रा 180 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सगुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगर्तात वदयके गयके बयप्रान मम परम ससूचनप्रा ररपकरर्ता कके करनसों कप्रा समरर्तान वकयप्रा वकन्तगु पश्रीवड़ित व्यवक नके अपनके बयप्रान मम कहप्रा वक जब विह अपनके ससगुरप्राल सके पहैदल घर जप्रा रहप्रा रप्रा तक रप्रास्तके मम अवभयगुकगण शरप्राब कके नशके मम आए और गप्रालश्री -गलझौज करतके हहए उससके मप्रार-पश्रीर करनके लगके और उसके धिक्कप्रा दके वदयप्रा, धजससके विह ससूखश्री नहर मम वगर गयप्रा और उसके बहहत जगह असिंदरूनश्री चकरम आयश्री। पश्रीवड़ित कक बप्राद मम इलप्राज कके धलए कप्रानपगुर रकेफर वकयप्रा गयप्रा जहप्रायाँ इलप्राज कके दझौरप्रान वदनप्रासिंक 28.09.2024 कक उसककी ममृत्यगु हक गयश्री।
5. ममृत्यगु पश्चप्रात परश्रीकण ररपकरर्ता मम पप्रारर्थी कके शरश्रीर पर ककई भश्री ममृत्यगु पसूविर्ता चकर कप्रा आनप्रा नहहीं बतप्रायप्रा गयप्रा तरप्रा ममृत्यगु कप्रा कप्रारण मकेरुदण्ड मम चकर कके कप्रारण हहआ आघप्रात एविसिं जवरलतप्राएयाँ बतप्रायश्री गयश्री।
6. वशकप्रायतकतप्रार्ता कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके पप्रारर्तानप्रा-पत कप्रा घकर वविरकधि करतके हहए कहप्रा वक पप्रारर्थी पसूविर्ता कके मगुकदमम मम सगुलह कप्रा दबप्रावि बनप्रानके तरप्रा सगुलह सके इसिंकप्रार करनके कके धलए वकयप्रा गयप्रा तरप्रा अपरप्राधि कप्रा कप्रारण अत्यन्त गसिंभश्रीर हहै।
7.
उपरकक तथ्यसों कक दृवष्टिगत रखतके हहए, जबवक पश्रीवड़ित व्यवक नके मप्रात शरप्राब कके नशके मम गप्रालश्री-गलझौज, मप्रारपश्रीर करनके एविसिं धिक्कप्रा दकेनके कप्रा करन वकयप्रा; पश्रीवड़ित ककी ममृत्यगु इलप्राज कके
दझौरप्रान लगभग एक सपप्राह कके बप्राद हहई तरप्रा पश्रीवड़ित कके शरश्रीर पर ककई भश्री जप्रावहरप्रा चकर नहहीं पप्रायश्री गयश्री एविसिं ममृत्यगु कप्रा कप्रारण मकेरुदण्ड मम चकर कके कप्रारण हहई जवरलतप्राओसिं कक बतप्रायप्रा गयप्रा; पप्रारर्थी वदनप्रासिंक 10.10.2024 सके कप्रारप्रागप्रार मम वनरुद्ध हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै।
8. तद्नगुसप्रार, जमप्रानत पप्रारर्तानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै।
9. आविकेदक दकेविकेन्द्र कगु मप्रार उफर्ता दकेविप्रानन्द कक वनम्नधलधखत शतरसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतगुवष्टि कके अनगुसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दक जमप्रानतम पस्तगुत करनके पर उपरकक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकजन पक कके गविप्राहसों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककरर्ता दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हकगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 19.3.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench