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2025:CGHC:35962 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
तिर्णया सरति ति क-27/06/2025 तिर्णया उद्घो*ति+ ति क-24/07/2025 ण्डि./क अपु ल क्रमां क
-15
/2021
1. तिश क मांर तिपु-सखवे प्रस ट./, उम्र-लगभग 26 वे+, तिवेस -ग्रामां मांलमांल, आर क न्द्र-मांलमांल, जि<ल-< <ग र चम्पु, छत्ती सगढ़ -----अपु लर्थी? तिवेरूद्घो छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार पुजिलस र्थी-मांलमांल, जि<ल-< <ग र चम्पु, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवे अपु लर्थी? द्वार : श्री सतिमां जिस ह, अजिFवेक्ता कH ओर स सश्री वेJशल <Jसवे , अजिFवेक्ता । शस/उत्तीरवे द्वार : श्री करर्ण क मांर हर , पुJल अजिFवेक्ता । मां या न्यायामांLति श्री स <या क मांर <यासवेल
, न्यायाF श
!! स .ए.वे . तिर्णया !! 1. ./ प्रतिक्रया स तिह, 1973 कH Fर-374 (2) क अ ग प्रस् इस ण्डि./क अपु ल मांV तिवेचरर्ण न्यायालया-अपुर सत्र न्यायाF श (एफ.ट .स .), < <ग र, जि<ल-< <ग र चम्पु, छत्ती सगढ़ द्वार सत्र प्रकरर्ण क्रमां क-18/ POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2025.07.24 17:22:47 +0530
2 / 20 {Cr. A. No.-15 of 2021} 2019, “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घो तिश क मांर एवे अन्या” मांV पुरिर तिर्णया ति क-11/12/2020 क* च]
गई हJ । जि<समांV अतिभयाक्ता तिश क मांर क* तिम्सर *+जिसद्ध कर ण्डि./ तिकया गया, जि<स आग स पु मांV “प्रश्F
तिर्णया” स स *जिF तिकया < रह हJa- *+जिसतिद्ध ./श Fर-304 (ख) भर या ./ स तिह, 1860 07 वे+ क सश्रीमां करवेस कH स< स ण्डि./ तिकया गया ।
2. याह अतिवेवेति थ्या हJ तिक अपु लर्थी? तिश क मांर क तिवेवेह स मां (मांcक) क सर्थी ति क-25/04/2012 क* सम्पुन्न हeआ र्थी । सह-अतिभयाक्तागर्ण सखवे प्रस, सश ल ई और भग*ई क्रमांशa अपु लर्थी? क तिपु, मां और आ रह हg । इस प्रकर, सभ अतिभयाक्ता मांcक स मां क पुति या पुति क र हg ।
3. याह उल्लेख या थ्या हJ तिक तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार “प्रश्F तिर्णया” क ह सह-अतिभयाक्तागर्ण सखवे प्रस, सश ल ई और भग*ई क* *+मांक्ता तिकया गया, <तिक अपु लर्थी? क* *+ ठहरया गया ।
4. प्रकरर्ण क थ्या, स पु मांV, इस प्रकर हJ तिक स मां क तिवेवेह ति क-25/ 04/2012 क* अपु लर्थी? तिश क मांर क सर्थी सम्पुन्न हeआ र्थी । तिवेवेह क लगभग एक वे+ पुश्च स ह अपु लर्थी?
तिश क मांर द्वार अपु पुरिर<j क सर्थी तिमांलकर स मां स ह< मांV रकमां और *पुतिहया वेह कH मां ग कर हeए उस प्रतिk कर लग । स मां द्वार उक्ता मां ग कH अपु मां-तिपु क* या
3 / 20 {Cr. A. No.-15 of 2021} < पुर वे कह र्थी तिक वे समांर्थी हl हJ तिफर भ अतिभयाक्ता पु द्वार रम्र रकमां और *पुतिहया वेह कH मां ग कH < र्थी र्थी स मां क सर्थी मांरपु ट कर उस प्रतिk तिकया < र्थी । स मां और अपु लर्थी? तिश क * च्च भ हg । घट ति क-02/10/2018 क* स मां पुa अपु तिपु <रमां (अ०स०-6) क* मां*ईल फ* क मांध्यामां स या तिक उसस तिफर स रकमां कH मां ग कH < रह हJ * <रमां कह तिक वेह रकमां कह स लएग, मांV असमांर्थी हJ । इस वेलपु क* मांcक कH मांp स श (अ०स०-5) द्वार भ स गया । इसक क छ समांया पुश्च अपु लर्थी? तिश द्वार फ* स <रमां और स श क* मांलमांल लया गया एवे त्पुश्च पुमांगढ़ अस्पुल पुहe च ह सLतिच तिकया गया । उस
ति स मां क* अपु ससरल ण्डिस्र्थी घर पुर फ स मांV लटक पुया गया, जि<स अपु लर्थी?
तिश क मांर द्वार अस्पुल ल <या गया, <ह तिचतिकत्सकj द्वार उस मांc घ*ति+ कर तिया गया । घट कH सLच अस्पुल स पुजिलस र्थी-मांलमांल क* प्रप्त ह* पुर मांग कयामां तिकया गया । त्पुश्च पु चj क* सLच कर, शवे क पु चमां Jयार तिकया गया । शवे क पुर र्ण करवेया गया । घटस्र्थील क क्श Jयार तिकया गया । घटस्र्थील स मांcक क <वेर, टLट चLतिkया , पुट्टा वेगJरह रमां कर <ब् तिकया गया । पुटवेर स मां]क-क्श Jयार करवेया गया । मांcक क तिपु <रमां (अ०स०-6) द्वार जिलजिख तिशकया प्रश पु -7 प्रस् तिकया गया । मांग < च पुश्च ति क-23/11/2018 क* अतिभयाक्तागर्ण क तिवेरूद्घो प्रर्थीमां सLच पुत्र प्रश पु -30 कयामां कH गई, जि<सपुर अतिभयाक्तागर्ण क* तिगरफ्र तिकया गया । स पुLर्ण तिवेवेच उपुर अतिभयाक्तागर्ण क तिवेरूद्घो अतिभया*ग पुत्र पुश तिकया गया ।
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5. अतिभया*< कH ओर स अपु पु समांर्थी मांV 17 सतियाj क पुर र्ण र्थी 30 स्वे< प्रश तिचन्ह तिक करए गए । Fर-313 ./ प्रतिक्रया स तिह क ह कर्थी मांV अन्या अतिभयाक्ता क सर्थी-सर्थी अपु लर्थी? तिश क मांर अपु तिवेपुर
अतिभया*< सतियाj क कर्थीj क* इकर कर हeए कह हJ तिक वेह तिw+ हg और उस झूLठ फ सया गया हJ । अपु लर्थी? पु कH ओर चवे मांV तिकस स क पुर र्ण हl करवेया गया । उभयापु क* स <कर तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार अपु लर्थी? क* इस तिर्णया कH कण्डि./क-1 क असर *+जिसद्ध कर ण्डि./ तिकया गया । जि<स इस अपु ल मांV च]
गई हJ ।
6. अपु लर्थी? पु क तिवेद्वा अजिFवेक्ता क क हJ तिक अतिभया*< क स्वे त्र स
पुद्र*ह रह हg । कजिर्थी घट कH रिरपु*ट कर 51 ति क तिवेलम् स < करई गई हJ । सतियाj क या मांV याह थ्या आया हJ तिक स मां क अपु ससरल पु वेलj स अच्छ स F र्थी । स मां क मां और तिपु अपु लर्थी?
क तिवेरूद्घो <* कर्थी तिकए हg वे आपुस मांV तिवेर*Fभस हg । घट क ति स मां कH फ* पुर च क उल्लेख जिलजिख तिशकया प्रश पु -7 मांV हl तिकया गया हJ । स पुLर्ण वेJवेतिहक < वे क ]र घट स ठ क पुLवे क ह< प्रk क* लकर प्रर्थी? पु द्वार कभ -कहl-क*ई तिशकया हl कH गई र्थी । ह< मांV तिक रकमां कH मां ग कH गई, इस ति पुर भ सतियाj क या मांV ग भ र तिवेर*Fभस कH ण्डिस्र्थीति हJ । स मां क मां-तिपु स्वेया याह स्वे कर तिकया हJ तिक < भ अपु लर्थी? तिश क मांर अपु पुत् स मां क* लकर उक घर आ र्थी, * वेह मां*टरसइतिकल स आ र्थी । इस प्रकर मां*टरसइतिकल कH मां ग तिकए < क कर्थी वेट प्र
5 / 20 {Cr. A. No.-15 of 2021} ह* हJ । सक्ष्या स याह भ स्पुष्ट ह* हJ तिक तिवेवेह क समांया तिकस प्रकर कH क*ई मां ग हl र्थी । इस प्रकर अतिभया*< याह प्रमांतिर्ण कर मांV असफल रह हJ तिक
"मांcत्या स ठ क पुLवे" स मां स "ह< कH मां ग" कर हeए "क्रL र" कH गई ह* अर्थीवे
"प्रतिk" तिकया गया ह* । तिकस भ पुरिर< कH असमांतियाक मांcत्या स उसक पुरिरवेर आह ह* हJ, और उस भवेत्मांक अवेस्र्थी मांV तिए गए अतिरक कर्थीj क आFर पुर *+जिसतिद्ध हl कH < सक । अतिभया*< क* अपु मांमांल स ह स पुर प्रमांतिर्ण कर ह* हJ, <* इस मांमांल मांV हl तिकया गया हJ । उपुर*क्ता पुरिरण्डिस्र्थीतियाj मांV, तिवेचरर्ण न्यायालया द्वार सक्ष्या कH उतिच रूपु स समां कर हeए अपु लर्थी? तिश क मांर क* त्रतिटपुLवेक *+जिसद्ध कर ण्डि./ तिकया गया हJ । अपु लर्थी?
कH *+जिसतिद्ध स्पुष्ट, पुLर्ण, तिवेश्वेस या और वेJF सक्ष्या पुर आFरिर हl हJ । अa “प्रश्F तिर्णया” ण्डिस्र्थीर रख < या*ग्या ह* स अपु ल स्वे कर कर हeए उस *+मांक्ता तिकया <ए । तिवेद्वा अजिFवेक्ता द्वार अपु क क समांर्थी मांV न्यायादृष्ट Baijnath v. State of Madhya Pradesh (2017) 1 SCC 101 एवे Sharad Birdi Chand Sarda v. State of Maharashtra (1984) 4 SCC 116 क हवेल तिया गया हJ ।
7. उत्तीरवे /शस पु कH ओर स उपुण्डिस्र्थी तिवेद्वा अजिFवेक्ता इस अपु ल क तिवेर*F कर हeए क तिकया हJ तिक अतिभया*< सतियाj पुLर्ण रूपु स अतिभया*< मांमांल क समांर्थी तिकया हJ जि<पुर अतिवेश्वेस तिकया < क क*ई करर्ण हl हJ । तिवेचरर्ण न्यायालया क “प्रश्F तिर्णया” सक्ष्या कH उतिच समां पुर आFरिर हJ । अतिभया*< अपु लर्थी? क तिवेरूद्घो अपु मांमांल स ह स पुर प्रमांतिर्ण तिकया
6 / 20 {Cr. A. No.-15 of 2021} हJ । अपु लर्थी? पु द्वार अपु ल मांV उठया गया क स्वे कर या*ग्या हl हJ । अa अपु ल खरिर< तिकया <या ।
8. उभयापु क क श्रीवेर्ण तिकया गया और अतिभलख क सLक्ष्मांपुLवेक पुरिरश ल तिकया गया ।
9. स पुLर्ण अतिभलख र्थी “प्रश्F तिर्णया” क पुरिरश ल स याह ण्डिस्र्थीति स्पुष्ट ह* हJ तिक अपु लर्थी? तिश क मांर क तिवेवेह स मां क सर्थी ति क-25/04/2012 क* सम्पुन्न हeआ र्थी । स मां कH मांcत्या उसक ससरल समां पुर, मांलमांल, < <ग र चम्पु, छत्ती सगढ़ मांV फ स स हeई र्थी ।
10. तिचतिकत्सक स]रभ यावे (अ०स०-7) मांcक स मां क शवे क पुर र्ण प्रतिवे प्रश पु -10 क* प्रमांतिर्ण कर हeए या हJ तिक मांcत्या क करर्ण फ स
लग स मां घट क करर्ण हृया गति रूक र्थी, जि<सकH प्रकc ति आत्मांहत्यात्मांक र्थी । इस प्रकर याह थ्या स्पुष्ट ह* हJ तिक स मां कH मांcत्या "तिवेवेह स 07 वे+ क अ र" उसक ससरल घर मांV असमांन्या पुरिरण्डिस्र्थीतियाj मांV हeई र्थी ।
11. Fर-304 (ख) भर या ./ स तिह, 1860 क प्रवेF तिम्सर हga-
“304ख.
ह< मांcत्या -- (1) <ह तिकस स्त्री कH मांcत्या तिकस ह या शर रिरक ति द्वार करिर कH < हJ या उसक तिवेवेह क स वे+ क भ र समांन्या पुरिरण्डिस्र्थीतियाj स अन्यार्थी ह* < हJ और याह तिश तिकया < हJ तिक उसकH मांcत्या क क छ पुLवे उसक पुति या उसक पुति क र , ह< कH तिकस मां ग क जिलए, या उसक स F मांV, उसक सर्थी क्रL र कH र्थी , या उस ग तिकया र्थी वेह ऐस
7 / 20 {Cr. A. No.-15 of 2021} मांcत्या क* “ह< मांcत्या” कह <एग, और ऐस पुति या र उसकH मांcत्या करिर कर वेल समांझू <याग । (2) <* क*ई ह< मांcत्या करिर करग वेह करवेस स, जि<सकH अवेजिF स वे+ स कमां कH हl ह*ग तिकन् <* आ< वे करवेस क कH ह* सक ग , ण्डि./ तिकया <एग ।"
12. Fर-113(ख) भर या सक्ष्या अजिFतियामां, 1872 क उपु Fरर्ण क प्रवेF तिम्सर हga-
“113(ख) ह< मांcत्या क र मांV उपु Fरर्ण.-< याह प्रश् याह हJ तिक तिकस व्यातिक्ता तिकस स्त्री क* ह< मांcत्या करिर कH हJ और याह तिश तिकया गया हJ तिक मांcत्या क क छ पुLवे ऐस व्यातिक्ता ह< कH तिकस मां ग क जिलए या उसक स F मांV उस स्त्री क सर्थी क्रL र कH र्थी या उसक* ग तिकया र्थी, * न्यायालया याह उपु Fरर्ण करग तिक ऐस व्यातिक्ता ह< मांcत्या करिर कH र्थी ।"
13. उपुर*क्ता तिवेजिFक ण्डिस्र्थीति क पुरिरश ल स याह पुरिरलति ह* हJ तिक "ह< मांcत्या" क मांमांल मांV याह ख < आवेश्याक हJ तिक ह< कH मां ग, "क्रL र" या "प्रk" घट स ठ क पुLवे कH ह* चतिहए । इस तिवे+या मांV, प्रस् न्यायादृष्ट Narayanamurthy v. State of Karnataka & Anr., AIR 2008 SC 2377 क मांमांल मांV मां या उच्चमां न्यायालया द्वार याह अवेFरिर तिकया गया हJ तिक जिसफ
"क्रL र" या "प्रk" क* प्रमांतिर्ण कर "ह< मांcत्या” क अपुरF क जिलए पुयाप्त हl हJ ण्डि‚क मांcत्या स ठ क पुLवे ऐस
"क्रL र" या "प्रk" क* प्रमांतिर्ण कर आवेश्याक हJ ।
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14.
A. No.-15 of 2021}
14. न्यायादृष्ट Charan Singh alias Charanjit Singh v. State of Uttarakhand, 2023 SCC OnLine SC 454 मांV मां या उच्चमां न्यायालया द्वार याह अवेFरिर तिकया गया हJ तिक "ह< मांcत्या” क जिलए जिसफ याह प्रमांतिर्ण कर पुयाप्त हl हJ तिक तिवेवेतिह या पुत् कH मांcत्या तिवेवेह स 07 वे+ क अ र समांन्या स तिभन्न पुरिरण्डिस्र्थीतियाj मांV हeई । ण्डि‚क याह भ प्रमांतिर्ण ह* चतिहए तिक मांcत्या स ठ क पुLवे "ह< कH मां ग" कH गया ह* या "प्रतिk" तिकया गया ह* या
"क्रL र" कH गया ह* ।
15. न्यायादृष्ट Baijnath v. State of Madhya Pradesh (2017) 1 SCC 101 मांV मां या उच्चमां न्यायालया द्वार "ह< मांcत्या" क मांमांल मांV कण्डि./क-33 एवे 35 मांV तिम्सर अतिभव्यातिक्ता हJa-
"33. Tested on the judicially adumbrated parameters as above, we are of the unhesitant opinion that the prosecution has failed to prove beyond reasonable doubt, cruelty or harassment to the deceased for or in connection with any demand for dowry as contemplated in either of the two provisions of the Code under which the accused persons had been charged. Noticeably, the alleged demand centres around a motorcycle, which as the evidence of the prosecution witnesses would evince, admittedly did not surface at the time of finalisation of the marriage. PW 5, the mother of the deceased has even conceded that there was no dowry demand at that
9 / 20 {Cr. A. No.-15 of 2021} stage. According to her, when the husband (who is dead) had insisted for a motorcycle, thereafter he was assured that he would be provided with the same, finances permitting. Noticeably again, the demand, as sought to be projected by the prosecution, if accepted to be true had lingered for almost two years. Yet admittedly, no complaint was made thereof to anyone, far less the police. Apart from the general allegations in the same tone ingeminated with parrot-like similarity by the prosecution witnesses, the allegation of cruelty and harassment to the deceased is founded
on
the
confidential communications by her to her parents in particular and is not supported by any other quarter. 35. A cumulative consideration of the overall evidence on the facet of dowry, leaves us unconvinced about the truthfulness of the charge qua the accused persons. The prosecution in our estimate, has failed to prove this indispensable component of the two offences beyond reasonable doubt.
The factum of unnatural death in the matrimonial home and that too within seven years of marriage therefore is thus ipso facto not sufficient to bring home the charge under Sections 304-B and 498-A of the Code against them."
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16. न्यायादृष्ट Sharad Birdi Chand Sarda v. State of Maharashtra, (1984) 4 SCC 116 क मांमांल मांV मां या उच्चमां न्यायालया द्वार मांcक क तिकटमां पुरिर<j कH सक्ष्या क तिवे+या मांV कण्डि./क-48 मांV तिम्सर अतिभव्यातिक्ता
हJa-
"48. Before discussing the evidence of the witnesses we might mention a few preliminary remarks against the background of which the oral statements are to be considered. All persons to whom the oral statements are said to have been made by Manju when she visited Beed for the last time, are close relatives and friends of the deceased. In view of the close relationship and affection any person in the position of the witness would naturally have a tendency to exaggerate or add facts which may not have been stated to them at all. Not that this is done consciously but even unconsciously the love and affection for the deceased would create a psychological hatred against the supposed murderer and, therefore, the Court has to examine such evidence with very great care and caution. Even if the witnesses were speaking a part of the truth or perhaps the whole of it, they would be guided by a spirit of revenge or nemesis against the accused person and in this process certain facts which may not or could not have been stated may be imagined to have been stated unconsciously by the witnesses in order to see that the offender is punished. This is human psychology and no one can help it."
11 / 20 {Cr. A. No.-15 of 2021}
17. उपुर*क्ता तिवेजिFक प्रवेF र्थी न्यायादृष्ट j क प्रकश मांV याह ख < आवेश्याक हJ तिक क्या स मां (मांcक) क* उसकH "मांcत्या स ठ क पुLवे" ह< कH मां ग कर हeए उसक सर्थी "क्रL र" अर्थीवे "प्रतिk" तिकया गया र्थी? 18. इस तिवे+या मांV अपु लर्थी?
कH *+जिसतिद्ध मांLलa मांcक कH मांp स श (अ०स०-5), तिपु <रमां (अ०स०-6) और चचर भई पुप्पुL भरद्वा< (अ०स०-9) क या पुर आFरिर हg, क्याjतिक अन्या स्वे त्र स पुद्र*ह ह* चक हg । चL तिक या
j स मांcक क मां-तिपु एवे तिकटमां रिरश्र हg इसजिलए उक सक्ष्याj कH सLक्ष्मांपुLवेक समां तिकया < आवेश्याक हJ ।
19. मांcक कH मांp स श (अ०स०-5) क असर, स मां याह र्थी तिक अपु लर्थी? तिश क मांर "पुJस कH मां ग" कर र्थी र्थी रम्र "Lसर तिवेवेह" कर कH FमांकH र्थी । मांcक क तिपु <रमां (अ०स०-6) क असर, अपु लर्थी? द्वार उसस "मां*टरसइतिकल और 80,000/-रूपुया" कH मां ग कH <
र्थी । वेहl चचर भई पुप्पुL भरद्वा< (अ०स०-9) क असर, स मां याह
र्थी तिक अपु लर्थी? द्वार "]कर क जिलए पुJस कH मां ग" कH < र्थी । मांp स श (अ०स०-5) भ प्रतिपुर र्ण कH कण्डि./क-12 मांV याह स्वे कर तिकया हJ तिक अपु लर्थी? द्वार "]कर लग क जिलए पुJस कH मां ग" कH < रह र्थी । ]कर
लग क जिलए पुJस कH याह मां ग "आजिर्थीक सहया*ग" क रूपु मांV ख < सक हJ, तिक इस "ह< कH मां ग" र्थी उसक जिलए "क्रL र" या "प्रk" क रूपु मांV स्वे कर कर न्यायास ग प्र हl ह* ।
12 / 20 {Cr. A. No.-15 of 2021}
20. The Supreme Court in the matter of Appasaheb and another v. State of Maharashtra, (2007) 9 SCC 721 has clearly observed that demand for money on account of some financial stringency or for making some urgent domestic expenses or for purchasing manure cannot be termed as a demand for dowry as the said word is normally understood and held in para-9, 10 & 11 as under:-
"9.
Two essential ingredients of Section 304-B IPC, apart from others, are (i) death of woman is caused by any burns or bodily injury or occurs otherwise than under normal circumstances, and (ii) woman is subjected to cruelty or harassment by her husband or any relative of her husband for, or in connection with, any demand for
“dowry”. The explanation appended to sub- section (1) of Section 304-B IPC says that
“dowry” shall have the same meaning as in Section 2 of the Dowry Prohibition Act,
1961. 10. Section 2 of the Dowry Prohibition Act reads as under:
“2. Definition of ‘dowry’.—In this Act, ‘dowry’ means any property or valuable security given or agreed to be given either directly or indirectly—
13 / 20 {Cr. A. No.-15 of 2021} (a) by one party to a marriage to the other party to the marriage; or (b) by the parents of either party to a marriage or by any other person, to either party to the marriage or to any other person, at or before or any time after the marriage in connection with the marriage of the said parties, but does not include dower or mahr in the case of persons to whom the Muslim personal law (Shariat) applies.”
11. In view of the aforesaid definition of the word “dowry” any property or valuable security should be given or agreed to be given either directly or indirectly at or before or any time after the marriage and in connection with the marriage of the said parties. Therefore, the giving or taking of property or valuable security must have some connection with the marriage of the parties and a correlation between the giving or taking of property or valuable security with the marriage of the parties is essential. Being a penal provision it has to be strictly construed. Dowry is a fairly well-known social custom or practice in India.
It is well- settled principle of interpretation of statute that if the Act is passed with reference to a particular trade, business or transaction and words are used which everybody conversant with that trade, business or transaction
14 / 20 {Cr. A. No.-15 of 2021} knows or understands to have a particular meaning in it, then the words are to be construed as having that particular meaning. (See Union of India v. Garware Nylons Ltd. [(1996) 10 SCC 413 : AIR 1996 SC 3509] and Chemical and Fibres of India Ltd. v. Union of India [(1997) 2 SCC 664 : AIR 1997 SC 558] .) A demand for money on account of some financial stringency or for meeting some urgent domestic expenses or for purchasing manure cannot be termed as a demand for dowry as the said word is normally understood. The evidence adduced by the prosecution does not, therefore, show that any demand for
“dowry” as defined in Section 2 of the Dowry Prohibition Act was made by the appellants as what was allegedly asked for was some money for meeting domestic expenses and for purchasing manure. Since an essential ingredient of Section 304-B IPC viz. demand for dowry is not established, the conviction of the appellants cannot be sustained.”
21. मांp स श (अ०स०-5) अपु कर्थी मांV याह भ कह हJ तिक < उस स मां क शवे क* ख, * उसक चहर पुर सL< र्थी शर र और पु ठ पुर मांरपु ट क तिश र्थी । पुर शवे क पुर र्ण कर वेल तिचतिकत्सक स]रभ यावे (अ०स०-7) अपु पुर र्ण प्रतिवे मांV इस प्रकर कH तिकस भ च*ट क उल्लेख हl तिकया हJ । शवे पु चमां प्रश पु -2 मांV भ ऐस तिकस च*ट क तिवेवेरर्ण हl हJ । ऐस अवेस्र्थी
15 / 20 {Cr. A. No.-15 of 2021} मांV तिश ह* हJ तिक मांp स श (अ०स०-5) द्वार ढ़-चढ़कर कर्थी तिकया गया हJ ।
22.
<हp क, तिपु <रमां (अ०स०-6) द्वार "मां*टरसइतिकल और 80,000/- रूपुया" कH मां ग तिकए < क प्रश् हJ, इस स F मांV तिवेचर करV * याह थ्या स्वेया मांcक क तिपु <रमां (अ०स०-6) और मांp स श (अ०स०-5) क प्रतिपुर र्ण स स्पुष्ट ह* हJ तिक अपु लर्थी?, < उकH ट स मां क* लकर उक घर आ र्थी और 1-2 ति रुक र्थी, * वेह हमांश मां*टरसइतिकल स ह आ र्थी । इसस पुरिरलति ह* हJ तिक अपु लर्थी? क पुस पुहल स ह मां*टरसइतिकल उपुलब्F र्थी । ऐस ण्डिस्र्थीति मांV याह स्वे कर कर तिक अपु लर्थी? मां*टरसइतिकल कH मां ग कH र्थी , स्वेभतिवेक एवे क स ग प्र हl ह* ।
23. याह उल्लेख या हJ तिक घट ति क-02/10/2018 कH हJ, <तिक मांcक क तिपु
<रमां (अ०स०-6) द्वार गई जिलजिख तिशकया प्रश पु -7 ति क-26/ 10/2018 कH हJ । उस तिशकया एवे मांग < च क आFर पुर प्रर्थीमां सLच पुत्र ति क-23/11/2018 क* < कH गई । याह स्पुष्ट हJ तिक घट क त्कल पुश्च "ह< कH मां ग", "क्रL र" अर्थीवे "प्रk" क स F मांV क*ई त्वेरिर तिशकया पुजिलस क* हl गई र्थी । शवे पु चमां प्रश पु -2 क समांया मांcक क तिपु <रमां (अ०स०-6) स्वेया उपुण्डिस्र्थी र्थी । उस समांया उक हवेल स पु चमां मांV याह अवेश्या उल्लेजिख हJ तिक तिवेवेह क एक वे+ पुश्च स ह स मां क* उसक पुति द्वार "रूपुया एवे मां*टरसइतिकल" कH मां ग कर हeए प्रतिk तिकया < लग र्थी । र्थीतिपु, इस कजिर्थी प्रk क फलस्वेरूपु प्रर्थी? पु द्वार अपु लर्थी? 16 / 20 {Cr. A. No.-15 of 2021} क* क*ई रकमां अर्थीवे मां*टरसइतिकल गई ह*, इसक क*ई प्रत्या या स्पुष्ट उल्लेख अतिभलखj मांV हl हJ । इसक तिवेपुर , याह थ्या सक्ष्या स स्र्थीतिपु ह* हJ तिक अपु लर्थी? स्वेया मां*टरसइतिकल स मांcक क* उसक मांयाक लकर आ-< र्थी, जि<सस याह अमां कर तिक वेह मां*टरसइतिकल कH मां ग कर रह र्थी, तिवेश्वेस या प्र हl ह* हJ । इसक अतिरिरक्ता, मांcक क मां-तिपु क न्यायालया
याj मांV भ आपुस तिवेर*Fभस पुरिरलति ह* हJ । <हp तिपु <रमां (अ०स०-6) क कर्थी हJ तिक मांcक उस र्थी तिक अपु लर्थी?
उस "पुगल
ह*" कहकर मांजिसक रूपु स पुरश कर र्थी, वेहl मांp स श (अ०स०-5) क कर्थी हJ तिक मांcक उस र्थी तिक अपु लर्थी? "Lसर तिवेवेह" कर कH FमांकH र्थी । इस प्रकर, मांcक क मां-तिपु क या मांV ह ग भ र तिवेर*Fभस कH ण्डिस्र्थीति हJ ।
24. मांcक कH मांp स श (अ०स०-5) र्थी तिपु <रमां (अ०स०-6) प्रतिपुर र्ण मांV याह स्वे कर तिकया हJ तिक घट स पुLवे उन्हj कभ समां< मांV अर्थीवे पुजिलस मांV इस आशया कH क*ई तिशकया हl कH र्थी तिक अपु लर्थी? अर्थीवे उसक पुरिर<j द्वार स मां क* ह< कH मां ग कर हeए प्रतिk तिकया < रह हJ । <ह तिपु <रमां (अ०स०-6) “80,000/-रूपुया और मां*टरसइतिकल" कH मां ग तिकए < क कर्थी तिकया हJ, वेहl मांp स श (अ०स०-5) जिसफ "रकमां कH मां ग" तिकए < क कर्थी तिकया हJ । तिपु <रमां द्वार गई जिलजिख तिशकया प्रश पु -7 मांV *पुतिहया वेह क उल्लेख हJ, तिक इसमांV याह स्पुष्ट हl तिकया गया हJ तिक तिक रकमां कH मां ग कH गई र्थी । इ तिवेर*Fभसj क आFर
17 / 20 {Cr. A. No.-15 of 2021} पुर मां-तिपु क <* सक्ष्या आया हJ उस खV * तिवेजिFक प्रवेF र्थी न्यायादृष्ट j क प्रकश मांV वे कर्थी स ह स पुर इस थ्या क* स्र्थीतिपु कर वेल हl हJ तिक "मांcत्या स ठ क पुLवे" स मां क सर्थी ह< कH मां ग क* लकर क्रL रपुLवेक व्यावेहर तिकया गया र्थी अर्थीवे उस प्रतिk तिकया गया र्थी ।
25. मांp स श ई (अ०स०-5) अपु न्यायालया कर्थी मांV घट क ति क <* उल्लेख तिकया हJ वेह कण्डि./क-5 मांV तिम्सर हJa-
“5.
घट क ति भ स मां मांर पुति क* फ* करक कह तिक तिश पुJस मां ग रह हJ मांg मांर पुति क* याह कह हeए स र्थी तिक मांg पुJस कह स L ग इसक स मां < अपु सस ससर स कह तिक मांर पुपु पुJस कह स Vग * उसक सस ससर कह तिक र पुपु हर कमां हJ gक मांV पुJस <मां कर हg पुJस कJ स हl सक, उक्ता मांझू स मां ई र्थी । इसक मां*ईल क* च्च क हर्थी मांV तिया च्च क छ हl हJ क छ हl हJ *ल और मां*ईल तिफर स मां क हर्थी मांV तिया । मांg कह तिक तिश ट./ स करओ * स मां कह वे* हर गए हg इसक फ* क* कर तिया और मांर पुति मां*ईल लकर ड्यूLट
चल गया ।"
26. इस तिवे+या मांV, मांcक क तिपु <रमां (अ०स०-6) क कर्थी कण्डि./क-3 मांV तियामांसर हJa-
“3. 2 अक्टLर क* तिश मांझू फ* लगकर मांर लkकH क* तिया मांर लkकH मांझू कह तिक मां पुJस हl तिया हg इस करर्ण तिश मांझू मांरपु ट कर प्रतिk कर रह हJ, जि<सक हमां फ* कर तिया । उस ति 11 < तिश
18 / 20 {Cr. A. No.-15 of 2021} मांझू फ* तिकया और *ल तिक मांलमांल आ <ओ, मांg कह क्या ह* गया * उस कह तिक स मां फ स लग ल , 10-15 तिमांट तिफर मांझू फ* तिकया और कह तिक मां ल*ग पुमांगढ़ आ <ओ, हमां ल*ग < पुमांगढ़ गए हमां ख तिक स मां मांर चकH र्थी उसक ऊपुर चर ढकH हeई र्थी । जि<सक /‰क्टर, पुजिलस वेल स आ गए, पु चमां लग हमांस स्ख़ कर लग ।"
27. उक्ता रूपु मांV मांcक स मां क मां-तिपु द्वार <* थ्या ए गए हg, उक असर
"मांcत्या स ठ क पुLवे" स मां अपु तिपु <रमां (अ०स०-6) क* फ* कर याह या र्थी तिक अपु लर्थी? तिश क मांर द्वार उसस पुJस कH मां ग कH < रह हJ । तिक , मां-तिपु क याj मांV इस स F मांV स्पुष्ट क अभवे हJ । मांp स श (अ०स०-5) क असर, स मां याह भ कह र्थी तिक अपु लर्थी?
तिश क मांर उस "मांरपु ट कर प्रतिk" कर रह हJ, तिक शवे पुर र्ण रिरपु*ट मांV स मां क शर र पुर ऐस तिकस प्रकर कH च*ट हl पुया गई हJ । मांp स श (अ०स०-5) क या स याह पुरिरलति ह* हJ तिक < स मां फ* पुर च कH र्थी , उस समांया अपु लर्थी?/पुति तिश वेह पुर उपुण्डिस्र्थी हl र्थी, ण्डि‚क स मां याह <कर
र्थी तिक वेह घर स हर हJ । याति याह थ्या सत्या ह* तिक स मां अपु मांcत्या स ठ क पुLवे फ* पुर अपु तिपु क* अपु लर्थी? तिश द्वार पुJस कH मां ग एवे प्रk कH ई र्थी , * याह एक मांहत्वेपुLर्ण तिवेवेरर्ण क रूपु मांV शवे पु चमां प्रश पु -2 मांV अवेश्या उल्लेजिख ह*, जि<समांV स मां क तिपु <रमां (अ०स०-6) द्वार पुLवे प्रk स F कर्थी तिकए गए हg । तिक , शवे पु चमां मांV इस क क*ई उल्लेख हl हJ तिक मांcत्या स पुLवे स मां अपु तिपु क* इस प्रकर कH <कर फ* पुर र्थी । याह भ उल्लेख या हJ तिक घट क लगभग
19 / 20 {Cr. A. No.-15 of 2021} 24 ति पुश्च, ति क-26/10/2018 क* तिपु <रमां (अ०स०-6) द्वार पुजिलस अF क क* गई जिलजिख तिशकया प्रश पु -7, जि<सक आFर पुर अपुरF पु < द्घो तिकया गया, उसमांV भ इस थ्या क क*ई उल्लेख हl हJ तिक स मां उस ति मांcत्या स पुLवे पुJस कH मां ग या प्रk क स F मांV क*ई <कर फ* पुर
र्थी । इसजिलए मांcक स मां क मां-तिपु क कर्थी तिक मांcत्या स ठ क पुLवे स मां मां*ईल फ* पुर उस च कH र्थी वेह स ह स पुर तिवेश्वेस या हl पुया
< ।
28.
इस प्रकर, उपुर*क्ता तिवेवेच स याह न्यायालया पु हJ तिक मां-तिपु द्वार तिकए गए कर्थी, तिवेजिFक प्रवेFj और न्यायादृष्ट j क प्रकश मांV ढ़-चढ़कर तिकए गए कर्थी हg । "मांcत्या स पुLवे" प्रर्थी? पु द्वार पुजिलस या समां< मांV इस क*ई तिशकया हl कH गई तिक स मां क* उसक ससरलवेलj क द्वार ह< कH मां ग कर हeए प्रतिk तिकया < ह* । तिपु <रमां (अ०स०-6) स्वेया याह स्वे कर तिकया हJ तिक उन्हj अपु लर्थी? पु क समांजि<क-आजिर्थीक ण्डिस्र्थीति खकर र्थी उसस स ष्ट ह*कर तिवेवेह या तिकया र्थी । मांp स श (अ०स०-5) भ
याह स्वे कर तिकया हJ तिक उकH आमां क सF मां<Lर हJ, <तिक अपु लर्थी? पु क पुस कc ति+ भLतिमां हJ । मां-तिपु क याj मांV ग भ र अ तिवेर*F कH ण्डिस्र्थीति हJ । उक या क असर, पुजिलस मांV गई जिलजिख तिशकया मांV प्रमांख थ्याj क उल्लेख हl तिकया गया हJ ।
29. इस अवेस्र्थी मांV, मांcक स मां क तिकटमां पुरिर<j द्वार "ह< कH मां ग" एवे
"प्रk" स F <* कर्थी तिकए गए हg, वे स ह स पुर तिवेश्वेस या हl पुए <।
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30. उपुर*क्ता तिवेवेच क आFर पुर याह न्यायालया पु हJ तिक अतिभया*< स ह स पुर याह प्रमांतिर्ण कर मांV असफल रह हJ तिक स मां क* "मांcत्या स ठ क पुLवे" ह< क जिलए "प्रतिk" तिकया गया र्थी । अपु लर्थी? कH *+जिसतिद्ध स्पुष्ट, पुLर्ण, तिवेश्वेस या और वेJF सक्ष्या पुर आFरिर हl हJ । ऐस श मांV, “प्रश्F तिर्णया” ण्डिस्र्थीर रख < या*ग्या हl पुया < ।
31. अa अपु ल स्वे कर कH < हJ । “प्रश्F तिर्णया” अपुस् तिकया < हJ र्थी अपु लर्थी? क* स ह क लभ हeए आर*तिपु अपुरF स *+मांक्ता तिकया < हJ ।
32. अपु लर्थी? तिश क मांर वेमां मांV <मां पुर हJ । उसक <मां-मांचलक आगमां 06 मांह क जिलए प्रभवेश ल रहग । इसक पुश्च, याति तिकस अन्या न्यायालया मांV उसकH उपुण्डिस्र्थीति कH आवेश्याक हl पुई < हJ, * उस मांक्ता समांझू <एग ।
33. तिर्णया कH प्रति क सर्थी तिवेचरर्ण न्यायालया क* मांLल अतिभलख आवेश्याक कयावेह
ह सLचर्थी एवे पुलर्थी श घ्रपुLवेक वेपुस प्रति+ तिकया <ए । सह /- (स <या क मांर <यासवेल) न्यायाF श पु*मां