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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 123795 (ALL)

AYUSH VERMA @ JASSI v. STATE OF U.P. THRU. PRIN. SECY. HOME U.P. LUCKNOW

BAIL/1409/2025 · 2025-05-09

Subhash Vidyarthi

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:27496 Court No. - 15 Case :- CRIMINAL MISC. BAIL APPLICATION No. - 1409 of 2025 Applicant :- Ayush Verma @ Jassi Opposite Party :- State Of U.P. Thru. Prin. Secy. Home U.P. Lucknow Counsel for Applicant :- Dilip Kumar Pandey,Suresh Chand Rathour Counsel for Opposite Party :- G.A. Hon'ble Subhash Vidyarthi,J. 1. पप्रारर्थी कके वविदप्रान अधधिविकप्रा शश्री वदिलश्रीप कक मप्रार पप्राण्डकेय तरप्रा वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा कक मप्रारश्री वनवकतप्रा वमशप्रा कको सकनप्रा तरप्रा पतप्राविलश्री कप्रा अविलकोकन वकयप्रा। 2. धिप्रारप्रा 483 भप्रारतश्रीय नप्रागररक सकरकप्रा ससंवहितप्रा कके असंतगरत पस्तकत इस पप्राररनप्रा-पत दप्रारप्रा पप्रारर्थी नके मककदिमप्रा अपरप्राधि ससंख्यप्रा 352 सन 2024, अन्तगरत धिप्रारप्रा 103(2), 115(2), 190, 191(2), 191(3), 333, 352 बश्री०एन०एस०, रप्रानप्रा हिहैदिरप्राबप्रादि, धजिलप्रा लखश्रीमपकर खश्रीरश्री मम जिमप्रानत ककी पप्राररनप्रा ककी हिहै। 3. वदिनप्रासंक 14.12.2024 कको चप्रार नप्रावमत व्यवकयय, धजिसमम पप्रारर्थी समममधलत नहिहीं हिहै तरप्रा अजप्रात व्यवकयय कके वविरुद्ध धलखप्राई गई परम ससूचनप्रा ररपकोरर मम वशकप्रायतकतर्थी नके कहिप्रा वक अवभयककगण उक वतधर कको रप्रात 8:45 बजिके वशकप्रायतकतर्थी कके घर आए एविसं दिरविप्राजिप्रा तकोड़कर असंदिर घकसकर हिहॉककी, डसंडप्रा वि लकोहिके ककी रप्राड सके उसकके पवत कको मप्रारनके लगके जिब वशकप्रायतकतर्थी और उसककी सप्रास नके बचप्रानप्रा चप्राहिप्रा तको अवभयककगण नके उन्हिम भश्री मप्रारप्रा। वशकप्रायतकतर्थी कके पवत कको इलप्राजि कके धलए लके जिप्रातके समय उसककी ममृत्यक हिको गई। 4. शवि परश्रीकण आख्यप्रा मम ममृतक कके मप्रारके, सर तरप्रा सश्रीनके पर तश्रीन चकोरम पप्राई गई हिह तरप्रा उसककी पसधलयप्रासं रसूरश्री हिहई पप्राई गई हिह। ममृत्यक कप्रा कप्रारण ममृत्यक पसूविर चकोरय कके कप्रारण आघप्रात एविसं रकसप्रावि बतप्रायप्रा गयप्रा। 5. पप्राररनप्रा पत कके सप्रार पस्तकत शपर पत मम कहिप्रा गयप्रा हिहै वक पप्रारर्थी एक 18 विरर्थीय नवि- यकविक हिहै और उसकप्रा ककोई आपरप्राधधिक इवतहिप्रास नहिहीं हिहै। 6. धिप्रारप्रा 180 बश्री०एन०एस०एस कके असंतगरत असंवकत अपनके बयप्रान मम वशकप्रायतकतर्थी नके परम ससूचनप्रा ररपकोरर कके करनय कप्रा समररन वकयप्रा हिहै। 7. पप्राररनप्रा पत कप्रा वविरकोधि करतके हिहए उनकको पप्राप्त धलधखत अनकदिकेशय कके आधिप्रार पर वविदप्रान अपर शप्रासककीय अधधिविकप्रा नके कहिप्रा वक सभश्री अवभयककगण एक सप्रार पकड़के गए एविसं अवभरकप्रा मम वदिए अपनके बयप्रान मम पप्रारर्थी नके ममृतक कको लप्रात -घसूसय एविसं रप्पड़ सके मप्रारनप्रा स्विश्रीकप्रार वकयप्रा हिहै। उन्हियनके पप्राप्त अनकदिकेशय कके आधिप्रार पर कहिप्रा वक एक गविप्राहि पविश्रीन कक मप्रार विमप्रार नके कहिप्रा वक उसकके घर पर लगके सश्री .सश्री.रश्री.विश्री मम यहि ररकहॉडर हिहआ वक दिको विप्राहिनय मम अवभयककगण हिहरर बजिप्रातके हिहए आए रके और बप्रादि मम पतप्रा चलप्रा वक उन लकोगय नके यहि घरनप्रा कप्राररत ककी हिहै। 8. इस न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा दिको अन्य सहि -अवभयकक क्रमशशः अविनश्रीश कक मप्रार कको जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत ससंख्यप्रा 2378 सन 2025 दप्रारप्रा वदिनप्रासंक 24.03.2025 एविसं सहि- अवभयकक शहैलकेन्द्र कक मप्रार कको जिमप्रानत पप्राररनप्रा -पत ससंख्यप्रा 861 सन 2025 दप्रारप्रा वदिनप्रासंक 29.04.2025 कको वनयवमत जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जिप्रा चककप्रा हिहै। 9. उपरकोक तथ्यय कके दृवष्टिगत, जिबवक मप्रात अवभरकप्रा मम दिश्री गई स्विश्रीकप्रारकोक कके अवतररक पप्रारर्थी कके अवतररक इस स्तर पर अन्य ककोई सप्राकश्री नहिहीं हिहै तरप्रा सश्री.सश्री.रश्री.विश्री ररकहॉवडरग मम उसकप्रा चकेहिरप्रा दिकेखप्रा जिप्रानप्रा नहिहीं कहिप्रा हिहै, अवभरकप्रा मम वदियके अपनके बयप्रान मम भश्री पप्रारर्थी नके मप्रात लप्रात-घसूसम एविसं रप्पड़ सके मप्रारनप्रा स्विश्रीकप्रार वकयप्रा हिहै तरप्रा ममृतक कको कप्राररत तश्रीन चकोरय मम सके ककोई भश्री कप्राररत करनके कप्रा परम -दृष्टियप्रा पप्रारर्थी कके वविरुद्ध ककोई सप्राक्ष्य पतश्रीत नहिहीं हिको रहिप्रा हिहै; इस न्यप्रायप्रालय दप्रारप्रा दिको अन्य सहि-अवभयककय कको वनयवमत जिमप्रानत पदिप्रान ककी जिप्रा चकककी हिहै , न्यप्रायप्रालय कप्रा मत हिहै वक पप्रारर्थी भश्री जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकए जिप्रानके कप्रा अधधिकप्रारश्री हिहै। 10. तदिनकसप्रार, जिमप्रानत पप्राररनप्रा-पत स्विश्रीकप्रार वकयप्रा जिप्रातप्रा हिहै। 11. आविकेदिक आयकर विमप्रार उरर जिस्सश्री कको वनमनधलधखत शतरसं कके अधिश्रीन ससंबसंधधित मधजिस्रटकेर/न्यप्रायप्रालय ककी ससंतकवष्टि कके अनकसप्रार एक व्यवकगत बसंधिपत और समप्रान रप्रावश ककी दिको जिमप्रानतम पस्तकत करनके पर उपरकोक मप्रामलके मम जिमप्रानत पर ररहिप्रा वकयप्रा जिप्राए: - (i) आविकेदिक अवभयकोजिन सप्राक्ष्य कके सप्रार छकेड़छप्राड़ नहिहीं करकेगप्रा; (ii) आविकेदिक अवभयकोजिन पक कके गविप्राहिय पर दिबप्रावि नहिहीं डप्रालकेगप्रा; (iii) आविकेदिक रटप्रायल ककोरर दप्रारप्रा तय ककी गई पत्यकेक तप्रारश्रीख पर उपमस्रत हिकोगप्रा। [Subhash Vidyarthi,J.] Order Date :- 9.5.2025 Ankit Digitally signed by :- ANKIT SHARMA High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench