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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 128072 (ALL)

RANJEET v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. OF LKO. AND ANOTHER

NABAIL/237/2025 · 2025-03-18

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:15697 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. ANTICIPATORY BAIL APPLICATION U/S 482 BNSS No. - 237 of 2025 Applicant :- Ranjeet Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Of Lko. And Another Counsel for Applicant :- Kaushal Kishore Tewari,Shakti Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री शवक वतिविप्रारश्री तिरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री आललोक कक मप्रार वतिविप्रारश्री कलो सकनप्रा तिरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविललोकन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 482 भप्रारतिश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससंवहितिप्रा दप्रारप्रा पस्तिकति पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 0233 सन 2024 अन्तिगरति धिप्रारप्रा 80, 85, 352, 351(2) भप्रारतिश्रीय न्यप्राय ससंवहितिप्रा और धिप्रारप्रा 3/4 दहिकेज पवतिषकेधि अधधिवनयम रप्रानप्रा वनघप्रासन धजलप्रा खश्रीरश्री मम अवग्रिम जमप्रानति ककी पप्राररनप्रा ककी हिहै। 3. वदनप्रासंक 26.08.2024 कलो पप्रारर्थी, उसकके मप्रातिप्रा-वपतिप्रा तिरप्रा बहिन कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपलोरर मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक वशकप्रायतिकतिप्रार ककी पकतश्री कप्रा वविविप्राहि 2 विषर पसूविर पप्रारर्थी कके सप्रार हिहआ रप्रा। सभश्री अवभयककगण वशकप्रायतिकतिप्रार ककी पकतश्री कलो दहिकेज कके धलए पतिप्रावड़िति करतिके रके। रकप्रा बसंधिन पर वशकप्रायतिकतिप्रार ककी पकतश्री अपनके मप्रायकके आयश्री रश्री। वदनप्रासंक 24.08.2024 कलो लगभग 3 बजके वदन मम वशकप्रायतिकतिप्रार ककी पकतश्री वशकप्रायतिकतिप्रार कके घर सके यहि कहितिके हिहए वनकलश्री वक विहि ससकरप्राल जप्राएगश्री और रप्रास्तिके मम पप्रारर्थी उसके वमल जप्राएगप्रा, वकन्तिक रप्राति 11 बजके सलोशल मश्रीवडियप्रा कके मप्राध्यम सके वशकप्रायतिकतिप्रार कलो जप्रानकप्रारश्री हिहई वक उसककी पकतश्री नके शप्रारदप्रा बहैरप्राज मम छलप्रासंग लगप्राकर अपनश्री जप्रान दके दश्री हिहै। 4. पप्राररनप्रा-पत कके सप्रार पस्तिकति शपर-पत मम कहिप्रा गयप्रा वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हिहै और उसकप्रा कलोई आपरप्राधधिक इवतिहिप्रास नहिहीं हिहै। 5. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके उनकलो पप्राप्त अनकदकेशशों कके आधिप्रार पर कहिप्रा वक पश्रीवड़ितिप्रा दप्रारप्रा बहैरप्राज सके नहिर मम कसू दनके ककी घरनप्रा सश्री.सश्री.रश्री.विश्री. कहै मरके मम ररककॉडिर हिहई हिहै। 6. उपरलोक तिथ्यशों कलो दृवष्टिगति रखतिके हिहए , जबवक पश्रीवड़ितिप्रा घरनप्रा कके कक छ वदन पसूविर सके वशकप्रायतिकतिप्रार कके हिश्री घर मम रहि रहिश्री रश्री और विहिहीं सके जप्राकर उसनके नहिर मम छलप्रासंग लगप्राकर आत्महित्यप्रा कर लश्री, घरनप्रा सश्री.सश्री.रश्री.विश्री. कहै मरके मम ररककॉडिर हिहई हिहै तिरप्रा उसमम पप्रारर्थी ककी उपसस्रवति नहिहीं पप्रायश्री गयश्री हिहै। पप्रारर्थी कप्रा कलोई आपरप्राधधिक इवतिहिप्रास नहिहीं हिहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मति हिहै वक पप्रारर्थी अवग्रिम जमप्रानति पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 7. तिद्नकसप्रार अवग्रिम जमप्रानति पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जप्रातिप्रा हिहै। 8. उपरलोक मककदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा मम आविकेदक ककी वगरफ्तिप्रारश्री /न्यप्रायप्रालय कके समक उपसस्रवति ककी दशप्रा मम , उसके ससंबसंधधिति रप्रानके कके भप्रारसप्राधिक अधधिकप्रारश्री /न्यप्रायप्रालय ककी ससंतिकवष्टि कके अनकसप्रार व्यवकगति बसंधि पत एविसं दलो पवतिभसू पस्तिकति करनके पर परश्रीकण कके असंवतिम रूप सके वनस्तिप्रारण तिक, वनम्न शतिर्दोसं कके अधिश्रीन अवग्रिम जमप्रानति पर ररहिप्रा वकयप्रा जप्राएगप्राग- (क)- आविकेदक, यवद आविश्यक हिलोगप्रा तिलो पकधलस अधधिकप्रारश्री दप्रारप्रा जकॉच हिकेतिक अपकेवकति समय पर उपसस्रति हिलोगप्रा; ख- आविकेदक मप्रामलके कके तिथ्यशों सके पररवचति वकसश्री व्यवक यप्रा पकधलस अधधिकप्राररयशों कलो पत्यक यप्रा परलोक रूप सके कलोई धिमककी , विप्रादप्रा यप्रा पललोभन नहिहीं दकेगप्रा धजससके वक विहि ऐसके तिथ्य कलो न्यप्रायप्रालय कके समक यप्रा वकसश्री पकधलस अधधिकप्रारश्री कके समक पकर न करनके पर मप्रान जप्राए; ग- आविकेदक अदप्रालति ककी पसूविर अनकमवति कके वबनप्रा भप्रारति नहिहीं छलोड़िकेगप्रा; घ- आविकेदक कलो पत्यकेक वनधिप्रारररति वतिधर पर रटप्रायल कलोरर कके समक उपसस्रति हिलोनप्रा हिलोगप्रा, जब तिक वक व्यवकगति उपसस्रवति सके छसू र न दश्री गयश्री हिलो; ङ- आविकेदक अवभयलोजन पक कके गविप्राहि पर दबप्रावि नहिहीं डिप्रालकेगप्रा / धिमककी नहिहीं दकेगप्रा; च- आविकेदक वविविकेचनप्रा एविसं वविचप्रारण कके ददौरप्रान सहियलोग करमगके और जमप्रानति ककी स्वितिसंततिप्रा कप्रा दकरुपयलोग नहिहीं करकेगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 18.3.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench