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High Court of Chhattisgarh · body
2025 DAILYLAW 11826 (CHH)
STATE OF CHHATTISGARH v. LALCHAND YADAV
ACQA/102/2024 · 2025-09-07
Shri Sanjay Kumar Jaiswal
body2025
[ 2025 DAILYLAW 11826 (CHH) · dailylaw.ai ]
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Judgment text
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1 / 6 {Acq. A. No.-102 of 2024}
2025:CGHC:45711 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
दोषमुति
अपु ल क्रमु!क
-102
/2024
छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुलिलस थाना-लण्ड्रा0, लि1ल-सरग1, छत्ती सगढ़ -----अपु लथा2/रज्या तिवेरूद्घ
1. ललच!दो यादोवे तिपु-रमुस्वेरूपु यादोवे, उम्र-लगभग 46 वेष9,
2. मुतिनाक प्रसदो तिपु-रमुस्वेरूपु यादोवे, उम्र-लगभग 35 वेष9,
3. रमुस्वेरूवे यादोवे तिपु-स्वेग2या भल प्रसदो यादोवे, उम्र-लगभग 75 वेष9,
4. उमुश क मुर यादोवे तिपु-लल च!दो प्रसदो यादोवे, उम्र-लगभग 22 वेष9,
5. रमुश्वेर यादोवे तिपु-रधेलल यादोवे, उम्र-लगभग 36 वेष9 सभ तिनावेस -ग्रामु र, पुलिलस थाना-लण्ड्रा0, लि1ल-सरग1, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदो गण/अतिभयागण अपु लथा2/रज्या द्वार : श्री एच०ए०पु ०एस० भतिFया, पुGनाल अलिधेवे । उत्तीरवेदो गण/अतिभयागण द्वार : श्री र1न्द्र पुFल, अलिधेवे । मुनाना या न्यायामुJति9 श्री स!1या क मुर 1यासवेल
, न्यायाधे श
!! तिनाण9या पु ठ पुर पुरिर !! 08/09/2025 POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN
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1. दोण्ड्रा प्रतिक्रया स!तिP, 1973 कQ धेर-378 (3) क P दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् इस अपु ल मुU तिवेचरण न्यायालया-न्यातियाक मुलि1स्F0F प्रथामु श्रीण , अ!तिकपुर, लि1ल-सरग1, छत्ती सगढ़ द्वार आपुरलिधेक प्रकरण क्रमु!क-2028/2014 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घ ललच!दो यादोवे वेगGरP” मुU पुरिर तिनाण9या तिदोना!क-05/12/2022 कQ वेGधे क चनाY दो
गई PG । लि1सक P अतिभया1ना क मुमुल प्रमुतिण ना पु P[ए अतिभयागण/ उत्तीरवेदो गण क धेर-148, 294, 506 (भग-दो), 323 सPपुतिठ धेर-149 भर या दोण्ड्रा स!तिP, 1860 क अपुरधे स दोषमु तिकया गया PG । लि1स आग
“प्रश्नाधे ना तिनाण9या” स स!लिधे तिकया 1 रP PG ।
2. अतिभया1ना क मुमुल, स!क्षेपु मुU, इस प्रकर PG तिक प्रथा2 रमुप्यार यादोवे एवे! अतिभया रमुस्वेरूपु क च प्रथा2 कQ भJतिमु मुU रज़गर गर!F क अ!ग9 सड़क तिनामु9ण कया9 चल रP था 1P! ज़मु ना कQ स मु स!!धे उभयापुक्षे क मुध्या तिवेवेदो था । उ तिवेवेदो क करण तिदोना!क 22.02.2014 क लगभग 09:00 1, 1 प्रथा2 रमुप्यार यादोवे अपुना पुरिर1नाb एवे! रिरश्दोरb क सथा घर पुर उपुस्थिस्था था, भ अतिभयागण लठ एवे! F!ग स लGस Pकर आए था प्रथा2 क घर क दोरवेज़ ल स मुर P[ए अश्ल ल गलिलया!
तिदोए । प्रथा2 पुक्षे क Pर तिनाकलना पुर अतिभयागण ना लठ -ड्रा!ड्राb स उना पुर प्रPर तिकया, लि1सस रमुप्यार यादोवे, सPना, भल यादोवे, रमु1 , रूगमु यादोवे था रमुसभग आP P[ए । प्रथा2 रमुप्यार यादोवे कQ सJचना पुर तिदोना!क 23.02.2014 क लगभग 12:00 1 अपुरधे क्रमु!क 20/2014 क प्रथामु सJचना पुत्र पु!1 द्ध तिकया गया । आPb क तिचतिकत्स या पुर क्षेण करया गया, सतिक्षेयाb क याना लिलए गए था मुYक-नाक्श Gयार तिकया गया । स!पुJण9 तिवेवेचना उपुर! अतिभयाग-पुत्र प्रस् तिकया गया ।
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3. तिवेचरण न्यायालया ना “प्रश्नाधे ना तिनाण9या” क अ!ग9 कस्थिण्ड्राक 32 एवे! 33 मुU अतिभया1ना सक्ष्या कQ तिवेवेचना कर P[ए याP पुया PG तिक अतिभया1ना अपुना मुमुल प्रमुतिण करना मुU असफल रP PG । न्यायालया ना पुया PG तिक आPगण क तिचतिकत्स या पुर क्षेण प्रतिवेदोना प्रमुतिण नाPk PG । अतिभयागण स 1ब् प्रमुतिण नाPk PG । घFना क समुया प्रथा2 एवे! आPगण वेस्वे मुU घर पुर उपुस्थिस्था था या नाPk, इस स!!धे मुU उनाक याना पुरस्पुर तिवेरधेभस पुए गए, लि1सस अतिभया1ना कQ तिवेश्वेसना या स!दोPस्पुदो P गई । न्यायालया ना याP भ पुया तिक इस घFना क लकर अतिभयागण कQ रिरपुF9 पुर प्रथा2 पुक्षे क तिवेरुद्ध भ
कउ!Fर अपुरधे क्रमु!क 21/2014 दो19 तिकया गया था । अn न्यायालया ना याP मुना PG तिक उ पुरिरस्थिस्थाति मुU प्रथा2 पुक्षे द्वार दो19 कQ गई रिरपुF9 प्रतिशधेवेश कQ गई प्र P
PG । इना समुस् आधेरb पुर तिवेचरण न्यायालया ना अतिभया1ना क मुमुल प्रमुतिण ना पु P[ए अतिभयागण क दोषमु कर तिदोया ।
4.
अपु लथा2/रज्या क तिवेद्वाना अलिधेवे क क9 PG तिक अतिभया1ना सतिक्षेयाb ना घFना क पुJण9 रूपु स पुष्ट तिकया PG । अतिभयागण स ड्राण्ड्रा कQ 1ब् भ प्रमुतिण P[ई PG । ऐस दोश मुU, लिसफ9 तिचतिकत्सक क याना ना Pना स अतिभया1ना क मुमुल क प्रमुतिण ना मुनाकर तिवेचरण न्यायालया द्वार त्रतिF कQ गई PG । आPb क चFU सधेरण प्रकq ति कQ या गई 1 प्रथा2 वे सतिक्षेयाb क कथाना स प्रमुतिण PG । अn “प्रश्नाधे ना तिनाण9या” क अपुस् कर P[ए अतिभयागण क दोषलिसद्ध कर दोस्थिण्ड्रा तिकया 1ए ।
5. उत्तीरवेदो /अतिभयागण क तिवेद्वाना अलिधेवे द्वार तिवेचरण न्यायालया क “प्रश्नाधे ना तिनाण9या” क समुथा9ना कर P[ए क9 तिदोया गया PG तिक स्वेया! प्रथा2 क याना क अनासर तिवेचरण न्यायालया ना याP मुना PG तिक लि1स समुया कQ घFना या 1 रP PG उस समुया
4 / 6 {Acq. A. No.-102 of 2024} स्वेया! अतिभया ललच!दो वेगGरP, प्रथा2 पुक्षे द्वार करिर चF क करण स अस्पुल मुU भ2 था । आग क9 PG तिक कउ!Fर मुमुल स चना क लिलए प्रथा2 पुक्षे ना याP झूJठ रिरपुF9 दो19 करई PG । इस प्रकर स तिवेचरण न्यायालया क तिनाण9या उतिच PG । रज्या पुक्षे द्वार अपु ल मुU उठया गया क9 स्वे कर याग्या नाPk PG । अn अपु ल खारिर1 तिकया 1या ।
6. उभयापुक्षे क क9 श्रीवेण तिकया गया और तिवेचरण न्यायालया क अतिभलखा क सJक्ष्मुपुJवे9क पुरिरश लना तिकया गया ।
7. स!पुJण9 पुरिरश लना स याP थ्या स्पुष्ट P PG तिक तिवेचरधे ना मुमुल प्रथा2 रमुप्यार यादोवे कQ रिरपुF9 क आधेर पुर अपुरधे क्रमु!क 20/2014, थाना लण्ड्रा0 मुU पु!1 द्ध तिकया गया था, लि1समुU घFना तिदोना!क 22.02.2014 कQ रतित्र लगभग 09:00 1 घतिF Pना दोश9या गया PG । याP भ उल्लेखाना या PG तिक इस घFना क स!!धे मुU अतिभया पुक्षे कQ तिशकया पुर थाना लण्ड्रा0 मुU अपुरधे क्रमु!क 21/2014 पु!1 द्ध तिकया गया, लि1समुU प्रथा2 रमुप्यार यादोवे एवे! अन्या क अतिभया क रूपु मुU नामु1दो तिकया गया PG । इस प्रकर उ घFना क लकर उभयापुक्षे द्वार एक-दोJसर क तिवेरुद्ध कउ!Fर प्रकरण दो19 करया गया ।
8.
तिवेचरण न्यायालया ना याP पुया PG तिक अतिभयागण स लठ -ड्राण्ड्रा कQ 1ब् तिवेलिधेवे प्रमुतिण नाPk PG । इस प्रकर, तिकस भ आP कQ उपुPति भ तिचतिकत्सक क सक्ष्या स प्रमुतिण नाPk करया 1 सक । आरपु क दोखा P[ए याP स्पुष्ट P PG तिक समुस् आPगण क सधेरण प्रकq ति कQ चFU या गई थाk । याP थ्या भ तिवेशष रूपु स उल्लेखाना या PG तिक घFना क लकर अतिभया पुक्षे द्वार कउ!Fर रिरपुF9 दो19 करई गई । प्रथा2 रमुप्यार यादोवे था अन्या आPगण द्वार तिदोए गए न्यायालया ना सक्ष्या मुU भ तिवेरधेभस पुरिरलतिक्षे P PG । रमुप्यार यादोवे ना प्रतिपुर क्षेण कQ कस्थिण्ड्राक-4 मुU याP स्वे कर तिकया
5 / 6 {Acq. A. No.-102 of 2024} PG तिक घFना क पुJवे9 P अतिभया पुक्षे क ललच!दो यादोवे एवे! अन्या व्याति एम्लUस क फना कर लि1ल तिचतिकत्सलया, अ!तिकपुर 1 चक था । इस थ्या स याP स्पुष्ट P PG तिक अतिभयागण स्वेया! घFना क पुJवे9 P आP P चक था और अस्पुल पुP[zच चक था । अतिभया1ना मुमुल क अनासर घFना रमुप्यार क घर कQ या गया PG । 1तिक रमुप्यार यादोवे ना कस्थिण्ड्राक-10 मुU याP स्वे कर तिकया तिक वेP घFना क समुया घर पुर ना Pकर चYक पुर मुY1Jदो था, 1 तिक अतिभया1ना क मुमुल स तिवेरधेभस PG । इसक अतिरिर अन्या आPb ना भ घFनास्थाल पुर तिभन्न-तिभन्न स्थानाb स पुP[zचना कQ कP PG, लि1सस अतिभया1ना क घFनास्थाल स!!धे तिवेवेरण स!दोPस्पुदो P[आ PG । उपुर तिवेरधेभसb क करण अतिभया1ना सतिक्षेयाb क कथाना सP1 P अतिवेश्वेसना या P 1 P| और अतिभया1ना क मुमुल स!दोPस्पुदो P गया ।
9. मुमुल क तिवेवेचक सPयाक उपुतिनार क्षेक रक श लिस!P (अ०स० 14) ना प्रतिपुर क्षेण मुU याP स्वे कर तिकया PG तिक उ घFना क लकर अतिभया पुक्षे द्वार दो19 करई गई कउ!Fर रिरपुF9 तिवेद्यमुना PG । उसना याP भ स्वे कर तिकया तिक तिवेवेचना क दोYरना तिकस स्वे!त्र सक्षे क कथाना दो19 नाPk तिकया था । तिवेवेचक ना याP थ्या भ स्वे कर तिकया तिक तिवेवेचना क दोYरना उसक स्थाना!रण अन्या स्थाना पुर कर तिदोया गया था । याद्यतिपु उसना इस सझूवे क अस्वे कर तिकया तिक उसक तिवेरुद्ध पुलिलस मुPतिनार क्षेक क कQ गई तिशकया था तिवेभग या 1!च क करण उसक स्थाना!रण P[आ था, तिक!
स्थाना!रण क थ्या उसना स्वेया! स्वे कर तिकया । सथा P उसना याP भ स्पुष्ट तिकया तिक अपुरधे पु!1 द्ध Pना क उपुर! शष तिवेवेचना तिकस अन्या तिवेवेचक द्वार पुJण9 कQ गई था था कउ!Fर मुमुल मुU धेर 307 भर या दो!ड्रा स!तिP क अपुरधे 1ड़ गया था । ऐस दोश मुU तिवेवेचक क याना क दोखा P[ए भ अतिभयागण क तिवेरूद्घ अतिभया1ना क मुमुल स!दोPस्पुदो रP PG ।
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10. Recently, applying the law governing the scope of interference in an appeal against acquittal, the Hon’ble Supreme Court in the case of
“State of Rajasthan vs. Kistoora Ram” reported in 2022 SCC OnLine SC 984, has held as follows:-
“8. The scope of interference in an appeal against acquittal is very limited. Unless it is found that the view taken by the Court is impossible or perverse, it is not permissible to interfere with the finding of acquittal. Equally if two views are possible, it is not permissible to set aside an order of acquittal, merely because the Appellate Court finds the way of conviction to be more probable. The interference would be warranted only if the view taken is not possible at all.”
11. उपुर न्यायादृष्ट! क आधेर पुर पुJवे9 मुU कQ गई सक्ष्या तिवेवेचना क फलस्वेरूपु याP न्यायालया पु PG तिक अतिभलखा मुU उपुलब्धे, थ्या और सक्ष्या क दृतिष्टग रखा P[ए तिवेचरण न्यायालया द्वार 1 दोषमुति क तिनाण9या पुरिर तिकया PG उसमुU कई अवेGधे या अशद्घ नाPk PG । इसलिलए उसमुU तिकस Pस्क्षेपु कQ आवेश्याक नाPk पुया 1 ।
12. अn दोषमुति क तिवेरूद्घ प्रस् याP अपु ल स्वे कर याग्या ना Pना स खारिर1 कQ 1 PG ।
13. तिनाण9या कQ प्रतिलिलतिपु क सथा तिवेचरण न्यायालया क अतिभलखा श घ्रपुJवे9क वेपुस प्रतिष P । सP /- (स!1या क मुर 1यासवेल) न्यायाधे श पुमुना