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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 128140 (ALL)
BADAM SINGH v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME LKO
NABAIL/240/2025 · 2025-03-20
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 128140 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:16058 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 240 of 2025 Applicant :- Badam Singh Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Lko Counsel for Applicant :- Vivek Kumar Rai,Ajai Kumar,Shakti Kumar Mishra Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री वविविकेक कक मप्रार रप्राय तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री रप्राजश्रीवि कक मप्रार विमप्रार्मा कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा।
2. धिप्रारप्रा 482 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससंवहितप्रा,2023 दप्रारप्रा पस्तकत पप्रारर्मानप्रा- पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 237 सन 2024 अन्तगर्मात धिप्रारप्रा 106(1) बश्री.एन.एस.(304-A भप्रा०द०ववि०), 105 बश्री.एन.एस.(304 भप्रा०द०ववि०), 34 रप्राषषश्रीय वचिवकत्सप्रा आयकोग अधधिवनयम , 2019 रप्रानप्रा हिरपप्रालपकर, धजलप्रा हिरदकोई मम अवग्रिम जमप्रानत ककी पप्रारर्मानप्रा ककी हिहै।
3. वदनप्रासंक 01.08.2024 कको 22.45 बजके धलखप्राई गई परम ससूचिनप्रा ररपकोरर्मा मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक वशकप्रायतकतर्थी वदनप्रासंक 01.08.2024 कको सकबहि 9 बजके अपनके पवत रप्राम औतप्रार कको पप्रारर्थी कके कलश्रीवनक लके गई रश्री। पप्रारर्थी नके रकोगश्री कको बकोतल लगप्रा दश्री, धजसकके बप्राद उसकके तबश्रीयत खरप्राब हिकोतश्री चिलश्री गई तरप्रा उसककी आसंखके फर गई। पप्रारर्थी नके रकोगश्री कको हिरपप्रालपकर सप्रामकदप्रावयक स्विप्रास्थ्य कके न्द्र लके जप्रानके कको कहिप्रा। हिरपप्रालपकर सप्रामकदप्रावयक स्विप्रास्थ्य कके न्द्र सके धजलप्रा
अस्पतप्राल हिरदकोई कके धलए रकेफर कर वदयप्रा गयप्रा तरप्रा धजलप्रा अस्पतप्राल कके मप्रागर्मा मम रकोगश्री ककी ममृत्यक हिको गई।
4. पप्रारर्मानप्रा-पत कके सप्रार पस्तकत शपर-पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हिहै एविसं उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै।
5. पप्रारर्मानप्रा-पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके कहिप्रा वक पप्रारर्थी कके वविरुद्ध गहैर जमप्रानतश्रीय विप्रारसंर वनगर्मात हिको चिककप्रा हिहै , वकसं तक विहि गहैर जमप्रानतश्रीय विप्रारसंर ककी वतधर नहिहीं बतप्रा सकके । ममृत्यक उपरप्रासंत परश्रीकण मम ममृत्यक कप्रा कप्रारण कप्रावरर्मायको रकेसस्परकेररश्री अरकेस्र बतप्रायप्रा गयप्रा हिहै। शवि ककी आसंखख कके वविषय मम उक ररपकोरर्मा मम ककोई करन नहिहीं वकयप्रा गयप्रा हिहै।
6. उपरकोक तथ्यख कको दृवषगत रखतके हिहए जब वशकप्रायतकतर्थी कके रकोगश्री पवत कको इलप्राज कके ददौरप्रान गसंभश्रीर दशप्रा मम पप्रानके पर पप्रारर्थी नके उसके सप्रामकदप्रावयक स्विप्रास्थ्य कके न्द्र कके धलए ससंदवभर्मात कर वदयप्रा रप्रा तरप्रा सप्रामकदप्रावयक स्विप्रास्थ्य कके न्द्र सके धजलप्रा अस्पतप्राल लके जप्रातके समय उसककी ममृत्यक हिको गई तरप्रा शवि परश्रीकण ररपकोरर्मा मम ऐसप्रा ककोई करन नहिहीं हिहै धजससके पप्रारर्थी दप्रारप्रा ककोई आपरप्राधधिक कमृ त्य हिकोनप्रा समधरर्मात हिको, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी अवग्रिम जमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै।
7. तद्नकसप्रार अवग्रिम जमप्रानत पप्रारर्मानप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातप्रा हिहै।
8.
उपरकोक मककदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा मम आविकेदक ककी वगरफ्तप्रारश्री/न्यप्रायप्रालय कके समक उपसस्रवत ककी दशप्रा मम , उसके ससंबसंधधित रप्रानके कके भप्रारसप्राधिक अधधिकप्रारश्री/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतकवष कके अनकसप्रार व्यवकगत बसंधि पत एविसं दको पवतभसू पस्तकत करनके पर परश्रीकण कके असंवतम रूप सके वनस्तप्रारण तक, वनम्न शतर्दोसं कके
अधिश्रीन अवग्रिम जमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राएगप्राग- क- आविकेदक, यवद आविश्यक हिकोगप्रा तको पकधलस अधधिकप्रारश्री दप्रारप्रा जजॉचि हिकेतक अपकेवकत समय पर उपसस्रत हिकोगप्रा। ख- आविकेदक मप्रामलके कके तथ्यख सके पररवचित वकसश्री व्यवक यप्रा पकधलस अधधिकप्राररयख कको पत्यक यप्रा परकोक रूप सके ककोई धिमककी , विप्रादप्रा यप्रा पलकोभन नहिहीं दकेगप्रा धजससके वक विहि ऐसके तथ्य कको न्यप्रायप्रालय कके समक यप्रा वकसश्री पकधलस अधधिकप्रारश्री कके समक पकर न करनके पर मप्रान जप्राए। ग- आविकेदक अदप्रालत ककी पसूविर्मा अनकमवत कके वबनप्रा भप्रारत नहिहीं छकोडकेगप्रा; घ- आविकेदक कको पत्यकेक वनधिप्रार्माररत वतधर पर रषप्रायल ककोरर्मा कके समक उपसस्रत हिकोनप्रा हिकोगप्रा, जब तक वक व्यवकगत उपसस्रवत सके छसू र न दश्री गयश्री हिको; ङ- आविकेदक अवभयकोजन पक कके गविप्राहि पर दबप्रावि नहिहीं रप्रालकेगप्रा / धिमककी नहिहीं दकेगप्रा। चि- आविकेदक वविविकेचिनप्रा एविसं वविचिप्रारण कके ददौरप्रान सहियकोग करमगके और जमप्रानत ककी स्वितसंततप्रा कप्रा दकरुपयकोग नहिहीं करकेगप्रा। Order Date :- 20.3.2025 Sumit Digitally signed by :- SUMIT KAPOOR High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench