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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 128930 (ALL)

TEJ BAHADUR SAROJ v. STATE OF U.P. THRU. ADDL. CHIEF SECY. DEPTT. OF HOME U.P. LKO. AND 3 OTHERS

BAIL/2324/2025 · 2025-03-19

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:15936 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2324 of 2025 Applicant :- Tej Bahadur Saroj Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Addl. Chief Secy. Deptt. Of Home U.P. Lko. And 3 Others Counsel for Applicant :- Baljeet Singh Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री बलजश्रीत धससिंह तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री असिंशशुमप्रान विमप्रार्मा कको सशुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सशुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगर्मात पस्तशुत इस पप्रारर्मानप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मशुकदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 35 सन 2022 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 363, 366, 376 भप्रा०द०ववि० वि धिप्रारप्रा 5(n)/6 ललवगक अपरप्राधिधों सके बप्रालकधों कप्रा ससिंरकण अधधिवनयम रप्रानप्रा असिंतत धजलप्रा पतप्रापगढ़ मम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हहै। 3. वदनप्रासिंक 29.01.2022 कको धलखप्राई गई परम सतचनप्रा ररपकोरर्मा मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वशकप्रायतकतप्रार्मा ककी 16 विरर्थीय पशुतश्री कको भगप्रा लके गयप्रा। 4. धिप्रारप्रा 161 दसिं०प०ससिं० कके असिंतगर्मात वदयके गयके अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके स्वियसिं कको बप्राधलग हकोनप्रा कहप्रा हहै, उसनके कहप्रा वक पप्रारर्थी उसकप्रा ररश्तकेदप्रार हहै तरप्रा विह 2 सप्राल सके उसकके घर पर हश्री रह रहप्रा रप्रा। वकसश्री झगड़िके ककी विजह सके वशकप्रायतकतप्रार्मा नके उसके घर सके वनकप्राल वदयप्रा रप्रा। इसकके बप्राद पश्रीवड़ितप्रा उससके फकोन पर बप्रात करतश्री रश्री। पश्रीवड़ितप्रा नके स्वियसिं पप्रारर्थी कको बशुलप्राकर अपनके सप्रार लके जप्रानके कको कहप्रा तरप्रा पप्रारर्थी कके सप्रार जप्राकर डकेढ़ सप्राल तक उसककी पत्नश्री कके रूप मम रहश्री और उसश्री सके शप्रादश्री करनप्रा चप्राहतश्री हहै। 5. धिप्रारप्रा 164 कके असिंतगर्मात असिंवकत वकयके गयके अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके ऐसप्रा हश्री करन वकयप्रा तरप्रा उसनके पप्रारर्थी कके वविरुद्ध ककोई आरकोप नहहीं लगप्रायप्रा। पश्रीवड़ितप्रा नके यह कहप्रा वक विह खशुद गयश्री रश्री, सजप्रा उसके हश्री हकोनश्री चप्रावहए। 6. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके उनकको पप्राप्त अनशुदकेशधों कके आधिप्रार पर पप्रारर्मानप्रा -पत कप्रा वविरकोधि वकयप्रा और उन्हधोंनके यह कहप्रा वक पप्रारर्थी ररश्तके मम पश्रीवड़ितप्रा कप्रा मप्रामप्रा लगतप्रा हहै और उसकके दप्रारप्रा वकयप्रा गयप्रा अपरप्राधि गसिंभश्रीर पकक वत कप्रा हहै। वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके यह भश्री बतप्रायप्रा वक पप्रारर्मानप्रा-पत ककी नकोवरस वशकप्रायतकतप्रार्मा / पश्रीवड़ितप्रा कको पप्राप्त हको गयश्री हहै, वकन्तशु उनककी तरफ सके ककोई पप्रारर्मानप्रा-पत कप्रा वविरकोधि करनके कके धलए न्यप्रायप्रालय मम उपसस्रत नहहीं हहै। 7. पप्रारर्मानप्रा पत कके सप्रार पस्तशुत शपर पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोर हहै तरप्रा उसकप्रा ककोई पतविर्मा आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै। 8. पश्रीवड़ितप्रा कके उपरकोक बयप्रानधों कको दृवष्टिगत रखतके हहए , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जमप्रानत पर ररहप्रा वकयके जप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै। 9. तद्नशुसप्रार, जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हहै। 10. आविकेदक तकेज बहप्रादशुर सरकोज कको वनम्नधलधखत शतर्दोसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित मधजस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतशुवष्टि कके अनशुसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दको जमप्रानतम पस्तशुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जप्राए: - (i) आविकेदक अवभयकोजन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदक अवभयकोजन पक कके गविप्राहधों पर दबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल ककोरर्मा दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 19.3.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench