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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 129085 (ALL)
MOHD. WARIS v. STATE OF U.P. THRU. ADDL. CHIEF SECY. HOME DEPTT. LKO.
BAIL/2307/2025 · 2025-03-19
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 129085 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:15778 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2307 of 2025 Applicant :- Mohd. Waris Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Addl. Chief Secy. Home Deptt. Lko. Counsel for Applicant :- Pallavi Vatsala Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा ससुशश्री पल्लविश्री वित्सलप्रा तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री रप्राजश्रीवि कसु मप्रार विमप्रार्मा कको ससुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक ससुरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगर्मात पस्तसुत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 0833 सन 2024 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 80(2), 85 भप्रारतश्रीय न्यप्राय ससंवहितप्रा एविसं धिप्रारप्रा 3/4 दहिकेज पवतषकेधि अधधिवनयम रप्रानप्रा मकोहिम्मदश्री धजलप्रा खश्रीरश्री मम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हिहै।
3. वदनप्रासंक 21.12.2024 कको पप्रारर्थी, उसकके मप्रातप्रा-वपतप्रा तरप्रा 3 बहिननों कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर्मा मम यहि कहिप्रा गयप्रा हिहै वक वशकप्रायतकतप्रार्मा नके अपनश्री बहिन कप्रा वविविप्राहि पप्रारर्थी कके सप्रार वदनप्रासंक 04.03.2024 कको वकयप्रा रप्रा। सभश्री अवभयसुकगण वशकप्रायतकतप्रार्मा ककी बहिन कको दहिकेज कके धलए पतप्रावड़ित करतके रके। पप्रारर्थी ककी बहिन 7 मप्राहि ककी गभर्मावितश्री रश्री। वदनप्रासंक 14.02.2024 कको पप्रारर्थी अपनके सससुरप्राल सके अपनश्री पत्नश्री कको वविदप्रा करप्राकर लप्रायप्रा तरप्रा पश्रीवड़ितप्रा कप्रा गलप्रा दबप्राकर सभश्री अवभयसुकनों नके वशकप्रायतकतप्रार्मा ककी बहिन ककी हित्यप्रा कर दश्री।
4. पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तसुत शपर पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हिहै तरप्रा उसकप्रा ककोई पसूविर्मा आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै।
5. शवि वविच्छकेदन आख्यप्रा मम ममृतकप्रा कके गलके पर लरकनके कके वनशप्रान पप्रायके गयके , जको गलके कके दप्रावहिनश्री तरफ हिह। इसकके अवतररक ममृतकप्रा कके शरश्रीर पर अन्य ककोई चकोर कप्रा वनशप्रान नहिहीं रप्रा। ममृत्यसु कप्रा कप्रारण लरकनके सके दम घसुरनप्रा बतप्रायप्रा गयप्रा।
6. वविविकेचनप्रा कके ददौरप्रान एक वनष्पक गविप्राहि नके कहिप्रा वक ममृतकप्रा कके सप्रार पप्रारर्थी और उसकके मप्रातप्रा कप्रा झगड़िप्रा हिकोतप्रा रप्रा तरप्रा ममृतकप्रा नके इसश्री सके तसंग आकर फप्रासंसश्री लगप्रा लश्री वकन्तसु इसमम वकसश्री व्यवक ककी ककोई गलतश्री नहिहीं हिहै।
7. पप्रारर्थी ककी तरफ सके एक शपर-पत पस्तसुत करकके वशकप्रायतकतप्रार्मा दप्रारप्रा सत न्यप्रायप्राधिश्रीश कके समक वदयके गयके बयप्रान ककी पवत ससंलग्न ककी गयश्री हिहै , धजसमम वशकप्रायतकतप्रार्मा कको पकदकोहिश्री घकोवषत कर वदयप्रा गयप्रा हिहै।
8. पप्रारर्थी ककी बहिननों कको वविविकेचनप्रा कके ददौरप्रान दकोषश्री नहिहीं पप्रायप्रा गयप्रा रप्रा तरप्रा उसकके मप्रातप्रा - वपतप्रा कको जमप्रानत पप्राप्त हिको चसुककी हिहै , धजनकके जमप्रानत आदकेशनों ककी पवतयप्रायाँ पप्रारर्मानप्रा -पत कके सप्रार ससंलग्नक ससंख्यप्रा 11 कके रूप मम ससंलग्न हिह।
9.
उपरकोक तथ्यनों कको दृवष्टिगत रखतके हिहए , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै।
10. तद्नसुसप्रार, जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै।
11. आविकेदक मको० विप्राररश कको वनम्नधलधखत शतर्दोसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतम पस्तसुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके गविप्राहिनों पर दबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर्मा दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हिकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 19.3.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench