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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 127575 (ALL)

ANOOP v. STATE OF U.P. THRU. SECY. HOME LKO.

BAIL/2075/2025 · 2025-03-07

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:13949 Court No. - 29 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2075 of 2025 Applicant :- Anoop Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Secy. Home Lko. Counsel for Applicant :- Arjun Singh Somvanshi Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री अरररन धससिंह ससोमविसिंशश्री तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा शश्री ररनश्रीश कर मप्रार विमप्रार कसो सरनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा। 2. पस्तरत पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मरकदमप्रा अपरप्राधि ससिंख्यप्रा 142 सन 2024 अन्तररत धिप्रारप्रा 64(1) भप्रारतश्रीय न्यप्राय ससिंवहतप्रा रप्रानप्रा सविप्रायरपरर धरलप्रा हरदसोई मम रमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हहै। 3. उपरसोक परम ससूचनप्रा ररपसोरर वदनप्रासिंक 23.09.2024 कसो यह कहतके हहए धलखप्राई रई वक वशकप्रायतकतर्थी कप्रा पवत चप्रार मप्राह सके वदलश्री मम रहकर मरदसूरश्री करतप्रा हहै। वशकप्रायतकतर्थी कके पप्रासिंच बच्चके हह। पप्रारर्थी तरप्रा उसकके घर लरभर 2 विरर सके आनप्रा-रप्रानप्रा रप्रा तरप्रा वपछलके 6 मप्राह सके वशकप्रायतकतर्थी ककी इच्छप्रा कके वविरुद्ध पप्रारर्थी उसकके घर रबरदस्तश्री आकर उसके परकेशप्रान करतप्रा हहै। वदनप्रासिंक 19.09.2024 कसो पप्रारर्थी नके बलपसूविरक वशकप्रायतकतर्थी कसो घर सके खखींचकर पप्रास कके खकेत मम लके रप्राकर बलप्रात्कप्रार वकयप्रा। वशकप्रायतकतर्थी कके शसोर मचप्रानके पर उसकप्रा परत अवभरकेक ममौकके पर पहहहुँचप्रा तसो पप्रारर्थी ममौकके सके भप्रार रयप्रा। 4. धिप्रारप्रा 180 भप्रारतश्रीय नप्रारररक सररकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतररत असिंवकत अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतर्थी नके परम ससूचनप्रा ररपसोरर कके करननों कप्रा समररन वकयप्रा वकन्तर धिप्रारप्रा 183 भप्रारतश्रीय नप्रारररक सररकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतररत असिंवकत अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहप्रा वक पप्रारर्थी घरनप्रा विप्रालके वदन उसके 50 मश्रीरर दसूर खकेत मम घसश्रीरतके हहए लके रयप्रा तरप्रा यह घरनप्रा उसकके चवचयप्रा सप्रास -ससरर तरप्रा अन्य कई लसोरनों नके दकेखश्री रश्री एविसिं उसकप्रा बकेरप्रा अवभरकेक घर सके भप्रार रयप्रा तरप्रा उसके बचप्रानके कसोई नहखीं आयप्रा। 5. पप्राररनप्रा पत कके सप्रार पस्तरत शपर पत मम कहप्रा रयप्रा हहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोर हहै तरप्रा उसकप्रा कसोई पसूविर आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहखीं हहै। 6. वचवकत्सककीय परश्रीकण ररपसोरर मम यमौन अपरप्राधि कके ससिंबसिंधि मम कसोई वनशशचत वनष्करर नहखीं वनकप्रालप्रा रयप्रा हहै। 7. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके उनकसो पप्राप्त वनदरशनों कके आधिप्रार पर पप्राररनप्रा -पत कप्रा वविरसोधि वकयप्रा तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके कहप्रा वक पश्रीवड़ितप्रा ककी पप्रारसिंवभक वचवकत्सककीय परश्रीकण ररपसोरर न्यप्रायप्रालय कके समक पस्तरत ककी , धरसमम पश्रीवड़ितप्रा कके शरश्रीर पर वकसश्री पकप्रार ककी कसोई चसोर नहखीं पप्रायश्री रयश्री। 8. पश्रीवड़ितप्रा कके परत अवभरकेक नके अपनके बयप्रान मम कहप्रा वक घरनप्रा कके दमौरप्रान पश्रीवड़ितप्रा कके वचलप्रानके पर विह दमौड़िकर ममौकके पर पहहसिंचप्रा रप्रा तरप्रा उसके दकेखकर पप्रारर्थी विहप्राहुँ सके भप्रार रयप्रा रप्रा। 9. उपरसोक तथ्यनों कसो दृवष्टिरत रखतके हहए , रबवक परम ससूचनप्रा ररपसोरर तरप्रा धिप्रारप्रा 180 भप्रारतश्रीय नप्रारररक सररकप्रा ससिंवहतप्रा कके अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके अपनके परत कसो ममौकके पर आनप्रा कहप्रा हहै वकन्तर धिप्रारप्रा 183 भप्रारतश्रीय नप्रारररक सररकप्रा ससिंवहतप्रा कके असिंतररत अपनके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके अपनके बकेरके कसो घर सके भप्रार रप्रानप्रा कहप्रा हहै ; धिप्रारप्रा 183 भप्रारतश्रीय नप्रारररक सररकप्रा ससिंवहतप्रा कके बयप्रान मम पश्रीवड़ितप्रा नके अनकेक लसोरनों दप्रारप्रा घरनप्रा कसो दकेखप्रा रप्रानप्रा कहप्रा हहै वकन्तर उन व्यवकयनों नके अपनके बयप्रान मम बलप्रात्कप्रार कप्रा करन नहखीं वकयप्रा हहै ; वचवकत्सश्रीय परश्रीकण ररपसोरर उपरसोक करननों कप्रा समररन नहखीं करतश्री तरप्रा पप्रारर्थी कप्रा कसोई आपरप्राधधिक इवतहप्रास नहखीं हहै और विह वदनप्रासिंक 23.09.2024 सके कप्रारप्रारप्रार मम वनरुद्ध हहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हहै वक पप्रारर्थी रमप्रानत पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हहै। 10. तद्नरसप्रार, रमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा रप्रातप्रा हहै। 11. आविकेदक अनसूप कसो वनम्नधलधखत शतर्दोसिं कके अधिश्रीन ससिंबसिंधधित मधरस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससिंतरवष्टि कके अनरसप्रार एक व्यवकरत बसिंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दसो रमप्रानतम पस्तरत करनके पर उपरसोक मप्रामलके मम रमप्रानत पर ररहप्रा वकयप्रा रप्राए: - (i) आविकेदक अवभयसोरन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहखीं करकेरप्रा; (ii) आविकेदक अवभयसोरन पक कके रविप्राहनों पर दबप्रावि नहखीं डप्रालकेरप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल कसोरर दप्रारप्रा तय ककी रई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपशस्रत हसोरप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 7.3.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench