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Allahabad High Court · body
2025 DAILYLAW 127444 (ALL)
SACHIN SAROJ v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME DEPTT. LKO.
BAIL/2072/2025 · 2025-03-07
Subhash Vidyarthi
body2025
[ 2025 DAILYLAW 127444 (ALL) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:14161 Court No. - 29 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 2072 of 2025 Applicant :- Sachin Saroj Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home Deptt. Lko. Counsel for Applicant :- Kaushal Kishore Tewari,Shakti Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J.
1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री ककौशल वकशशोर वतिविप्रारश्री तिरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा ससुशश्री रवबियप्रा फप्रारूककी कशो ससुनप्रा तिरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा पररशश्रीलन वकयप्रा।
2. पस्तिसुति पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मसुकदमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 236 सन 2024 अन्तिररति धिप्रारप्रा 126(2), 103(1), 309(6), 317(2), 352 भप्रारतिश्रीय न्यप्राय ससंवहितिप्रा रप्रानप्रा हिधररविप्रासं धजिलप्रा पतिप्रापरढ़ मम जिमप्रानति ककी पप्राररनप्रा ककी हिहै।
3. वदनप्रासंक 13.11.2024 कशो समय 11:22 बिजिके धलखप्राई रई परम ससूचनप्रा ररपशोरर मम कहिप्रा रयप्रा हिहै वक वदनप्रासंक 12.11.2024 कशो रप्राति 11:30 बिजिके वशकप्रायतिकतिप्रार कके भप्रासंजिके पर अजप्राति लशोरगों नके अजप्राति लशोरगों नके हिमलप्रा वकयप्रा और पकेचकस उसकके पकेर पर मप्रारकर भप्रार रयके। विहिप्राहाँ कके लशोरगों कशो पतिप्रा चलनके पर डप्रायल 112 कशो ससूचनप्रा दश्री एविसं एसंबिसुलकेन्स कके दप्रारप्रा ककौवड़िहिप्रार अस्पतिप्राल जिप्रातिके समय रप्रास्तिके मम हिश्री पश्रीवड़िति ककी ममृत्यसु हिशो रयश्री।
4. ममृत्यशोपरप्रान्ति परश्रीक्षण ररपशोरर मम ममृतिक कके रलके कके सप्रामनके कसु छ फरप्रा हिहआ घप्रावि तिरप्रा पकेर मम एक भसुकप्रा हिहआ घप्रावि पप्रायप्रा रयप्रा। ममृत्यसु कप्रा कप्रारण असंदरूनश्री असंरगों मम अपघप्राति एविसं रक सप्रावि बितिप्रायप्रा रयप्रा हिहै।
5. वदनप्रासंक 24.11.2024 कशो एक मसुखवबिर सके पप्राप्त ससूचनप्रा कके आधिप्रार पर पसुधलस नके पप्रारर्थी तिरप्रा एक अन्य व्यवक ससुदश्रीप यप्रादवि कशो एक नहिर ककी पसुधलयप्रा सके वररफ्तिप्रार वकयप्रा। ससुदश्रीप यप्रादवि सके एक मशोबिप्राइल फशोन तिरप्रा पप्रारर्थी सके भश्री एक मशोबिप्राइल फशोन बिरप्रामद हिहआ। दशोनगों अवभयसुकगों नके अपनके बियप्रान मम कहिप्रा वक ममृतिक अपनके ऑरशो ररक्शप्रा मम बिहिहति तिकेजि रप्रानप्रा बिजिप्रा रहिप्रा रप्रा और ओविररकेक नहिहीं करनके दके रहिप्रा रप्रा और इस कप्रारण पप्रारर्थीरण तिरप्रा ममृतिक मम झरड़िप्रा हिहआ। ममृतिक आरशो चप्रालक नके अपनके विप्राहिन कके रसूल बिप्राक्स सके पकेचकस वनकप्रालप्रा धजिसके अवभयसुकरण नके छश्रीनकर आरशो चप्रालक कके पकेर मम भगोंक वदयप्रा।
6. पप्राररनप्रा पत कके सप्रार पस्तिसुति शपर पत मम कहिप्रा रयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी वनदर्दोष हिहै तिरप्रा उसकप्रा कशोई पसूविर आपरप्राधधिक इवतिहिप्रास नहिहीं हिहै।
7. वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके पप्राररनप्रा-पत कप्रा वविरशोधि करतिके हिहए कहिप्रा वक ममृतिक कप्रा मशोबिप्राइल फशोन तिरप्रा पशर पप्रारर्थी सके बिरप्रामद हिहआ हिहै। उन्हिगोंनके यहि भश्री कहिप्रा वक पप्रारर्थी वररशोहिबिन्द अधधिवनयम कके अन्य पकरण मम भश्री आरशोपश्री हिहै।
8.
पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा नके कहिप्रा वक वररशोहिबिन्द अधधिवनयम कप्रा पकरण पस्तिसुति पकरण कके आधिप्रार पर हिश्री पसंजिश्रीकमृ ति हिहआ हिहै।
9. उपरशोक तिथ्यगों कशो दृवष्टिरति रखतिके हिहए , जिबिवक परम ससूचनप्रा ररपशोरर घरनप्रा कके लरभर
12 घण्रके बिप्राद अजप्राति व्यवक कके वविरुद्ध धलखप्राई रई हिहै ; पप्रारर्थी तिरप्रा सहि -अवभयसुक कशो मसुखवबिर ककी ससूचनप्रा कके आधिप्रार पर घरनप्रा कके 12 वदन बिप्राद वररफ्तिप्रार वकयप्रा रयप्रा; अवभयसुकरण नके अवभरक्षप्रा मम वदयके रयके अपनके बियप्रान मम अपरप्राधि मम अपनश्री ससंधलप्ततिप्रा स्विश्रीकप्रार ककी वकन्तिसु उस बियप्रान मम भश्री यहि कहिप्रा वक ममृतिक नके पहिलके हिमलप्रा करनके कके धलए पकेचकस वनकप्रालप्रा रप्रा उसकके उपरप्रान्ति उसश्री पकेचकस सके ममृतिक पर विप्रार वकयप्रा रयप्रा, जिशो वक आत्मरक्षप्रा मम वकयप्रा रयप्रा कमृ त्य हिशोनप्रा भश्री ससंभवि हिहै तिरप्रा पप्रारर्थी कप्रा कशोई पसूविर आपरप्राधधिक इवतिहिप्रास नहिहीं हिहै, न्यप्रायप्रालय कप्रा मति हिहै वक पप्रारर्थी जिमप्रानति पप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै।
10. तिद्नसुसप्रार, जिमप्रानति पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातिप्रा हिहै।
11. आविकेदक सवचन सरशोजि कशो वनम्नधलधखति शतिर्दोसं कके अधिश्रीन ससंबिसंधधिति मधजिस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतिसुवष्टि कके अनसुसप्रार एक व्यवकरति बिसंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दशो जिमप्रानतिम पस्तिसुति करनके पर उपरशोक मप्रामलके मम जिमप्रानति पर ररहिप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदक अवभयशोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़िछप्राड़ि नहिहीं करकेरप्रा; (ii) आविकेदक अवभयशोजिन पक्ष कके रविप्राहिगों पर दबिप्रावि नहिहीं डप्रालकेरप्रा; (iii) आविकेदक रटप्रायल कशोरर दप्रारप्रा तिय ककी रई पत्यकेक तिप्रारश्रीख पर उपसस्रति हिशोरप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 7.3.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench