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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 129121 (ALL)

RAJAN v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO. AND 3 OTHERS

BAIL/2318/2025 · 2025-03-19

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:15866 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2318 of 2025 Applicant :- Rajan Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko. And 3 Others Counsel for Applicant :- Pradyumn Shukla Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री पदद्युम्न शद्युक्लप्रा तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम शश्री अमरश्रीश विमप्रार्मा कको सद्युनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सद्युरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगर्मात पस्तद्युत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मद्युकदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 0313 सन 2024 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 64, 87, 137(2) भप्रारतश्रीय न्यप्राय ससंवहितप्रा, धिप्रारप्रा 3/4 ललवगक अपरप्राधिधों सके बप्रालकधों कप्रा ससंरकण अधधिवनयम वि धिप्रारप्रा 3(2)(V) अनद्युससूवचित जप्रावत एविसं अनद्युससूवचित जनजप्रावत वनविप्रारण अधधिवनयम रप्रानप्रा फतकेहिपद्युर-84 धजलप्रा उनप्रावि मम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हिहै। 3. वदनप्रासंक 29.10.2024 कको धलखप्राई गई परम ससूचिनप्रा ररपकोरर्मा मम वशकप्रायतकतप्रार्मा नके यहि कहिप्रा वक उसककी पद्युतश्री वदनप्रासंक 26.10.2024 कको शप्राम 6 बजके शशौचि वक्रियप्रा कके धलए बप्राहिर गयश्री रश्री वकन्तद्यु विप्रापस नहिहीं लशौरश्री। पद्युधलस कप्रा दप्राविप्रा हिहै वक एक मद्युखवबर ककी ससूचिनप्रा कके आधिप्रार पर गद्युवडियप्रा कको हिफकीजप्राबप्राद वतरप्राहिके सके बरप्रामद वकयप्रा गयप्रा तरप्रा उसकके सप्रार खडप्रा लडकप्रा पद्युधलस विप्रालधों कको दकेखकर मशौकके सके भप्राग गयप्रा। बरप्रामदगश्री कके समय वशकप्रायतकतप्रार्मा भश्री मशौकके पर मशौजसूद रके। 4. धिप्रारप्रा 180 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सद्युरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगर्मात वदयके गयके अपनके बयप्रान मम पश्रीवडतप्रा नके कहिप्रा वक उसककी आयद्यु 17 विरर्मा हिहै। विहि 2 सप्राल सके पप्रारर्थी सके बप्रात करतश्री रश्री। इस बप्रात कप्रा पतप्रा चिलनके पर उसकके घर विप्रालधों नके उसके मप्रारप्रा तरप्रा पप्रारर्थी सके बप्रात करनके सके मनप्रा वकयप्रा। जब यहि बप्रात पश्रीवडतप्रा नके पप्रारर्थी कको बतप्रायश्री तको विहि उसके अपनके सप्रार कप्रानपद्युर लके गयप्रा और वदनप्रासंक 26.10.2024 कको मसंवदर मम शप्रादश्री कर लश्री। परम ससूचिनप्रा ररपकोरर्मा ककी जप्रानकप्रारश्री हिकोनके पर विहि दकोनधों विप्रापस आ गयके। 5. वचिवकत्सककीय परश्रीकण मम पश्रीवडतप्रा कके शरश्रीर पर वकसश्री पकप्रार कप्रा बल पयकोग कप्रा ककोई वचिह्न नहिहीं पप्रायप्रा गयप्रा। 6. धिप्रारप्रा 183 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सद्युरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगर्मात वदयके गयके अपनके बयप्रान मम पश्रीवडतप्रा नके अपनश्री मजर्थी सके पप्रारर्थी कके सप्रार जप्रानप्रा तरप्रा शप्रादश्री कर लकेनप्रा कहिप्रा तरप्रा यहि भश्री कहिप्रा वक विहि पप्रारर्थी कके सप्रार हिश्री रहिनप्रा चिप्राहितश्री हिहै। 7. पश्रीवडतप्रा ककी जन्मवतधर 26.11.2008 हिहै तरप्रा पप्रारर्थी कप्रा जन्म विरर्मा 2004 मम हिहआ रप्रा। 8. पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तद्युत शपर पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोर हिहै तरप्रा उसकप्रा ककोई पसूविर्मा आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। 9. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा परम नके उनकको पप्राप्त अनद्युदकेशधों कके आधिप्रार पर कहिप्रा वक पप्रारर्मानप्रा-पत ककी नकोवरस वशकप्रायतकतप्रार्मा / पश्रीवडतप्रा कको दश्री गयश्री हिहै वकन्तद्यु उनककी तरफ सके ककोई भश्री पप्रारर्मानप्रा-पत कप्रा वविरकोधि करनके कके धलए न्यप्रायप्रालय मम उपसस्रत नहिहीं हिहै। 10. उपरकोक तथ्यधों कको दृवष्टिगत रखतके हिहए, जबवक पप्रारर्थी तरप्रा पश्रीवडतप्रा दकोनधों हिश्री यद्युविप्रा आयद्यु कके हिल तरप्रा पश्रीवडतप्रा नके वविविकेचिक एविसं मधजस्रटकेर कके समक यहि कहिप्रा वक विहि पप्रारर्थी कके सप्रार अपनश्री मजर्थी सके गयश्री और उसनके शप्रादश्री कर लश्री हिहै ; पश्रीवडतप्रा नके बल पयकोग कप्रा ककोई आरकोप नहिहीं लगप्रायप्रा हिहै; वचिवकत्सककीय परश्रीकण मम भश्री ऐसप्रा ककोई तथ्य पकप्राश मम नहिहीं आयप्रा हिहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 11. तद्नद्युसप्रार, जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै। 12. आविकेदक रप्राजन कको वनम्नधलधखत शतर्दोसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतद्युवष्टि कके अनद्युसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतम पस्तद्युत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेडछप्राड नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके गविप्राहिधों पर दबप्रावि नहिहीं डिप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर्मा दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हिकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 19.3.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench