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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 128722 (ALL)

ANKAJ @ AJEET v. STATE OF U.P. THRU. SECY. HOME LKO. AND 3 OTHERS

BAIL/2323/2025 · 2025-03-19

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:15915 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2323 of 2025 Applicant :- Ankaj @ Ajeet Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Secy. Home Lko. And 3 Others Counsel for Applicant :- Narendra Gupta,Mohammad Salim Khan Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री नरकेन्द्र गगुपप्रा तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री वदिविप्राकर धससिंह कको सगुनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सगुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगरत पस्तगुत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मगुकदिमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 013 सन 2025 अन्तगरत धिप्रारप्रा 137(2), 87, 64 भप्रारतश्रीय न्यप्राय ससिंवहतप्रा वि धिप्रारप्रा 3/4 ललवगक अपरप्राधिधों सके बप्रालकधों कप्रा ससिंरकण अधधिवनयम रप्रानप्रा वपसप्राविप्रासिं धजिलप्रा सश्रीतप्रापगुर मम जिमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै। 3. उपरकोक परम ससूचनप्रा ररपकोरर वदिनप्रासिंक 17.01.2024 कको यह कहतके हहए धलखप्राई गई वक पप्रारर्थी वशकप्रायतकतप्रार ककी 19 विरर्थीय पगुतश्री कको बहलप्रा फगु सलप्राकर लके गयप्रा हहै। 4. धिप्रारप्रा 180 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सगुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगरत वदियके गयके अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके अपनश्री आयगु 18 विरर बतप्रायश्री तरप्रा यह कहप्रा वक विह पप्रारर्थी सके 2 विररसिं सके प्यप्रार करतश्री हहै। यह बतप्रानके पर उसकके घर विप्रालधों नके उसके बहहत परकेशप्रान वकयप्रा। इस कप्रारण विह अपनश्री मजिर्थी सके पप्रारर्थी कके सप्रार हरदिकोई चलश्री गई जिहप्राहाँ उन दिकोनधों नके वविविप्राह कर धलयप्रा। 5. पश्रीवड़ितप्रा कके वचवकत्सककीय परश्रीकण कके समय भश्री उसनके ऐसप्रा हश्री बयप्रान वदियप्रा। वचवकत्सककीय परश्रीकण मम चकोर अरविप्रा बल पयकोग कके सप्राक्ष्य नहहीं पप्रायके गयके। धिप्रारप्रा 183 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सगुरकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतगरत वदियके गयके अपनके बयप्रान मम भश्री पश्रीवड़ितप्रा नके ऐसप्रा हश्री करन वकयप्रा। 6. पप्राररनप्रा पत कके सप्रार पस्तगुत शपर पत मम कहप्रा गयप्रा हहै वक पप्रारर्थी नके न्यप्रावयक अवभरकप्रा मम वदियके गयके अपनके बयप्रान मम अपनश्री आयगु 19 विरर बतप्रायश्री हहै। 7. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार पस्तगुत शपर-पत मम कहप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदिरर हहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहहीं हहै। 8. उपरकोक तथ्यधों कको दृवष्टिगत रखतके हहए, जिबवक पप्रारर्थी तरप्रा पश्रीवड़ितप्रा दिकोनधों हश्री यगुविप्राविय कके व्यवक हल तरप्रा पश्रीवड़ितप्रा नके वविविकेचक तरप्रा मधजिस्रटकेर कके समक यह कहप्रा हहै वक विह पप्रारर्थी सके प्यप्रार करतश्री हहै तरप्रा उससके वविविप्राह कर धलयप्रा हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी जिमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै। 8. तद्नगुसप्रार, जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हहै। 9. आविकेदिक असिंकजि उफर अजिश्रीत कको वनम्नधलधखत शतरसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित मधजिस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतगुवष्टि कके अनगुसप्रार एक व्यवकगत बसिंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दिको जिमप्रानतम पस्तगुत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जिमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदिक अवभयकोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदिक अवभयकोजिन पक कके गविप्राहधों पर दिबप्रावि नहहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदिक रटप्रायल ककोरर दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपसस्रत हकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 19.3.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench