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Allahabad High Court · body

2025 DAILYLAW 114539 (ALL)

SMT. AMNA BANO v. STATE OF U.P. THRU. S.S.P. LKO. and OTHERS

CRLP/12486/2018 · 2025-07-25

Saurabh Lavania

body2025

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

1 Neutral Citation No. - 2025:AHC-LKO:43114 Court No. - 13 Case :- CRIMINAL MISC. WRIT PETITION No. - 12486 of 2018 Petitioner :- Smt. Amna Bano Respondent :- State Of U.P. Thru. S.S.P. Lko. And Others Counsel for Petitioner :- Manoj Kumar Singh Counsel for Respondent :- Govt. Advocate,Ramendra Kumar Misra,Shama Qidwai Hon'ble Saurabh Lavania,J. 1. Heard learned counsel for the petitioner, learned A.G.A. for the State and perused the record. 2. The instant writ petition has been filed seeking following main relief (s):- "(i) To issue a order or directions for quashing the impugned order dated 23.1.2018 and as well as the order dated 22.6.2017 passed by the learned trial court as well as the revisional court i.e. the opposite party no. 2 and 3 as contained in annexure no.1 and 2 to this petition and the Police of P.S. Husainganj Lucknow be directed to lodge the FIR against the accused persons under the appropriate section of the I.P.C." 3. Vide order dated 22.06.2017, under challenged in the instant writ petition, the Magistrate has rejected the application preferred by the petitioner under Section 156 (3) Cr.P.C. The order dated 22.06.2017 reads as under :- "प्रार्थिनी आमना बानों के द्वारा नौशाद आदिद के दिरूद्ध दिदनांक-22-4-2017 की घटना के आधार पर प्रम सूचना रिरपोट" दर्ज" कराये र्जाने हेतु प्रा"ना पत्र प्रस्तुत करते हुए मुख्यतः इस आशय का कन दिकया गया है दिक उक्त दिदनांक को दिपक्षीगण प्रार्थिनी के घर में आये प्रार्थिनी से हाल कु शल पूछा और चायपानी कराया और दि8र खाना बनाने में लग गयी, जिर्जस कमरे में अ8रोर्ज उ8" रेशमा शादाब नौशाद बैठे े उसमें प्रार्थिनी की बेटी के र्जेर ता रूपये रखे हुए े। प्रार्थिनी ने खाना बनाकर खिखलाया और खुद भी खाया, ता सोने के खिलए दूसरे कमरे में चली गयी। रादित्र बारह एक बर्जे नौशाद प्रार्थिनी के दिबस्तर पर आया और प्रार्थिनी से मारपीट करने लगा प्रार्थिनी ने दिरोध दिकया तो नौशाद ने प्रार्थिनी की कनपटी पर दिपस्टल लगा दिदया और कहा दिक यदिद चिचल्लाओगी तो र्जान से मार देंगे। प्रचितपक्षीगण प्रार्थिनी एं उसकी पुत्री का समस्त र्जेरात कीमती लगभग अस्सी हर्जार रूपये लूटकर चले गये। सुबह पार्थिनी ने देखा तो नौशाद, अ8रोर्ज उ8" रेशमा शादाब नहीं े, कमरे में सामान टूटा 8ू टा पड़ा ा, देखा तो र्जेरात नहीं े। लूट की र्जानकारी होने पर ाना हुसैनगंर्ज में सूचना दिदया परन्तु कोई काय"ाही नहीं हुई। 2 सुना एं ाना आख्या का परिरशीलन दिकया। ाना आख्या के अनुसार प्रार्थिनी ता प्रचितपक्षीगण आपस में रिरश्तेदार है और उक्त तथ्य को सम्बन्ध में सम्बन्धिन्धत ाने पर कोई भी अभिभयोग पंर्जीकृ त नहीं है। प्रार्थिनी के द्वारा अपने प्रा"ना पत्र में प्रमतः यह दशा"या र्जा रहा है दिक दिदनांक-22-4-2017 की रादित्र बारह एक बर्जे के बीच नौशाद के द्वारा प्रार्थिनी से मार पीट की गयी और कनपटी पर दिपस्टल लगा दिदया और प्रचितपक्षीगण अ8रोर्ज शादाब उसके पन्द्रह हर्जार रूपये और उसके र्जेर लूट कर चले गये। इसके दिपरीत प्रार्थिनी के द्वारा इस आशय का भी कन दिकया गया है दिक प्रार्थिनी ने सुबह देखा ता नौशाद आदिद प्रचितपक्षीगण नहीं े। और प्रार्थिनी को लूट की र्जानकारी हुई। इसके अचितरिरक्त प्रार्थिनी के द्वारा इस तथ्य का भी उल्लेख दिकया गया है दिक रहीश पुत्र मो० हीद ने दिपक्षीगण को भागते हुए देखा भी ा। उपरोक्त समग्र परिरशीलन के आधार पर इस दिनष्कर्ष" पर पहुंचा र्जाता है दिक प्रार्थिनी के पा"ना पत्र के कनों में दिरोधाभार्ष है और प्रार्थिनी के द्वारा अपने प्रा"ना पत्र में र्जेरातों का भी कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं दिकया गया है। एक तर8 प्रार्थिनी के द्वारा बारह एक बर्जे की घटना दशा"यी र्जा रही है और उक्त घटना होने के पश्चात् प्रार्थिनी के द्वारा सुबह तक दिकसी भी व्यदिक्त को घटना के बारे में र्जानकारी नहीं दी गयी, और न ही रहीश पुत्र मो० हीद को ही बताया। उपरोक्त समग्र परिरशीलन के आधार पर इस दिनष्कर्ष" पर पहुंचा र्जाता है दिक प्रार्थिनी के प्रा"ना पत्र में दशा"ये गये तथ्यों के आधार पर प्रम सूचना रिरपोट" दर्ज" कराये र्जाने का कोई पया"प्त आधार नहीं पाया र्जाता है। तदनुसार प्रा"ना पत्र खारिरर्ज दिकये र्जाने योग्य है। आदेश प्रा"ना पत्र अन्तग"त धारा-156 (3) द० प्र० स० खारिरर्ज दिकया र्जाता है।" 4. Being aggrieved the petitioner filed the Criminal Revision No.490 of 2017. The revisional court dismissed the criminal revision vide the impugned order dated 30.01.2018 and affirmed the order of the Magistrate dated 22.06.2017. The relevant portion of the order dated 30.01.2018 reads as under :- "अर न्यायालय द्वारा पारिरत आदेश के परिरशीलन से स्पष्ट है दिक अर न्यायालय द्वारा र्थिणत दिकया गया है दिक कदित दिपक्षीगण प्रार्थिनी के घर पर दिदनांक 22.04.2017 को आये, हाल चाल कु शलक्षेम पूछा ता उन्हें एक कमरे में रोका जिर्जसमें पार्थिनी उसकी बेटे र्जेर कपडे रखे हुए े, कभित दिपक्षीगण को भोर्जन कराने के बाद यह सोने के खिलए दूसरे कमरे में चली गयी, रादित्र में करीब 12-1 बर्जे नौशाद प्रा"नी के कमरे में आये और मारपीट करने लगे दिरोध करने पर नौशाद ने उसकी कनपटी पर दिपस्टल लगा दिदया और कहा दिक चिचल्लाओगी तो र्जान से मार देंगे दिपक्षीगण प्रार्थिनी उसकी बेटी के र्जेरात कीमती 80 हर्जार लूटकरपए गये सुबह देखा तो नौशाद, अ8रोर्ज उ8" रेशमा शादाब नहीं े कमरे में सामान टूटा 8ू टा पड़ा ा, देखा तो र्जेरात नहीं े। उपरोक्त तथ्यों के आधार पर अर न्यायालय द्वारा यह दिनष्कर्ष" दिनकाला गया दिक प्रार्थिनी के प्रा"नापत्र के कनों में दिरोधाभार्ष है और प्रार्थिनी के द्वारा अपने प्रा"नापत्र में र्जेरातों का भी कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं दिकया गया एत तर8 प्रार्थिनी द्वारा बारह एक बर्जे की घटना दशा"यी र्जा रही है और उक्त घटना होने के पश्चात् उसके द्वारा सुबह तक दिकसी भी व्यदिक्त को घटना के बारे में र्जानकारी नहीं दी गयी और उक्त के आधार पर प्रम सूचना रिरपोट" दर्ज" कराये र्जाने का कोई पया"प्त आधार न पाये र्जाने पर प्रा"नापत्र खारिरर्ज कर दिदया। 3 पनरीक्षणकत्री द्वारा मय शपपत्र प्रस्तुत प्रा"नापत्र अन्तग"त धारा 156(3) दण्ड प्रदिZया संदिहता दिदनाक 27.04.2017 को प्रस्तुत दिकया गया ा जिर्जसके सा सलग्नक-1 के रूप में ानाध्यक्ष, हुसैनगर्ज को दिदये गये प्रा"नापत्र दिदनादिकत 23.04 2017 की छायाप्रचित, संलग्नक-2 के रूप में रिरष्ठ पुखिलस अधीक्षक को दिदनाक 23.04.2017 को रजिर्जस्टड" डाक से प्रेदिर्षत पत्र की छायाप्रचित दाखिखल की गयी है। उपरोक्त प्रा"नापत्रों में घटना 12-1 बर्जे की उजिल्लखिखत घटना के संबध में कहा गया दिक यह घटना नौशाद द्वारा अैध दिपस्टल कनपटी पर रखे र्जाने डरा धमका कर लूटपाट दिकये र्जाने के बारे में कभित है ता यह भी कन दिकया गया है दिक उसी समय अ8रोर्ज उ8" रेशमा शादाब प्रार्थिनी उसकी पुत्री के समस्त र्जबरात कीमती अस्सी हर्जार ता पन्द्रह हर्जार रूपये नकद लूट ले गये। प्रार्थिनी द्वारा पुनः कन दिकया गया दिक प्रार्थिनी ने सुबह देखा तो नौशाद शादाब आ8रोर्ज उ8" रेशमा नही े प्रार्थिनी सहमी हुई ी, कमरे का सामान उल्टा पुल्टा पड़ा ा, देखा तो र्जेरात कपड़े नहीं े तब उसे लूट की र्जानकारी हुई और यह मी कन दिकया है उपरोक्त तीनों लोगों को भागते हुए मो० रईस ने देखा ा और इस घटना की सूचना ानाध्यक्ष हुसैनगंर्ज को दिदनांक 23.04.2017 को दी ी लेदिकन पुखिलस द्वारा कोई काय"ाही नहीं की गयी। उपरोक्त दोनो प्रा"नापत्रों ता मजिर्जस्ट्रेट न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत प्रा"नापत्र अन्तग"त धारा 156 (3) दण्ड प्रदिZया संदिहता का परिरशीलन दिकया गया जिर्जसमें स"प्रम यह तथ्य उद् भूत हुआ है दिक कभित घटना दिदनाक 22.04 2017 की रादित्र 12-1 बर्जे होना बताया गया है ता इस घटना को स"प्रम नौशाद द्वा कनपटी पर अैध असलहा लगाये र्जाने के बारे में कन दिकया गया है उसी समय कभित दो अन्य व्यदिक्तयों अ8रोर्ज उ8" रेशमा शादाब द्वारा अस्सी हर्जार कीमती र्जेर एं पन्द्रह हर्जार रूपये नकद लूटकर ले र्जाने के बारे में भी कन दिकया गया ता यह भी कन दिकया गया है दिक प्रातः र्जब उसने अपने घर को देखा तो पता चला दिक उसके घर में चोरी हो गयी। उपरोक्त तथ्यों की सम्पूण" दिेचना अर न्यायालय द्वारा की गयी है। र्जहाँ तक प्रस्तुत मामले के पुनरीक्षणकत्रb का यह कन दिक दिद्वान अर न्यायालय द्वारा दिचिध अनुरूप आदेश पारिरत नहीं दिकया गया और न्याचियक मन्धिस्तष्क का प्रयोग नहीं दिकया गया तो अर न्यायालय द्वारा तथ्यों के आधार पर ही आदेश पारिरत दिकया र्जाता है , पुनरीक्षणकतत्री का उक्त तक" सही नहीं बन्धिल्क अर न्यायालय द्वारा सम्पूण" तथ्यों की दिचिधक रूप से दिेचना करते र्जो दिनष्कर्ष" दिनकाला गया है, ह सही है क्योंदिक प्रार्थिनी द्वारा प्रस्तुत प्रा"नापत्र में दिरोधाभार्ष कन दिकये गये हैं , उसके द्वारा प्रा"नापत्र के एक प्रस्तर में यह कन दिकया गया दिक रादित्र करीब 12-1 बर्जे नौशाद उसके दिबस्तर पर आया और नशे में मारपीट करन लगा और दिरोध करने पर कनपटी पर अैध असलहा लगाया और उसी समय अ8रोर्ज उ8" रेशमा शादाब ने लूट की ता इसी प्रा"नापत्र के दूसरे प्रस्तर में कन दिकया गया है दिक र्जब सुबह र्जागी तो देखा दिक उसके कमरे जिर्जसमें बेटी रहती ी, से अस्सी हर्जार रूपये कीमती र्जेरात एं पन्द्रह हर्जार रूपये लूट खिलये र्जाने के बारे में देखा। यह स्यं में दिरोधाभार्षी हैं। अत अर न्यायालय द्वारा पारिरत आक्षेदिपत आदेश दिचिध सम्मत है और उसमें दिकसी हस्तक्षेप की आश्यकता नहीं है। अधीनस् न्यायालय के आदेश की संपुदिष्ट की र्जाती है और पुनरीक्षणकत्रb की पुनरीक्षण दिनरस्त दिकये र्जाने योग्य है। आदेश दान्धिण्डक दिनगरानी संख्या 490/2017 दिनरस्त की र्जाती है।" 5. Impeaching the orders above indicated learned counsel for the petitioner says that the Magistrate erred in fact and law in rejecting the application preferred by the petitioner in terms of Section 156 (3) Cr.P.C. and in dismissing the revision, whereby the order of the Magistrate has 4 been affirmed, the revisional court has failed to exercise its jurisdiction. It is also stated that the Magistrate, if was of the opinion that in the facts of the case the lodging of the F.I.R. is not necessary, then the Magistrate ought to have treated the application of the petitioner as a complaint case and this aspect was also not considered by the revisional court. As such the indulgence of this court is required. 6. Learned A.G.A. has opposed the present petition by submitting that the case set up in the application under Section 156 (3) Cr.P.C. is completely bogus. It appears from the record that on account of some dispute, the petitioner became annoyed and therefore, filed the application under Section 156 (3) Cr.P.C. making allegations against her daughter Afroj @ Rehsma, her husband Naushad and her grand-son Shadab as also that a bare perusal of the complaint would indicate that the story set up is not intact and the same is self contradictory. Prayer is to affirm the impugned order. 7. I have considered the submission advanced on behalf of petitioner and learned A.G.A. for the State and perused the record. 8. Upon due consideration of the facts of the case including documents on record, as indicated by the counsel for the parties, this Court is of the view that no interference is required in the matter. It is for the following reasons :- (i) Undisputedly Afroj @ Reshma is the daughter of the petitioner, Naushad is the son-in-law of the petitioner and Shadab is the son of Afroja @ Reshma and Naushad. (ii) The medical prescription or the injury report of the petitioner has not been placed on record and accordingly it can not be ascertained/deduced that the petitioner, at the relevant point of time was aged about 75 years, was assaulted by Naushad, who is her son-in-law. (iii) The details of the Jewelry, alleged to be stolen by above named persons, have also not been indicated which shows that the allegations are completely bogus. (iv) In nutshell, according to the case set up by the petitioner, after having dinner all the persons named above as also petitioner went to their bed and in the mid night Naushad in intoxicated condition came to the bed of the petitioner and assaulted her and on being opposed she was taken on gun point by Naushad and thereafter all the above named persons left the house of the petitioner after looting the Jewelry of Rs.80,000/- and Rs.15,000/- cash. 5 (v) In the said application, the petitioner has also stated that when she woke up, she found that Naushad, Aforj @ Reshma and Shadab were not in house and the articles in the room were damaged and Jewelry and cash were missing. (vi) In view of the aforesaid, the story set up in the application is not intact. 9. The application under Section 156 (3) Cr.P.C. for the reasons aforesaid to the view of this Court has no force. Accordingly, the writ petition is dismissed. Order Date :- 25.7.2025 ML/- Digitally signed by :- MUNNA LAL High Court of Judicature at Allahabad, Lucknow Bench